Scrub Typhus: हिमाचल में स्‍क्रब टाइफस से हुई 2 मौत, जानें इस रहस्‍यमयी बीमारी के लक्षण और बचाव के तरीके

Scrub Typhus Fever: डेंगू और वायरल बुखार के बीच अब दिल्ली-एनसीआर के आसपास स्क्रब टाइफस ने भी दस्तक दे दी है। दिल्ली से सटे गाजियाबाद में तो स्क्रब टाइफस से अब तक 13 लोग बीमार हो चुके हैं। वहीं ह‍िमाचल प्रदेश में अब तक दो लोगों की मौत स्क्रब टायफस से हो चुकी है और 102 पॉज‍िट‍िव केस म‍िले हैं।

इसे बुश टाइफस के नाम से भी जाना जाता है। इसके चलते मरीज के सेंट्रल नर्वस सिस्टम, कार्डियो वस्कुलर सिस्टम, गुर्दे, सांस से जुड़ी और गैस्ट्रोइन्टेस्टाइनल सिस्टम को प्रभावित हो जाता है। डॉक्टरों की मानें तो यह फीवर अगर लंबे समय तक बना रहे तो मरीज का मल्टीऑर्गन फेलियर हो सकता है और मरीज की जान जाने का भी खतरा रहता है। ऐसे में इस बुखार के बारे में जानकारी रखना सभी के लिए जरूरी है।

scrub Typhus Fever

स्क्रब टाइफस के कारण

स्क्रब टाइफस पिस्सू के काटने से फैलता है। इस बीमारी को फैलने में दो से तीन सप्ताह का समय भी लग सकता है। झाड़ियों, खेतों, कच्चे रास्तों, कैंपिंग, जंगलों या चूहों वाले स्थानों से होकर गुजरने वाले लोग अधिकतर इस रोग की चपेट में आते हैं। झाड़ियों में रहने वाले यह पिस्सू व्यक्ति को काट लेते हैं। इसके बाद संबंधित व्यक्ति के शरीर पर लाल निशान पड़ जाता है और चमड़ी उखड़ने के बाद निशान काले रंग का होने लगता है।

स्क्रब टाइफस के लक्षण

स्क्रब टाइफस के लक्षणों में मरीज को तेज बुखार, सिर दर्द, मांसपेशियों में अकड़न और शरीर टूटना, सांस लेने में परेशानी, उल्टी, जी मचलाना, जोड़ों में दर्द, कंपकंपी के साथ बुखार होता है। कीड़ा काटने वाले स्थान पर काला धब्बा बन जाता है। मरीजों को इस इन लक्षण होने पर तुरंत अस्पताल में आकर स्क्रब का टेस्ट करवाना चाहिए।

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स्क्रब टाइफस से बचाव

सीडीसी के अनुसार, स्क्रब टाइफस को रोकने के लिए अभी कोई वैक्सीन नहीं है। सीडीसी के अनुसार यह संक्रमण उन जगहों पर जाने से बचना चाहिए जहां यह स्क्रब टायफस आम है। यह कीड़ा घास, पौधों या ज्यादा नमी वाले स्थानों पर होता है। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों जब भी पशुओं के लिए चारा लेने जंगल और घासनियों में जाते हैं तो उन्हें पूरी बाजू वाली कमीज पहन कर जाना चाहिए। शरीर का अधिक से अधिक भाग ढक कर रखें। स्क्रब टाइफस के लक्षण पाए जाने पर तुरंत अस्पताल में जाकर इलाज करवाएं। मरीज का जितनी जल्दी इलाज शुरू होगा, उसे बचाने में सफलता उतनी ही ज्यादा रहती है। लोगों को इस तरह के लक्षण दिखते ही अस्पताल आना चाहिए।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

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