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स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालता है ये हुक्का
कभी बुजुर्गों की शान समझे जाने वाले इस हुक्के पर आजकल युवाओं का कब्जा दिखता नजर आ रहा है। पहले हुक्का केवल गांव के लोगो की ही शान माना जाता था लेकिन अब यह ट्रेंड शहरों तक आ पहुंचा है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि हुक्का जिसे शीशा भी कहा जाता है उसे पीने से स्वास्थ्य पर सिगरेट और बीड़ी के मुकाबले शरीर पर अधिक बुरा प्रभाव पड़ता है। जगह-जगह पर चल रहे हुक्का पार्लरों के बढ़ते चलन से हमारी युवा पीढ़ी की आदत बिगड़ रही है और वे तेजी से कैंसर के मुंह में जा रहे हैं। इनमें लड़के और लड़कियां दोनों ही शामिल हैं, जो 100 रुपए से लेकर 1000 रुपए तक में नशे की लत शांत करने हुक्का पालर्र आते हैं। आइये जानते हैं कि हुक्का किस प्रकार से हमारे स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालता है।

हुक्का का दुष्प्रभाव -
सिगरेट से भी ज्यादा घातक- एक छोटी सी सिगरेट को पीने में केवल 3-4 मिनट लगते हैं लेकिन हुक्का को आप कम से कम 30 मिनट तक पी सकते हैं। रिसर्च के मुताबिक अगर आप 45 मिनट तक हुक्का पीते हैं तो इसका यह मतलब की आप 45 सिगरेट अकेले पी जाते हैं। इसमें निकोटिन, टार और कॉर्बन मोनोऑक्साइ के हैवी एलीमेंट घुले होते हैं जो खतरनाक होते हैं।
तेज सिरदर्द होना - हुक्का पीना भले ही मजेदार काम लगता हो लेकिन जैसे ही आप उसे पी कर उठेगे तो अपका सिरदर्द होना शुरु हो जाएगा। इसमें मौजूद कार्बन मोनोऑक्साइड से सिरदर्द और चक्कर आने लगता है। इसके अलावा फ्लेवर हुक्का पीने से यह असर और भी ज्यादा होता है तथा यह दिमाग पर भी बुरा असर डालता है।
बुरी लत पड़ना - कई लोगों को लगता है कि हुक्का सिगरेट स्मोकिंग की तुलना में बेहतर है क्योंकि इसमें तम्बाकू को पानी के साथ मिलाया जाता है इसलिये इसका प्रभाव शरीर पर कम पड़ता है। लेकिन यह धारणा बिल्कुल गलत है क्योंकि इसमें भी सिगरेट की ही तरह निकोटीन मिला होता है। जब आप निकोटीन को बहुत देर तक के लिये खींचते हैं तो आप उसके आदि हो जाते हैं और जब आप हुक्का का सेवन नहीं भी कर रहे होंगे तब भी आपको सिरदर्द, घबराहट, चक्कर और अवसाद का भयंकर सामना करना पड़ेगा। यह सब लक्षण दिखाते हैं कि आप हुक्के के आदि हो चुके हैं।
कैंसर का खतरा - हुक्का पीते समय जब आप मेटल की पाइप से धूंआ खीचते हैं, तब आपके अंदर भारी मात्रा में धातु यानी की कार्बन मोनोऑक्साइड, तार, आयरन और अन्य प्रकार के विषाक्त धातु जाते हैं। इससे कार्डियोवास्कुलर डिस्फंक्शन के साथ हाई बीपी और लंग कैंसर का खतरा 30 फीसद तक बढ़ जाता है। सिर्फ यही नहीं बल्कि इससे लंग, थ्रोट, मुंह और लिप कैंसर भी होने की संभावना ज्यादा होती है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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