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जानिए क्या है हाइपरटेंशन और ये किस तरह ले सकती है आपकी जान
आज के समय में लाइफस्टाइल से जुड़े रोगों में हाइपरटेंशन सबसे सामान्य समस्या बनकर सामने आ रही है। यहां तक की बच्चे भी इस बीमारी से ग्रस्त हो रहे हैं। विशेषज्ञों की मानें तो बच्चे भी हाई ब्लड प्रेशर के मरीज़ बन सकते हैं।
सच तो ये है कि 90 प्रतिशत मरीज़ों को हाइपरटेंशन के कारणों के बारे में पता ही नहीं होता है और इस वजह से वो इससे बचाव करने में असमर्थ रहते हैं। वर्तमान समय में कई लोगों को पता ही नहीं होता कि वो हाइपरटेंशन की गिरफ्त में आ चुके हैं।

क्या है चिंता का कारण
आने वाले समय में हाइपरटेंशन के मरीज़ों में भारी बढ़ोत्तरी होगी। साल 2020 तक कुल जनसंख्या की एक तिहाई आबादी हाइपरटेंशन से ग्रस्त होगी। 1980 से ये बीमारी बड़ी तेज़ी से बढ़ रही है। वर्तमान समय में हाइपरटेंशन के मामलों में भारत के शहरी इलाकों में 20 से 40 प्रतिशत और गांवों में 12 से 17 प्रतिशत का इज़ाफ़ा हुआ है।
आंकड़े क्या कहते हैं
तीन में से एक भारतीय व्यक्ति हाई ब्लडप्रेशर की समस्या से ग्रस्त है। बच्चों से लेकर वयस्कों में हाइपरटेंशन की समस्या बढ़ती जा रही है। वर्ल्ड हेल्थ स्टैटिस्टिक की 2012 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में वैश्विक स्तर के मुकाबले हाइपरटेंशन के मरीज़ कम हैं। 25 साल से अधिक उम्र के पुरुष 23.10 प्रतिशत और 22.60 प्रतिशत महिलाएं हाइपरटेंशन से ग्रस्त हैं।
हालांकि, एक बड़ी जनसंख्या इस बीमारी से पीड़ित है। इस मामले में सबसे बड़ी चुनौती यही है कि लोगों को हाइपरटेंशन के बारे में पता ही नहीं होता है।
क्या है हाइपरटेंशन
हाइपरटेंशन में ब्लड प्रेशर 140 के पार पहुंच जाता है। शरीर के माध्यम से धमनियों की दीवारों से रक्त जो फैलता है उसे रक्तचाप कहा जाता है। आमतौर पर दिनभर में ब्लडप्रेशर कई बार बढ़ता और घटता है लेकिन अगर ये लंबे समय तक ज़्यादा बना रहे तो इससे सेहत को कई नुकसान हो सकते हैं। हाई बीपी की वजह से ह्रदय रोग और स्ट्रोक का खतरा रहता है जो कि भारत में मृत्यु का सबसे बड़ा कारण है।
जानलेवा बीमारी है
हाई ब्लड प्रेशर और हाइपरटेंशन हर साल 1.5 मिलियन लोगों की जान लेती है।
क्या हैं कारण
देर से भोजन करना, स्मार्टफोन पर लंबे समय तक रहना और शारीरिक व्यायाम ना करना जैसी आधुनिक जीवनशैली की आदतों की वजह से हाइपरटेंशन की समस्या होने लगती है। कुछ कारण ऐसे भी होते हैं जिनके लिए आप जिम्मेदार नहीं होते जैसे उम्र, लिंग, जीवनशैली आदि। ये उच्च रक्तचाप का कारण बनते हैं।
हाइपरटेंशन का कारण
90 प्रतिशत मरीज़ों को पता ही नहीं चला कि वे हाई ब्लड प्रेशर की बीमारी से कैसे ग्रस्त हो गए। उच्च रक्तचाप का सामान्य कारण एथेरोसेलेरोसिस है। एथेरोसेलेरोसिस के कई कारण जिम्मेदार हैं जो हाइपरटेंशन पैदा करते हैं जिनमें स्ट्रेस, आधुनिक जीवनशैली, गलत खानपान और शारीरिक व्यायाम की कमी आदि शामिल है।
इनमें से कुछ लोगों को हाई ब्लड प्रेशर के साथ सेकेंडरी हाइपरटेंशन की बीमारी थी जिसमें उच्च रक्तचाप खुद किडनी रोग, थायराएड रोग, पिट्यूट्री ग्लैंड, प्रेग्नेंसी, ओबेसिटी और अनिद्रा या किसी दवा के हानिकारक प्रभाव के कारण पैदा होता है।
हाइपरटेंशन से बचाव
लोगों को क्रियाशील जीवनैशली अपनानी चाहिए जिससे वज़न कम या संतुलित रहे। यहां तक कि आप थोड़ा सा वज़न घटाकर भी हाई ब्लडप्रेशर की समस्या से बच सकते हैं। नियमित शारीरिक व्यायाम भी जरूरी है। जो लोग रोज़ाना शारीरिक व्यायाम करते हैं उनमें रक्तचाप की समस्या का खतरा आधुनिक जीवनशैली जीने वाले लोगों की तुलना में कम रहता है। हाइपरटेंशन के खतरे को कम करने के लिए आप कुछ डाइट टिप्स भी अपना सकते हैं जिनकी मदद से आपका वज़न भी संतुलित रहेगा। लेकिन धूम्रपान से दूर रहें और शारीरिक व्यायाम ज़रूर करें।
आज के समय में हर किसी पर अपना टारगेट पूरा करने का बोझ है और इस वजह से वो गलत जीवनशैली जीने पर मजबूर होते जा रहे हैं। इस वजह से हाइपरटेंशन का खतरा बढ़ रहा है।
हाई ब्लड प्रेशर के अनियंत्रित होने पर सामने आती हैं ये समस्याएं:
ह्रदयाघात और स्ट्रोक
उच्च रक्तचाप की वजह से धमनियां सख्त और पतली हो जाती हैं जिसकी वजह से ह्रदयाघात, स्ट्रोक और अन्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
एनेउरिज्म (Aneurysm)
रक्तचाप बढ़ने पर रक्त कोशिकाएं कमजोर पड़ने लगती हैं और ये एनेउरिजम का रूप ले लेती हैं। इस वजह से जान तक को खतरा हो सकता है।

हार्ट फेल
वाहिकाओं में रक्त का ज़्यादा दबाव बनने पर ह्रदय की मांसपेशियां भारी होने लगती हैं। ऐसे में शरीर की ज़रूरत के अनुसार रक्तप्रवाह नहीं हो पाता है जिस वजह से हार्ट फेल हो सकता है।
अंगों का काम ना कर पाना
किडनी में रक्त वाहिकाओं के कमजोर होने या सिकुड़ जाने की वजह से शरीर के कई अंग अपना काम करना बंद कर देते हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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