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पेट की चर्बी से बढ़ सकता है कैंसर होने का खतरा, जानिए कैसे
वसायुक्त ऊतक, जिसे आमतौर पर फैट कहा जाता है, यह एडीपोसाइट्स जैसी विभिन्न कोशिकाओं से बना एक ढीला संयोजी ऊतक है। ये वसा शरीर के पांच अलग-अलग हिस्सों में जमा होती है।
1. त्वचीय वसा - त्वचा के नीचे मौजूद है।
2. आंतों की वसा - आंतरिक अंगों के आसपास मौजूद है।
3. मज्जा वसा - अस्थि मज्जा में मौजूद है।
4. मांसपेशी वसा - इंट्रामस्क्यूलर वसा।
शरीर में फैट हार्मोनली निष्क्रिय है और यह हानिकारक भी नहीं है। यह हमारे शरीर में लिपिड के रूप में ऊर्जा भंडार करता है, हमारे शरीर को एक साथ कुशनिंग और इंसुलेट करता है। जिन पुरुष और महिलाओं में बैली फैट होता है, वे हमेशा अपने लुक्स को लेकर निराश रहते हैं। लेकिन इस प्रकार के फैट का प्रभाव बहुत गहरा होता है।
बैली फैट दो प्रकार का होता है- उपकरणीय वसा या आंतों की वसा, जिसमें बाद वाला ज्यादा खतरनाक है। बाहरी फैट को देखना और पकड़ना बहुत आसान है, लेकिन आंतों की वसा को देख पाना मुश्किल है। आंतों की वसा को " सक्रिय रोगजनक वसा" कहा जाता है क्योंकि यह पेट में सभी प्रमुख अंगों के आसपास मौजूद होता है, जैसे दिल, यकृत, फेफड़ों और पेट, इससे अधिक इन अंगों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करता है।

पेट की चर्बी अधिक होने पर कई घातक परिणाम हो सकते हैं। यहां उनमें से कुछ दिये गए हैं।
1. लीवर में सूजन
2. टाइप 2 मधुमेह
3. कार्डियोवैस्कुलर रोग और स्ट्रोक
4. रक्तचाप
5. अवसाद
6. अनिद्रा और अन्य नींद विकार
7. डिमेंशिया और अल्जाइमर
8. कैंसर
1. सूजन पैदा करना
आंतों की वसा को लीवर में सूजन पैदा करने के लिये देखा जाता है। यह शरीर में अधिक सूजन और हार्मोन-बाधित प्रतिक्रियाओं का कारण बनता है। और सूजन शरीर में किसी भी बीमारी का मूल कारण है।
तो यदि आपके पेट के चारों ओर बहुत अधिक वसा है, तो आप अधिक सूजन और हार्मोनली बाधित शरीर से अधिक पीड़ित है। जहां आपका मेटाबॉलिज्म मुख्य रूप से प्रभावित होता है।
2.टाइप 2 डायबिटीज
थाई फैट या हिप फैट की तुलना में, अधिक टमी फैट वाले लोगों में टाइप 2 मधुमेह का खतरा ज्यादा देखा गया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि आंतों की वसा इंसुलिन प्रतिरोध में एक प्रमुख भूमिका निभाता है। जब हम अधिक मीठा खाने लगते हैं, तो रक्त प्रवाह में चीनी और इंसुलिन का स्तर बढ़ जाता है, जो हमारे शरीर की कोशिकाओं को ऊर्जा पैदा करने के लिये शर्करा और इंसुलिन लेने के लिये मजबूर करता है। समय के साथ-साथ, आपके शरीर की कोशिकाओं में यह शर्करा और इंसुलिन को रोकना बंद कर देता है, जिससे रक्त शर्करा और इंसुलिन प्रतिरोध में वृद्धि होती है।
3. कार्डियोवैस्कुलर रोग और स्ट्रोक
