Latest Updates
-
Shardiya Navratri 2026 Day 7: नवरात्रि के सातवें दिन करें मां कालरात्रि की पूजा, जानें विधि, मंत्र, भोग व आरत -
Navratri Day 7 Wishes: मां कालरात्रि का आशीर्वाद...इन संदेशों के साथ अपनों को भेजें महासप्तमी की शुभकामनाएं -
‘रामायण’ के ट्रेलर लॉन्च के दौरान रणबीर कपूर की घड़ी क्यों हुई वायरल? कीमत सुन उड़ जाएंगे होश, जानें खासियत -
लंबे समय तक बैठे रहने से रीढ़ की हड्डी को पहुंचता है नुकसान, डॉक्टर ने बताया इतने घंटे में ब्रेक जरूरी -
Imran Khan Net Worth: भारत छोड़ने के आदेश के बाद इमरान खान की संपत्ति का क्या होगा? जानें कितनी है नेटवर्थ -
ग्रेटर नोएडा के इस गांव में आज भी होती है रावण की पूजा, दशहरे पर दहन बल्कि शोक मनाते हैं लोग -
Shardiya Navratri 2026 Day 6: नवरात्रि के छठे दिन करें मां कात्यायनी की पूजा, जानें विधि, मंत्र, भोग और आरती -
National Boss Day 2026 Wishes: कभी गाइड करते...बॉस डे पर अपने बॉस का दिल से कहें शुक्रिया, भेजें ये खास संदेश -
क्रिएटिनिन क्या होता है? जानें स्वस्थ किडनी के लिए क्रिएटिनिन का नॉर्मल लेवल कितना होना चाहिए -
Durga Puja Pandals in Delhi NCR: ये हैं दिल्ली-एनसीआर के टॉप 10 दुर्गा पूजा पंडाल, इस नवरात्रि जरूर करें दर्शन
Padmini Ekadashi Vrat Katha: पद्मिनी एकादशी के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, संतान प्राप्ति का मिलेगा आशीर्वाद
Padmini Ekadashi Vrat Katha: अधिकमास या पुरुषोत्तम मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मिनी एकादशी कहा जाता है। इसे 'पुरुषोत्तमी एकादशी' और 'कमला एकादशी' के नाम से भी जाना जाता है। इस साल पद्मिनी एकादशी 27 मई, बुधवार को मनाई जाएगी। स्कंद पुराण, पद्म पुराण, भविष्य पुराण और विष्णु पुराण में इस व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और अंत में अंत में विष्णुलोक की प्राप्ति होती है।

कहा जाता है कि संसार में इस व्रत से बढ़कर न कोई यज्ञ है और न ही कोई पुण्य कर्म। यह व्रत विशेष रूप से सुख-समृद्धि, उन्नति और संतान प्राप्ति के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं अर्जुन को इस एकादशी की महिमा और इसके शुभ फल के बारे में विस्तार से बताया था। पद्मिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करने और व्रत रखने से व्यक्ति को हर तरह के पापों से मुक्ति मिलती है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मान्यता है कि पद्मिनी एकादशी के दिन इसकी व्रत का पाठ या श्रवण अवश्य करना चाहिए, वरना व्रत अधूरा माना जाता है। तो आइए, जानते हैं पद्मिनी एकादशी की व्रत कथा के बारे में -
कब है पद्मिनी एकादशी 2026? (Padmini Ekadashi 2026 Kab Hai)
हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 26 मई 2026 को सुबह 5 बजकर 10 मिनट पर होगी। वही, इस तिथि का समापन 27 मई 2026 को सुबह 6 बजकर 21 मिनट पर होगा। उदयातिथि के आधार पर पद्मिनी एकादशी व्रत 27 मई 2026, बुधवार को रखा जाएगा।
पद्मिनी एकादशी 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त (Padmini Ekadashi 2026 Shubh Muhurat)
ब्रह्म मुहूर्त -सुबह 4:03 बजे से 4:44 बजे तक
लाभ-उन्नति मुहूर्त - सुबह 5:25 बजे से 7:08 बजे तक
अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त - सुबह 7:08 बजे से 8:52 बजे तक
शुभ-उत्तम मुहूर्त -सुबह 10:35 बजे से दोपहर 12:18 बजे तक
पद्मिनी एकादशी व्रत कथा (Padmini Ekadashi Vrat Katha In Hindi)
पौराणिक कथा के अनुसार, त्रेतायुग में महिष्मती नगरी में कीर्तवीर्य नाम के एक प्रतापी राजा राज्य करते थे। उनकी एक हजार रानियां थीं, लेकिन किसी भी रानी से उन्हें संतान प्राप्ति नहीं हुई। उत्तराधिकारी न होने के कारण राजा हमेशा चिंतित रहते थे। पुत्र प्राप्ति के लिए उन्होंने देवताओं की पूजा की, यज्ञ करवाए, पितरों का तर्पण किया और अनेक वैद्यों तथा ऋषियों से भी उपाय कराए, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। अंत में राजा ने कठोर तपस्या करने का निश्चय किया।
जब राजा वन में तप करने जाने लगे, तब उनकी प्रिय रानी पद्मिनी भी उनके साथ चल पड़ीं। रानी पद्मिनी इक्ष्वाकु वंश के राजा हरिश्चंद्र की पुत्री थीं। दोनों गंधमादन पर्वत पर पहुंचे और वहां वर्षों तक तपस्या की। राजा ने दस हजार वर्षों तक कठोर तप किया, लेकिन फिर भी उन्हें पुत्र प्राप्ति नहीं हुई।
एक दिन देवी अनुसूया ने रानी पद्मिनी को बताया कि अधिकमास का समय अत्यंत पुण्यदायी होता है, जो लगभग 32 महीनों में एक बार आता है। उन्होंने कहा कि यदि वे इस मास के शुक्ल पक्ष की पद्मिनी एकादशी का व्रत जागरण सहित करें, तो भगवान विष्णु प्रसन्न होकर उनकी मनोकामना अवश्य पूर्ण करेंगे।
रानी पद्मिनी ने पूरी श्रद्धा और नियम के साथ पद्मिनी एकादशी का व्रत किया। उन्होंने रात्रि में जागरण भी किया और भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रहीं। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु प्रकट हुए और उन्हें पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया।
व्रत के प्रभाव से राजा कीर्तवीर्य और रानी पद्मिनी को एक तेजस्वी और अत्यंत बलशाली पुत्र प्राप्त हुआ। कहा जाता है कि तीनों लोकों में भगवान विष्णु के अतिरिक्त कोई भी उसे पराजित करने में समर्थ नहीं था। मान्यता है कि जो व्यक्ति अधिकमास की इस पवित्र एकादशी का व्रत करता है और श्रद्धा से इसकी कथा सुनता या पढ़ता है, उस पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा बनी रहती है और अंत में उसे विष्णुलोक की प्राप्ति होती है।



Click it and Unblock the Notifications
