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वॉटर थेरेपी ट्रीटमेंट और उसके लाभ
बिस्तर से उठने के बाद सुबह - सुबह आप लगभग 1.5 लीटर पानी पिएं, जो कि लगभग 5 से 6 गिलास होता है। इस पानी को खाली पेट पीना होता है। इसके बाद आप अपना चेहरा धोएं। यह प्रक्रिया वॉटर थेरेपी ट्रीटमेंट कहलाती है। इस ट्रीटमेंट को करने से पहले आप समझ लें कि पानी पीने से एक घंटे पहले और पानी पीने के एक घंटे के बाद तक कुछ भी न खाएं और पीएं, ठोस आहार भूल से भी न खाएं। अगर आप वाकई में कायदे से इस ट्रीटमेंट को करना चाहते हैं तो रात को सोते समय एल्कोहल पीना छोड़ दें।
अगर जरूरी हो तो पानी को फिल्टर करके और हल्का गुनगुना पिएं, वॉटर थेरेपी के लिए ऐसा पानी की सबसे अच्छा होता है। शुरूआत में 1.5 लीटर पानी पीने में तकलीफ हो सकती है लेकिन हर दिन पानी पीने से आपकी आदत पड़ जाएगी। इसके लिए शुरूआत में ज्यादा से ज्यादा पानी पीने की कोशिश करें, लगभग 4 गिलास पानी कम से कम पी जाएं। कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम करने के लिए 14 तरीके
एकदम से पानी न पिएं, पहले दो गिलास पिएं, इसके बाद दो मिनट का रेस्ट लें और फिर दो गिलास पिएं। जब आप शुरूआत में पानी पीना शुरू करेंगे तो शायद आपको एक घंटे में दो से तीन बार पेशाब के लिए जाना पड़ें, लेकिन कुछ समय आपकी आदत में इतना सारा पानी पीना शामिल हो जाएगा। जवान महिलाएं जरूर करवाएं ये बेसिक टेस्ट

तनाव करे दूर
वॉटर थेरेपी से तनाव में राहत मिलती है।

ताजगी महसूस होगी
अगर आप वॉटर थेरेपी की लगातार प्रैक्टिस करते रहेगें, तो दिन भर आपको ताजगी महसूस होती रहेगी और पूरा दिन आप ताजातरीन महसूस करते रहेगें।

मोटापा घटाए
वॉटर थेरेपी, वजन को घटाने में भी लाभकारी होती है।

शरीर से विषैले पदार्थ दूर हो
इस थेरेपी से पसीने व मूत्र की सहायता से शरीर के विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं।

त्वचा चमकाए
इसकी सहायता से आपके शरीर की त्वचा दमकदार हो जाती है।

शरीर का तापमान सामान्य रखे
वॉटर थेरेपी, शरीर का तापमान सामान्य रखती है।

कॉन्स्टीपेशन, एसीडिटी, डायबटीज और कैंसर दूर हो
अगर वॉटर थेरेपी को प्रतिदिन कायदे से किया जाएं, तो इससे 1 दिन में कॉन्स्टीपेशन, 2 दिन में एसीडिटी, 7 दिन में डायबटीज, 4 हफ्ते में कैंसर, 3 महीने में पल्मोनरी टीबी, 10 दिनों में गैस्ट्रिक और 4 हफ्तों में बीपी और हाइपरटेंशन दूर हो जाती है।

सिर दर्द, शरीर में दर्द, गठिया दूर करे
वॉटर थेरेपी से सिर दर्द, शरीर में दर्द, गठिया, दिल की धड़कन तेज बढ़ना, मिरगी, ब्रोंकाइटिस, मोटापा, दमा, टीबी, मेनिनजाइटिस, गुर्दे और मूत्र रोग, उल्टी, जठरशोथ, दस्त, बवासीर, डायबटीज, सभी नेत्र रोगों, मासिक धर्म संबधी विकार, कान, नाक और गले के रोगों का उपचार संभव है।

हृदय प्रणाली को नियंत्रित करता है
वॉटर थेरेपी, हृदय प्रणाली को नियंत्रित करने में भी सहायता प्रदान करता है।



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