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Pagophagia Disorder : इस बीमारी में बार-बार बर्फ खाने की होती है इच्छा, जानें इसकी वजह और इलाज
Why is eating ice bad for you : गर्मी आते ही हम में से कई लोगों को बार-बार बर्फ चबाने की इच्छा होती है। अगर आप भी इन्हीं में से एक हैं, तो आपको बता दें कि बर्फ खाने की ये लत दरअसल एक बीमारी होती है। इस ईटिंग डिसऑर्डर को पैगोफैगिया कहा जाता है।
ये बिल्कुल उसी तरह की लत है, जिसमें किसी व्यक्ति को चॉक या मिट्टी जैसी चीजें खाने का मन करता है। ऐसी आदतें यह अक्सर पोषण तत्वों की कमी के वजह से होती है।

वैसे पैगोफैगिया की बीमारी आयरन की कमी भी संकेत हो सकता है, जिसमें लाल रक्त कोशिकाओं में गिरावट आती है, नतीजन शरीर मे खून की कमी। इसके अलावा, कुछ अध्ययनों में यह बात सामने आई है। यह ईटिंग डिसऑर्डर कुछ गंभीर शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक बीमारियों का संकेत हो सकती है।
इन कारणों से होती है बर्फ खाने की इच्छा
एनिमिया: शरीर में जब आयरन की कमी होती है तो बर्फ खाने की इच्छा होती है। एनीमिया से पीड़ित लोगों में लाल रक्त कोशिकाओं का लेवल कम होता है, जो शरीर के चारों ओर ऑक्सीजन ले जाने के लिए आवश्यक होते हैं। जिसकी वजह से बर्फ खाने की इच्छा बढ़ जाती है।
गर्भावस्था या पीरियड : इस कंडीशन में भी शरीर में आयरन की कमी होती है, जिस कारण बर्फ खाने की इच्छा बढ़ जाती है।
डेफिशियेंसी : जब शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने लगती है, तब बर्फ खाने की इच्छा बढ़ जाती है। सिर्फ यही नहीं, अधिक मीठे या शर्करा युक्त बर्फ वाले पेय पदार्थों को पीने की इच्छा भी तेज हो सकती है।
बर्फ खाने के नुकसान
- बर्फ चबाना दांतों के लिए जो हानिकारक हो सकता है। बर्फ चबाने से दांतों के इनेमल टूट सकती है। जिससे आपको रूट कैनाल थेरेपी की आवश्यकता पड़ सकती है।
- बर्फ खाने से धमनियों पर असर पड़ता है और वो संकुचित हो जाती हैं। जो किसी भी परिस्थिति में ठीक नहीं है।
- बर्फ खाने या बर्फ युक्त पानी पीने से उसे पचाने में ज्यादा समय लगता है। इससे शरीर को पोषण मिलने में काफी समय लगता है.
- बर्फ खाने या बर्फ युक्त पानी पीने से रोग प्रतिरक्षा प्रणाली पर भी बुरा असर पड़ता है. जिसकी वजह से ऐसा पानी पीने वालों को हमेशा ही सर्दी और जुकाम जैसी समस्याएं बनी रहती हैं।
- बर्फ खाने या बर्फ युक्त पानी पीने से मल सख्त होता है जिससे बवासीर या फिर आंतों में घाव की समस्या हो सकती है।
- बर्फ का एक तेज टुकड़ा खाने से आपके मसूड़ों को संभावित रूप से नुकसान हो सकता है और इसके परिणामस्वरूप मसूड़ों की कुछ गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
इसका ट्रीटमेंट
इस समस्या के इलाज की बात करें, तो कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी (CBT) या टॉक थेरेपी के माध्यम से इसका इलाज किया जा सकता है। अन्य पोषक तत्वों की कमी का इलाज करने से भी पैगोफैगिया के आहार में बदलाव भी इन कमियों को दूर करने में मदद कर सकता है। अधिक पत्तेदार हरी सब्जियां या रेड मीट खाने से आयरन का स्तर बढ़ सकता है। डेयरी उत्पाद और बीन्स कैल्शियम के अच्छे स्रोत हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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