Latest Updates
-
गलती से भी पास-पास न रखें मनी प्लांट और तुलसी का पौधा, वरना कंगाली के साथ आ जाएंगी ये 3 बड़ी मुसीबतें -
इस एक श्राप की वजह से अविवाहित कपल्स नहीं कर सकते जगन्नाथ मंदिर में दर्शन, आप भी जान लें रहस्य -
Varalakshmi Vrat के दिन लगेगा साल का आखिरी चंद्र ग्रहण, जानें क्या करें, क्या न करें और सूतक के नियम -
क्या 1876 जैसी तबाही फिर होगी? 150 साल बाद लौट सकता है विनाशकारी अल नीनो! सूखा और अकाल का खतरा -
बरसात में भूलकर भी न खाएं ये 10 सब्जियां, वरना शरीर बन सकता है बीमारियों का घर -
अनचाहे गर्भ से बचने के लिए कौन-सा तरीका है सबसे सुरक्षित? एक्सपर्ट से जानें पूरी जानकारी -
World Population Day 2026 Quotes: 'आबादी पर लगाम, तरक्की को सलाम', इन कोट्स व स्लोगन से फैलाएं जागरूकता -
अमिताभ बच्चन बने पॉलिसीबाजार के ब्रांड एंबेसडर, शुरू हुआ भारत का सबसे बड़ा इंश्योरेंस जागरुकता अभियान -
बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं मिलेंगी ये दवाएं, अल्कोहल की मात्रा को लेकर सरकार ने लागू किया कड़ा नियम -
World Population Day 2026: 11 जुलाई को ही क्यों मनाया जाता है जनसंख्या दिवस? जानिए इतिहास-महत्व और थीम
बीमारी नहीं विकार है OCD
ओसीडी को मजबूरी या ऑब्सेशन के रूप में परिभाषित किया जा सकता है क्योंकि कई लोग जब इससे ग्रसित होते हैं तो उनकी स्थिति को दूसरा व्यक्ति आसानी से समझने का प्रयास करता है।
KEEP YOUR LITTLE ONES AMUSED! Musical Toys now at 40% Cashback
ओसीडी से ग्रसित लोग, उनके जुनूनी आवेगों, विचारों और आग्रहों की अनदेखी करते रहते हैं और खुद को ही सही मानते हैं।
उन्हें अंदरूनी भय होता है और वो उससे अकेले ही फाइट करने में जुटे रहते हैं। साधारण शब्दों में कहा जाएं, तो ओसीडी से ग्रसित लोग, साधारण बातों में भी बखेड़ा कर देते हैं और अपनी ही सोच को थोपने का प्रयास करते हैं।

सामान्य तौर पर, ओसीडी से ग्रसित लोग खुद को हर समय अकेला महसूस करते हैं, उन्हें लगता है कि वो असहाय हैं और किसी को भी उनकी परवाह नहीं है। ये व्यवहार उनके मन में दिन में कई बार आ सकता है या वो कुछ-कुछ समय पर इसके शिकार हो जाते हैं। ओसीडी से पीडि़त लोग, अपने मन में सबसे ज्यादा मनगंढत कहानियों को बनाते हैं, वो अलग ही पिक्चर को क्रिएट करते रहते हैं।
इस प्रकार के रोगियों के तर्क बेहद बेकार और बिना सिर पैर के होते हैं। लेकिन वे दूसरों का जीवन, अपने व्यवहार से खराब कर देते हैं।
ओसीडी से बच्चे भी प्रभावित हो सकते हैं। टीनएज की लड़कियां या लड़के, अक्सर स्कूली दिनों में इससे ग्रसित हो जाते हैं। ऐसे में बच्चे के माता-पिता को खास ध्यान रखना चाहिए।
पिछले दशक में क्लीनिकल अध्ययन में यह स्पष्ट हो चुका है कि यह मानसिक विकार, दवाईयां और थेरेपी के माध्यम से सही किया जा सकता है। इसके उपचार में कुछ दवाईयों को नियमित रूप से निश्चित समय तक दिया जाता है ताकि व्यक्ति खुद को बैलेंस कर सके और अपने मूड स्वींग पर काबू पा सकें।
थेरेपी से उसे सही और गलत के बारे में बताया जाता है। यह कोई शर्मनाक बीमारी नहीं है, जो कि लाइलाज हो। यह एक प्रकार का विकार है, जिसे आसानी से ठीक किया जा सकता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications