Latest Updates
-
Bada Mangal 2026: ज्येष्ठ माह का आखिरी बड़ा मंगल आज, इन उपायों को करने से मिलेगी हनुमान जी की विशेष कृपा -
Happy Mahesh Navami 2026 Wishes: महेश जिनका नाम है...महेश नवमी पर प्रियजनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
Aaj Ka Rashifal 23 June 2026: मंगलवार को इन 4 राशियों पर बरसेगी बजरंगबली की कृपा, जानें अपना भाग्य -
शाम 7 बजे के बाद गलती से भी मत करना ये 5 काम, बढ़ता है हार्ट अटैक का रिस्क -
बिना मारे चूहों को घर से भगाने का देसी तरीका! आटे में मिलाकर रख दें ये एक चीज, फिर कभी नहीं आएंगे नजर -
Pahadi Crispy Snack Singal Recipe: घर पर बनाएं उत्तराखंड का पारंपरिक और कुरकुरा स्वाद -
कौन हैं पंकज त्रिपाठी के भाई बिजेंद्र नाथ तिवारी? आखिर क्यों हुआ जानलेवा हमला, गंभीर हालत में AIIMS में भर्ती -
Swapna Shastra: सपने में किन्नर को देखना होता है शुभ और अशुभ संकेत? जानिए इसका मतलब -
Cooling Summer Lunch Curd Rice Recipe: गर्मियों में पेट को ठंडक देने वाली सबसे आसान रेसिपी -
काले धब्बों वाले प्याज खाना चाहिए या नहीं? सेहत पर क्या होगा असर, यहां जानें इसका सही जवाब
रक्त परिसंचरण कैसे सुधारें
परिसंचरण तन्त्र सबसे महत्वपूर्ण अंग तन्त्रों में से एक है। परिसंचरण तन्त्र में किसी प्रकार की खराबी से विभिन्न प्रकार के रोग हो जाते हैं। परिसंचरण तन्त्र की अव्यवस्था से हृदयरोग और आघात जैसे विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ हो जाता हैं। जब हमें सिरदर्द, हाथों और पैरों का अचानक ठंडा होना, थकावट महसूस होना, जकड़न महसूस होना, थकावट महसूस होना, कानों में सनसनाहट, घावों का न भरना, समृति क्षय जैसे हल्के-फुल्के लक्षण दिखने लगें तो हमें भाँप लेना चाहिये।
यदि लक्षणों पर ध्यान न दिया गया तो प्रभाव और भी घातक और खतरनाक हो सकते हैं जिनमें उच्चरक्तचाप, आघात, वृक्कों की विफलता, मधुमेह की जटिलता, नपुंसकता, हृदयाघात और मृत्यु भी हो सकती है। शरीर में रक्त परिसंचरण बराबर बनाये रखने के लिये स्वस्थ जीवनशैली आवश्यक है। वसा और कोलेस्ट्राल का कम प्रयोग, रेशेदार भोजन का उपयोग, नियमित व्यायाम, कम तनाव और प्राकृतिक सम्पूरक द्वारा रक्त परिसंचरण को सुधारा जा सकता है।

गर्म और ठंडे पानी से नहाएं
गर्म और ठंडे पानी से नहाने से रक्त परिसंचरण को सुधारा जा सकता है। जब गर्म पानी के फव्वारे के नीचे प्रभावित अंग आता है तो रक्त त्वचा की तरफ प्रवाहित होकर उसे पोषित करता है। अचानक ठंडे पानी से नहाने से रक्त अन्तरिक अंगों की तरफ प्रवाहित होता है। शरीर में कंपकपी होने से त्वचा की तरफ रक्त प्रवाहित होकर उसे ऑक्सीजन युक्त करता है। बेहतर परिणाम के लिये गर्म और ठंडे उपचार को नियमित लेना चाहिये। ध्यान रहे कि पानी उबलता हुआ न हो अन्यथा त्वाचा जल जायेगी

लालमिर्च जड़ी-बूटी
लालमिर्च हृदय को उत्तेजित करता है, रक्त परिसंचरण को नियन्त्रित करता है और धमनी और केशिकाओं को मजबूती प्रदान करता है। इस जड़ी-बूटी के उपयोग से न केवल रक्त परिसंचरण में सुधार, हृदय को मजबूती और धमनियाँ साफ हो जाती हैं बल्कि वजन को कम करने में भी सहायक है। ऐसा इसलिये होता है क्योंकि लालमिर्च का टिंक्चर किसी व्यक्ति की उपापचय दर को 25 प्रतिशत तक बढ़ा देता है।

श्वसन
हममें से ज्यादातर लोगों में श्वसन की खराब आदतें पड़ जाती हैं जिनमें फेफड़े के न्यूनतम हिस्से का प्रयोग होता है। रक्त परिसंचरण में सुधार के लिये यह आवश्यक हो जाता है कि हम गहरी साँस वाली तकनीक का प्रयोग करें जिसमें फेफड़ों का अधिकतम उपयोग हो सके। इससे न केवल रक्त में और ऑक्सीजन आयेगी बल्कि अपशिष्ट पदार्थों को हटाने में और रक्त परिसंचरण को सुधारने में सहायक होगा।

तनाव कम करें
तनाव खराब रक्त परिसंचरण का एक प्रमुख कारण है। ऐसा इसलिये होता है क्योंकि तनावयुक्त होने पर परिसंचरण बाहरी अंगों को छोड़कर प्रमुख अंगों तक सीमित रह जाता है। हाँथ और पैर सबसे प्रभावित क्षेत्र होते हैं। इसलिये बेहतर परिसंचरण को जारी रखने के लिये आवश्यक है कि हम तनावमुक्त रहें। गहरी साँसें लेने और योग द्वारा रक्त परिसंचरण को सुधारा जा सकता है।

पैरों को उठाना
पलंग पर लेटकर थोड़े समय के लिये अपने पैरों को उठाकर उसके नीचे तकिया रखने से रक्त परिसंचरण को सुधारा जा सकता है। इससे पैरों में रक्त चलायमान हो जाता है। इस प्रक्रिया के लिये आप को जमीन पर लेटकर
पैरों को कुर्सी या सोफा पर रखना होगा। इससे रक्त पैरों से मुख्य शरीर की तरफ प्रवाहित होगा।

व्यायाम करना
शारीरिक श्रम द्वारा रक्त परिसंचरण को सुधारा जा सकता है। आजकल ज्यादातर लोगों की जीवनशैली बिना किसी शारीरिक श्रम के स्थिर हो गई है। नियमित व्यायाम, टहलने, तैरने और दौड़ने से आपके सारे शरीर में रक्त का बेहतर संचार होगा। हलाँकि इस बात का ध्यान रखें कि धीरे-धीरे टहलना प्रारम्भ करके समय के साथ रफ्तार बढ़ायें।

उचित पोषण
रक्त परिसंचरण के सुधार में पोषण की निर्णायक भूमिका है। जब स्वस्थ पोषण युक्त एवं कम वसा युक्त भोजन ग्रहण किया जायेगा और रक्त परिसंचरण सुधरेगा। कम वसा से रक्त कम गाढ़ा होता है इससे रक्त पतली से पतली वाहिकाओं में प्रवेश कर जाता है। रेशेयुक्त भोजन से शरीर में वसा कम हो जाता है इससे परिसंचरण में सुधार होता है।



Click it and Unblock the Notifications