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हानिकारक होती हैं नींद की गोलियां

ऑस्ट्रेलिया के फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान विभाग से सम्बद्ध प्रोफेसर लियोन लैक का कहना है कि ज्यादातर लोग जो नींद की गोलियां लेते हैं उन्हें फिर भी अच्छी नींद नहीं आती। इससे कुछ समय के लिए तो आराम मिलता है लेकिन इसकी परिणति लोगों की इन पर निर्भरता बढ़ने में होती है।
उन्होंने कहा कि नींद की गोलियां थोड़े समय के लिए आराम पहुंचाती हैं लेकिन जब लोग इसे लेना बंद कर देते हैं, उन्हें अपनी रातें तकलीफ में बितानी पड़ती हैं और उन्हें लगता है कि बिना दवाई के उन्हें नींद नहीं आएगी।
उनका कहना है कि यह क्रेडिट कार्ड पर कुछ नींद खरीदने जैसा है, जिसकी कीमत मोटे ब्याज के रूप में चुकानी पड़ती है। ऐसे में भविष्य में यह आपके लिए मददगार नहीं होतीं।
उन्होंने कहा कि लेकिन लोगों को यह समझने की जरूरत हैं कि नींद एक लम्बी अवचेतन अवस्था नहीं है। हम नींद के अलग-अलग चरण से गुजरते हैं। पहला गहरी नींद का चरण जो 80 से 90 मिनट के बाद हल्की नींद में, स्वप्न देखने वाले चरण में तब्दील होता है और हम रातभर तीन या चार चरणों से गुजरते हैं।
लैक अनियनित जीवनशैली को अनिद्रा की वजह मानते हैं उनका कहना है कि लेटने के बाद अगर 15 मिनट तक नींद न आए तो उठ जाना चाहिए वर्ना कमरा अवसाद से भर जाता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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