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भारत में पीरियड हेल्थ को मिली नई दिशा, 5वें MHM India Summit में रखे गए बदलाव के प्रस्ताव
पीरियड्स यानी माहवारी हर महिला की जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेकिन भारत में पीरियड्स पर बात करना आज भी कई जगहों पर सहज नहीं माना जाता। आज के आधुनिक समय में भी देश के कई हिस्सों में पीरियड हाइजीन को लेकर सही जानकारी और सुविधाओं की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। खराब पीरियड हाइजीन न सिर्फ महिलाओं के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि स्कूल, कामकाज और आत्मविश्वास पर भी असर डालता है। इसी विषय पर जागरूकता बढ़ाने, समाधान खोजने और बड़े स्तर पर बदलाव लाने के लिए हाल ही में 5वें MHM इंडिया समिट 2025 का आयोजन किया गया। इस आयोजन में सरकारी प्रतिनिधि, स्वास्थ्य विशेषज्ञ, अंतरराष्ट्रीय संस्थान, शिक्षाविद, कॉर्पोरेट लीडर और जमीनी स्तर पर काम करने वाले 280 से ज्यादा प्रतिनिधि शामिल हुए।
पीरियड हेल्थ को लेकर देश में बढ़ती जागरूकता
इस समिट की शुरुआत इस संदेश के साथ हुई कि माहवारी को लेकर बातचीत समाज में और ज्यादा खुलनी चाहिए। विशेषज्ञों ने बताया कि पीरियड सिर्फ एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक ऐसा मुद्दा है जो शिक्षा, स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और लड़कियों के भविष्य को प्रभावित करता है। इसी दिशा में कई संगठनों ने अपने अनुभव और शोध साझा किए, जिससे यह साफ दिखा कि देश में जागरूकता बढ़ रही है, लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।
देशभर में जागरूकता फैलाने वाली 5000 किलोमीटर की बाइक रैली
समिट में 'बर्ड्स ऑफ रोड्स' बाइक रैली का आगमन बेहद खास रहा। इस बाइक राइडिंग ग्रुप ने 15 नवंबर को त्रिची से दिल्ली तक करीब 5,000 किलोमीटर का सफर तय किया और 10 राज्यों में माहवारी स्वच्छता का संदेश फैलाया। इस यात्रा का उद्देश्य था -
- गांवों और कस्बों में पीरियड्स पर खुलकर बात करना
- मिथकों और शर्म को खत्म करना
- लड़कियों को सशक्त बनाना

भारत का पहला 'पीरियड-फ्रेंडली' और 'मेंस्ट्रुअल वेस्ट-फ्री' स्कूल
समिट की सबसे बड़ी उपलब्धि रही तमिलनाडु के पुदुक्कोट्टई जिले के अरिमलम गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल को देश के पहले मेंस्ट्रुअल वेस्ट-फ्री और पीरियड-फ्रेंडली स्कूल के रूप में घोषित करना। इस स्कूल इसलिए खास है क्योंकि -
- यहां सभी लड़कियां और महिला स्टाफ रीयूजेबल कपड़े के पैड का उपयोग करती हैं
- स्कूल में सुरक्षित और प्राइवेसी वाले टॉयलेट बनाए गए हैं
- सभी शिक्षकों को एमएचएम की विशेष ट्रेनिंग दी गई है
- इन्सीनरेटर और वेस्ट मैनेजमेंट की बेहतरीन व्यवस्था है
- नियमित आधार पर पीरियड हाइजीन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं
नीतियों, शिक्षा और स्वास्थ्य पर चर्चाएं
पूरे दिन चली विभिन्न सत्रों में नीति विशेषज्ञों, डॉक्टरों, एनजीओ और वैश्विक संस्थानों ने मासिक धर्म के अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा की, जैसे -
- स्कूलों में पीरियड-फ्रेंडली टॉयलेट और वॉश सुविधाएं
- किशोरियों के लिए आसान और सही जानकारी
- पर्यावरण के लिए सुरक्षित और किफायती उत्पाद
- मासिक धर्म से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं
- दिव्यांग और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की जरूरतें
- आपदा स्थितियों में स्वच्छता और उत्पादों की उपलब्धता
10 लाख बच्चों तक पहुंची स्वच्छता की सबसे बड़ी मुहिम
ग्रामालय और डिटॉल बनेगा स्वस्थ इंडिया कार्यक्रम ने मिलकर देश का सबसे बड़ा हैंड वॉशिंग जागरूकता अभियान चलाया। 181 दिनों में यह अभियान 10 लाख से ज्यादा छात्रों और 4,921 स्कूलों तक पहुंचा, जिसे इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने आधिकारिक पहचान दी। यह पहल इस बात को मजबूत करती है कि स्वच्छता की आदतें जैसे हाथ धोने से लेकर पीरियड केयर तक, एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं और मिलकर ही सुरक्षित स्वास्थ्य का आधार बनाती हैं। इस मौके पर प्रो। रवि भटनागर ने कहा, "हमारा लक्ष्य बच्चों में स्वास्थ्य, स्वच्छता और पोषण की आदतें मजबूत करना है ताकि आने वाली पीढ़ी एक स्वस्थ भारत बना सके।"
परिवर्तन लाने वाले चेंजमेकर को मिला सम्मान
कार्यक्रम के अंत में MHM अवॉर्ड्स 2025 के माध्यम से उन लोगों, संगठनों और प्रोजेक्ट्स को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया, जिन्होंने अपने क्षेत्र में माहवारी जागरूकता और स्वच्छता के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यह सम्मान सिर्फ व्यक्तियों का नहीं, बल्कि उस सोच का था जो समाज में बदलाव ला रही है।
पीरियड्स छिपाने की नहीं, समझने की बात है
कार्यक्रम के आखिरी सत्र में यह संदेश दिया गया कि माहवारी पर खुलकर बातचीत और बेहतर सुविधाएं किसी भी समाज को आगे ले जाती हैं। पीरियड को शर्म या चुप्पी नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, गरिमा और समानता का मुद्दा मानना होगा।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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