Latest Updates
-
World Mosquito Day 2026: मच्छरों के काटने से हो सकती हैं ये खतरनाक बीमारियां, बचाव के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय -
पुरूषों को स्पर्म काउंट बढ़ाने के लिए खानी चाहिए ये 7 चीजें, फर्टिलिटी में होगा सुधार -
घर में अचानक कॉकरोच निकलना शुभ या अशुभ? जानें ज्योतिष और वास्तु के संकेत -
40 की उम्र में भी नजर आएंगी 20 की, हेल्दी और ग्लोइंग स्किन के लिए डाइट में शामिल करें ये 7 फूड्स -
September Travel Destinations: सितंबर में घूमने के लिए बेस्ट हैं ये भारत की ये 7 खूबसूरत जगहें, मिलेगा यादगार -
World Photography Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व फोटोग्राफी दिवस? जानें इस दिन का इतिहास, महत्व और थीम -
5 साल से तालाब में रह रहे इकबाल की मदद के लिए आगे आए अनंत अंबानी, इलाज के लिए मुंबई एयरलिफ्ट कराया -
इन 5 लोगों को भूलकर भी नहीं करना चाहिए मशरूम का सेवन, सेहत को हो सकता है गंभीर नुकसान -
Special Marriage Act क्या है? सोनाक्षी-जहीर इकबाल समेत इन बॉलीवुड कपल्स ने बिना धर्म बदले की शादी -
किन्नौर कैलाश के दर्शन के बाद बदल गई हिमांशी खुराना की जिंदगी, एक्ट्रेस ने बताया क्यों इतनी खास है यह जगह
कुत्ते बता देंगे आंत के कैंसर के बारे में
अपनी सूंघने की क्षमता से कुत्ते आंत के कैंसर का पता लगा सकते हैंएक अध्ययन में पाया गया है कि अपनी सूंघने की क्षमता से कुत्ते आंत के कैंसर का पता लगा सकते हैं.जापान के वैज्ञानिकों ने पाया कि विशेष रूप से प्रशिक्षित लैबराडोर को स्वस्थ और आंत के कैंसर के पीड़ित व्यक्ति की सांस और मल को सुंघाया गया.
वैज्ञानिकों का कहना है कि कुत्ता 95 फ़ीसदी मामले में स्वस्थ और कैंसर पीड़ित व्यक्ति में भेद करने में सफल रहा.लेकिन ब्रिटेन के कैंसर शोध संस्थान का कहना है कि अभी इस दिशा में और कार्य किया जाना बाकी है.उनका कहना है कि ये पता लगाया जाना बाकी है कि कुत्ते किस रसायन से ये पता लगा पाए, साथ ही बड़ी संख्या में लोगों पर इसका अभी अध्ययन किया जाना है.
इसके पहले किए शोध से पता चला था कि प्रतिदिन एक एस्प्रिन आंत के कैंसर से बचाव कर सकती है.ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने मरीज़ों पर किए गए अध्ययन में पाया गया था कि एस्प्रिन से अनेक लोगों को मौत से बचाया जा सका.उल्लेखनीय है कि दिल की बीमारी सबंधी मामलों में पहले से ही बड़ी मात्रा में लोग एस्प्रिन का इस्तेमाल करते हैं.
हालांकि कई स्वस्थ लोग एस्प्रिन के दुष्प्रभाव की वजह से इसका इस्तेमाल करने से परहेज़ करते हैं.इन शोधों से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से पीड़ित लोगों के इलाज में काफ़ी मदद मिल सकती है.वैज्ञानिकों का मानना है कि अभी तक कैंसर को जितना जटिल समझा जा रहा था, ये उससे कहीं अधिक जटिल है.
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications