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स्वाइन फ्लू में एंटी-वायरल दवा की जरूरत किसको?
(आईएएनएस)| स्वाइन फ्लू के मामले देश में तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में यह स्थिति आ सकती है, जिसमें डॉक्टर स्वाइन फ्लू के हर संदिग्ध मरीज को एंटी-वायरल दवाएं दे सकते हैं। मगर, हर मरीज को एंटीवायरल दवाओं की जरूरत नहीं होती, ऐसे में डॉक्टर के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि किस मरीज को एंटीवायरल दवा की जरूरत है और किस मरीज को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत है।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन डॉक्टरों का कहना है कि अगर एंटीवायरल दवा की जरूरत है, तो इसे मरीज को जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी दिया जाना चाहिए। अगर मरीज को लक्षण सामने आने के 48 घंटे के भीतर एंटी-वायरल दवाएं न दी जाएं तो इसका पूरा लाभ नहीं मिल पाता है।

इससे डॉक्टरों को ऐसे मरीजों की पहचान करने में सहायता मिलेगी, जिन्हें एंटी-वायरल दवा लेने या अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत है।
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एंटी-वायरल थेरेपी की जल्द शुरुआत स्वाइन फ्लू के ऐसे संदिग्ध मरीजों में करने की सलाह दी जाती है, जिनमें निम्नलिखित लक्षण हों :
* अस्पताल में भर्ती करने की स्थिति वाला फ्लू हो
* बढ़ता हुआ, गंभीर अथवा जटिल फ्लू
* ऐसे मरीज जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो (किसी बीमारी, हेमैटोपेटिक अथवा सॉलिड ऑर्गन टृांसप्लांट का मरीज हो)।
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जिनमें जटिलता का खतरा अधिक होता है :
-पांच साल से कम उम्र के बच्चे, खासतौर से दो साल से कम उम्र वाले, 65 साल या इससे अधिक उम्र के बुजुर्ग, गर्भवती महिला या जच्चा को मातृत्व के बाद दो हफ्तों तक।
-ऐसे लोग जो पुरानी मेडिकल समस्याओं से पीड़ित हों जैसे कि फेफड़े की बीमारी जिसमें अस्थमा भी शामिल है, खासतौर से जिसने पिछले एक साल में स्टेरॉइड लिया हो; किडनी की पुरानी बीमारी हो, लिवर की बीमारी हो, हाइपरटेंशन हो, डायबीटीज हो, सिकल सेल डिजीज हो, अन्य पुरानी बीमारियां एवं गंभीर मोटापा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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