मल्टीविटामिन लेने से पहले ध्यान दें, कहीं आप भी तो नहीं कर रहीं सेहत से खिलवाड़

Multivitamin for women Benefits vs Risks: भारत में स्वास्थ्य जागरूकता के बढ़ते दौर में, महिलाओं के लिए मल्टीविटामिन को एक जरूरी कवच की तरह पेश किया जा रहा है। बाजार में उपलब्ध गुलाबी पैकेजिंग वाले इन सप्लीमेंट्स को ऊर्जा, हार्मोनल संतुलन, चमकती त्वचा और मजबूत इम्यून सिस्टम देने वाला बताया जाता है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या वाकई महिलाओं को रोज इनकी जरूरत है, या यह केवल एक महंगी रणनीति है?

अगर आप भी बिना डॉक्टर की सलाह के मल्टीविटामिन लेने का सोच रही हैं या लेती हैं तो आज की खबर आपके लिए ही है। आइए जानते हैं कि क्या कहती है रिसर्च।

Multivitamin for women Benefits vs Risks

क्या मल्टीविटामिन बन सकते हैं जहर?

आजकल महिलाओं में तो मल्टीविटामिन खाने का चलन सा हो गया है। उन्हें लगता है कि इन्हें खाने से वो लंबे समय से जवान दिख सकती हैं और हेल्दी रह सकती हैं। मगर ये भी सच है कि किसी चीज की जरूरत न होने पर भी उसका सेवन किया जाए तो वो सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। जैसे कि शरीर में किसी विटामिन की कमी न हो और फिर भी उसे खाया जाए तो सेहत सुधरने की जगह बिगड़ सकती है।

डॉक्टर की सलाह पर ही लें मल्टीविटामिन

ऐसा नहीं है कि महिलाओं को मल्टीविटामिन की जरूरत नहीं होती है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ शरीर में कई शारीरिक कमजोरी आ जाती है। ऐसे में विटामिन जरूरी तो हैं लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह के इन्हें लेना कई बार खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे में पहले टेस्ट करवाएं और जिस विटामिन की कमी हो उसे ही लें।

किन परिस्थितियों में नहीं लें मल्टीविटामिन?

रिसर्च में सामने आया है कि यदि आहार संतुलित लिया जाए जिसमें हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज, पर्याप्त प्रोटीन और अच्छे वसा शामिल हों तो सामान्यतः शरीर को आवश्यक पोषण मिल जाता है। ऐसे में एक गोली सभी समस्याओं का हल कहना सही नहीं है। हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में सप्लीमेंट्स की भूमिका अहम मानी जाती है। उदाहरण के लिए: आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया, जो भारत की आधी से अधिक गर्भवती महिलाओं को प्रभावित करता है। फोलिक एसिड, गर्भावस्था के दौरान शिशु के सही विकास के लिए अनिवार्य है। विटामिन D, जिसकी कमी शहरी क्षेत्रों में धूप की कमी के चलते आम है। कैल्शियम, विशेषकर मेनोपॉज के बाद हड्डियों की सेहत के लिए आवश्यक होता है।

रिसर्च क्या बताती है?

कई अध्ययनों में यह पाया गया है कि स्वस्थ महिलाओं, जिन्हें किसी पोषण की कमी नहीं है, में रोज मल्टीविटामिन लेने से बीमारियों की रोकथाम में कोई बड़ा लाभ नहीं मिलता। वहीं, फैट में घुलनशील विटामिन-A, D, E और K-की अधिक मात्रा शरीर में जमा होकर विषाक्तता का कारण बन सकती है।

सप्लीमेंट्स की गुणवत्ता पर भी सवाल

भारत में न्यूट्रिशन सप्लीमेंट इंडस्ट्री अभी तक पूरी तरह से सख्त नियमन के अंतर्गत नहीं है। कई स्वतंत्र अध्ययनों में कुछ प्रोडक्ट्स में लेबल से अलग तत्व, दूषित सामग्री या छिपे हुए रसायन पाए गए हैं। ऐसे में उपभोक्ता के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बोतल पर लिखे दावे सच भी हैं? अब आप ये तो समझ ही गए हैं कि मल्टीविटामिन लेने से पहले उसके सॉल्ट का जरूर पता कर लें।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

Story first published: Thursday, August 21, 2025, 15:10 [IST]
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