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बार-बार कोरोना संक्रमण होने पर बढ़ सकता है मौत का खतरा! स्टडी में हुआ खुलासा

अध्ययन के मुताबिक, SARS-CoV-2 वायरस से बार-बार संक्रमितण बॉडी पार्टस फेल होने लगते हैं, जिसके कारण मौत का खतरा बढ़ जाता है। जिससे साफ पता चलता है कि बार-बार कोरोना संक्रमण होने की संभावना को कम करने के लिए सावधानी जरूरी है। एक रिसर्च में पाया गया कि बार-बार कोरोना संक्रमण कई अंग प्रणालियों में प्रतिकूल स्वास्थ्य स्थितियों के महत्वपूर्ण अतिरिक्त जोखिम में अपना योगदान देता है। ऐसे परिणामों में अस्पताल में भर्ती होना, किडनी, दिल, मस्तिष्क और शरीर के रक्त, मस्कुलोस्केलेटल और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सिस्टम को प्रभावित करने वाली बीमारी और मौत भी शामिल है।
शोधकर्ताओं को मुताबिक, " पिछले कुछ महीनों के दौरान, उन लोगों के बीच अजेयता रही है जिनके पास COVID-19 या उनके वैक्सीनेशन और बूस्टर हैं, और विशेष रूप से उन लोगों के बीच जिन्हें वैक्सीन लगवाने के बाद भी संक्रमण हुआ है। कुछ लोगों ने इन व्यक्तियों को वायरस के प्रति एक प्रकार की अतिप्रतिरक्षा के रूप में संदर्भित करना शुरू किया है।" शोध से पता चला है कि एक संक्रमण दूसरी, तीसरी या चौथी बार तीव्र चरण में अतिरिक्त स्वास्थ्य जोखिमों में योगदान देता है।
अध्ययन में यह भी संकेत दिया गया है कि सभी संक्रमण के साथ जोखिम बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। जिसका अर्थ है कि भले ही आपको दो बार कोरोना संक्रमण हुआ है, तो तीसरे बार कोरोना संक्रमण से बचना बेहतर उपाय है। ऐसे में वायरस के संपर्क को सीमित करना बहुत ज्यादा जरूरी हो जाता है, क्योंकि इसके नए़ संस्करण उभर रहे हैं। पहले से ही दुनिया के कुछ हिस्सों में संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में कोरोना संक्रमण से बचने के लिए लोगों को मास्क लगाना चाहिए।
सर्दी के मौसम में COVID-19 और फ्लू दोनों तेजी से फैलता है। इन दोनों का आपसी संबंध बहुत खतरनाक है। ऐसे में इसको कम करने की संभावना को कम करने के लिए कोशिश करना जरूरी होता है।
शोधकर्ताओं ने 4 लाख से ज्यादा लोगों के एक नियंत्रण समूह को भी संकलित किया, जिन्होंने कोरोना संक्रमण के लिए सकारात्मक परीक्षण किया। और लगभग 41 हजार लोगों के एक अन्य समूह को, जिन्हें दो या दो से ज्यादा बार कोरोना का संक्रमण झेला है। उन्होंने कहा कि वायरस के संपर्क में आने के पहले 30 दिनों के अंदर और 6 महीने बाद तक बार-बार होने वाले कोरोना संक्रमण के स्वास्थ्य जोखिमों की जांच के लिए सांख्यिकीय मॉडलिंग का यूज किया था। इस अध्ययन में डेल्टा, ओमिक्रॉन और BA.5 जैसे कोरोना वेरिएंट को शामिल किया गया। जिसमें वैक्सीनेशन न करवाने वाले लोगों के साथ-साथ उन लोगों के बीच नकारात्मक परिणाम सामने आए जिन्हें पुनर्संक्रमण से पहले टीके लगवाए गए थे। शोधकर्ताओं ने पाया कि दोबारा कोरोना संक्रमण वाले लोगों की मृत्यु होने की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है। अस्पताल में भर्ती होने की संभावना उन लोगों की तुलना में तीन गुना ज्यादा थी, जिन्हें दोबारा संक्रमण नहीं हुआ।
बार-बार कोरोना संक्रमण वाले लोगों में फेफड़ों की समस्याओं के विकसित होने की संभावना तीन गुणा ज्यादा है। दिल की बीमारी से पीड़ित होने की संभावना तीन गुना ज्यादा थी और मस्तिष्क की स्थिति का अनुभव करने की संभावना 1.6 गुना ज्यादा थी। इसलिए कोरोना संक्रमण से बचने के लिए इसके उपायों को करना बहुत जरूरी होता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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