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भगवान जगन्नाथ को लगी लू, रिकवरी के लिए पिएंगे ये चमत्कारी काढ़ा, जानें रेसिपी और फायदे
पुरी में हर साल की तरह इस बार भी ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा पर देव स्नान कराने के बाद से बीमार हो गए हैं। ठंडे पानी से स्नान करवाने की वजह से बुखार आ गया है। तबीयत ठीक न होने के वजह से वो 15 दिन आराम करेंगे और इस दौरान भगवान की सेवा की जाएगी।
यही वजह है कि 15 दिन तक मंदिरों के पट भी बंद रहेंगे और उनका इलाज किया जाएगा। बीमारी की वजह से मंदिर में इन 15 दिनों तक कोई भी घंटे आदि नहीं बजेंगे और न ही भगवान को अन्न का कोई भोग नहीं लगेगा। इन 15 दिनों तक भगवान जगन्नाथ को आयुर्वेदिक काढ़े का भोग लगाया जाता है और यही प्रसाद के रूप में वितरित कर दिया जाता है। आइए जानते हैं भगवान जगन्नाथ को चढ़ाए जाने वाले इस काढ़े के बारे में-

इसे लेकर है मान्यता
दिन में दो बार आरती से पहले भगवान जगन्नाथ को काढ़े का भोग लगाया जाता है। भगवान को रोज शीतल लेप भी लगाया जाता है। बीमारी के दौरान उन्हें फलों का रस, छेना का भोग लगता है और दो समय काढ़ा पिलाया जाता है। वैसे इस काढ़े को लेकर धार्मिक मान्यता है कि जो भी भक्त 15 दिनों तक इसका सेवन करता है, उसे बीमारियां छू भी नहीं पाती हैं।
कैसे तैयार होता है यह खास काढ़ा
200 साल से अधिक समय से यह परम्परा चली आ रही है.भगवान जगन्नाथ को आषाढ़ कृष्ण प्रतिपदा तिथि से 15 दिनों के लिए परवल के काढ़े का भोग लगाया जाता है। इस काढ़े को तुलसी, लौंग, इलाइची, मरीच, दालचीनी और सौंफ सहित कई जड़ी बूटियों और मसाले का प्रयोग कर बनाया जाता है।
इसे तैयार करने के बाद गुपचुप तरीके से भगवान जगन्नाथ को इसे चढ़ाया जाता है और फिर प्रसाद के तौर पर इसे भक्तों में वितरित किया जाता है।
काढ़ा पीने के फायदे
जब भी कोई वायरल या इंफेक्शन होता है लोग तुरंत काढ़ा पीने की ही सलाह देते हैं। दरअसल काढ़ा बनाने में काली मिर्च, तुलसी, लौंग जैसी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है, इन सभी मसालों में एंटीबैक्टीरियल और एंटी फंगल गुण मौजूद होते हैं। जो शरीर में इंफेक्शन को खत्म कर रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है, जिससे हमारा शरीर रोगों से लड़ने में सक्षम होता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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