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साइलेंट किलर है गुर्दे का कैंसर
क्या आप के मूत्र के साथ खून भी निकल रहा है? क्या मूत्र का रंग रतुआ या गाढ़ा लाल है? यदि आप के पेट में दोनों तरफ लगातार टीस के साथ दर्द हो रहा है, तो आपको बिना देरी किये अपने डॉक्टर से मिलना चाहिए क्योंकि यह आपके शरीर में छिपा हुआ कैंसर हो सकता है, जो कि खतरनाक ढंग से आपके गुर्दों को अपनी चपेट में ले रहा हो। हल्का बुखार, लगातार वज़न कम होना, लगातार थकान महसूस होना और मितली आना, ये सारे लक्षण बताते हैं कि आपके गुर्दे के साथ सब कुछ ठीक नहीं है।
ऊपर बताये गए लक्षणों और पेट के दोनों तरफ गाँठ की उपस्थिति यह बताने के लिए पर्याप्त है कि आपके गुर्दे में कार्सिनजेनिक कोशिकाएं विकसित हो रही हैं, जो कि आपके स्वास्थ्य और जीवन के लिए खतरा हैं।
आज 14 मार्च को विश्व गुर्दा दिवस है, यह एक अवसर है कि जब प्रकृति द्वारा गुर्दे के रूप में दिए गए अनमोल उपहार को बचाया जाए और सुनिश्चित किया जाए कि यह स्वस्थ रहे और सुचारू रूप से काम करता रहे। यह एक जागरूकता अभियान है जिसमें स्वस्थ और सुचारू रूप से काम करने वाले गुर्दों की महत्व को समझाया जाए ताकि विश्व स्तर पर गुर्दे की व्याधियों, उससे सम्बंधित बीमारियों और उनके दुष्प्रभाव को कम किया जा सके। इस अवसर पर आरजी स्टोन एंड लैप्रोस्कोपी हॉस्पिटल भी पूरे भारत में अपनी शाखाओं पर चेक-अप कैंप का आयोजन कर रहा है।

आपके गुर्दे बीन के आकर में आपके पेट के दायें और बायें भाग में पीछे की तरफ स्थित होता है । यह शरीर में प्राकृतिक छलनी की तरह काम करता है। यह रक्त को साफ रखने के लिए उसे छानता है और शरीर से अतिरिक्त पानी और लवणों को बाहर निकालता है। यह शरीर में रक्त साफ करने के साथ साथ शरीर में तरल पदार्थो को संतुलित रखने के लिए शरीर में पानी की मात्रा को भी संतुलित करता है। ये रेनिन नामक हार्मोन भी बनाते हैं जो कि ब्लेड प्रेशर और एरिथ्रोपोएटिन नामक हार्मोन को भी संतुलित रखते हुए रेड ब्लड सेल्स लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को भी संतुलित करता है।
हाल के दिनों में यह देखने को मिला है की गुर्दे का फेल होना या उसमे व्याधि उत्पन्न होना एक आम समस्या बन गयी है। तनाव भरी जिंदगी और अनियमित दिनचर्या ने इस समस्या को और भी विकत बना दिया है। गुर्दे का फेल होना और काम करना बंद कर देना अचानक होता है, जिससे इस बीमारी को ठीक करने का शायद ही मौका मिलता है। गुर्दे के कैंसर के लक्षण पूरी तरह से कैंसर होना सुनिश्चित नहीं करते क्योंकि यह लक्षण शरीर में उत्पन्न हुयी किसी अन्य बीमारी के भी लक्षण हो सकते हैं। वास्तव में हो सकता है कि आप तब तक अपने आपको स्वस्थ महसूस करें जब तक कि आपके गुर्दे आपकी असावधानी के चलते पूरी तरह से काम करना बंद कर दें।
यह बीमारी डॉक्टरों के लिए अभी भी अबूझ पहेली बनी हुयी है। गुर्दे का फेल होना कई कारणों से हो सकता है और आपका जीवन खतरे में पड़ सकता है, इसके लिए किसी एक निश्चित कारण को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता लेकिन गुर्दे का कैंसर, गुर्दे के फेल होने का एक निश्चित कारण है।
आरजी स्टोन एंड लैप्रोस्कोपी हॉस्पिटल के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. भीम सेन बंसल के अनुसार प्रायः गुर्दे का कैंसर 40 वर्ष से अधिक आयुवर्ग के लोगों को प्रभावित करता है। यह एक ऐसा कैंसर है जो गुर्दे की कोशिकाओं में शुरू होता है। आम तौर पर गुर्दे में दो तरह के कैंसर पाए जाते हैं, एक आरसीसी या रीनल सेल कार्सिनोमा और वृक्कीय पेडू में यूसीसी या यूरोथेलियल सेल कार्सिनोमा।
डॉ. बंसल ने आगे बताया की यह नाम इशारा करते हैं की किन कोशिकाओं में कैंसर विकसित हो रहा है। यह दोनों ही कैंसर अलग अलग तरीके से विकसित होते हैं। इन दोनों का निदान भी अलग तरीके से होता है और इनके इलाज की पद्धति भी अलग है। जहाँ गुर्दे के कैंसर के मामलों में आरसीसी 80 प्रतिशत तक जिम्मेदार है, वहीँ यूसीसी शेष 20 प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेदार है। पर ऊपर बताये गए लक्षणों का मतलब हमेशा कैंसर नहीं होता, कोई भी सिस्ट, इन्फेक्शन या कोई अन्य समस्या इन लक्षणों के समान हो सकती है। इन लक्षणों के पाए जाने पर किसी भी व्यक्ति को तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए ताकि जल्दी से जल्दी इसका निदान और इलाज संभव हो सके।
लेखक परिचय- डा. भीम सेन बंसल, आरजी स्टोन यूरोलॉजी एंड लैपरोस्कोपी हॉस्पिटल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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