शोध से पता चला कि आंतों की वसा कुछ आणविक प्रोटीन पैदा करती है जो हमारे शरीर के लिए हानिकारक हैं। इनमें से कुछ अणु रक्त वाहिकाओं को संकुचित करते हैं जिससे रक्तचाप के स्तर में वृद्धि होती है।
चूंकि हम पहले से ही आंतों की वसा द्वारा उत्पादित सूजन के बारे में जानते हैं, इन दोनों को एक साथ रखा जा सकता है, जहां धमनियां गिरने लगती है। यदि आप ऐसे व्यक्ति हैं जिनके पास बहुत बैली फैट है और आप ट्राइग्लिसराइड्स, रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल के स्तर में वृद्धि देखते हैं, तो आपको पता होना चाहिए कि आप गलत रास्ते पर हैं।
4. ब्लडप्रेशर
रक्तचाप तब बढ़ता है जब रक्त शर्करा और इंसुलिन का स्तर सामान्य से ऊपर उठता है। जब हम उच्च शर्करा वाले खाद्य पदार्थों का उपभोग करते हैं, तो शर्करा को ऊर्जा में बदलने के लिए इंसुलिन के साथ रक्त शर्करा के प्रवाह स्तर में क्षणिक परिवर्तन होता है।
5. अवसाद
जैसा कि हम पहले से ही जानते हैं, आंतों की वसा को "सक्रिय रोगजनक वसा" कहा जाता है क्योंकि यह हमारे शरीर को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। अध्ययन से साबित हुआ है कि टमी फैट स्वस्थ न्यूरोट्रांसमीटर कामकाज को कम कर देता है। इसके अलावा अधिक हार्मोनल परिवर्तन भी होते हैं। यह असंतुलन, आपको मूड स्विंग की ओर ले जाता है और यदि समय पर इसका इलाज नहीं किया जाए तो अंत में यह डिप्रेशन बन सकता है।
6. अनिद्रा और अन्य नींद विकार
एक बड़ा पेट और डबल चिन, जोर से खर्राटों का आना और सांस लेने में रुकावट जैसी दिक्कतों को ट्रिगर करता है। स्लीप एपेना ऐसी बीमारी है, जिसमें अक्सर रातों में आपको सोते समय सांस लेने में दिक्कत पैदा हो जाती है। यह समस्या फेफड़ो और श्वासनली के चारों ओर जमा वसा के उच्च स्तर के कारण पैदा होती है, जिससे सांस लेने में मुश्किल होती है। यह बीमारी व्यक्ति की नींद में बाधा डालती है, जिससे उसे आराम से नींद नहीं मिलती है। यह उन्हें पूरे दिन के लिए नींद और मूडी बनाता है। कभी-कभी इसकी वजह से आपकी नींद भी पूरी नहीं होती है।
7.डिमेंशिया और अल्जाइमर
बड़े पेट वाले लोग छोटे पेट वाले लोगों की तुलना में डिमेंशिया और अल्जाइमर से ग्रस्त रहते हैं। शरीर के अतिरिक्त बढ़ती उम्र में आपका मस्तिष्क भी कम कार्य करने लगता है। जिसकी वजह से डिमेंशिया जैसी समस्याएं खड़ी होती हैं। अभी तक रिसर्च से यह सिद्ध नहीं हो पाया है कि यहां अपराधी हार्मोन लेप्टिन ही है, जो वसा कोशिकाओं द्वारा जारी किया जाता है। लेप्टीन से आपके मस्तिष्क कोशिकाओं, मैमोरी, भूख और सीखने की क्षमता पर गहरा असर पड़ता है। इस प्रकार, आपके पेट की चर्बी जितनी ज्यादा होगी, आपका मस्तिष्क उतना कम कार्य करने लगेगा।
8. कैंसर
आंतों की वसा कोशिकाओं द्वारा जारी साइटोकिन्स, शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं में कैंसर की गतिविधि को ट्रिगर करते हैं। पोस्टमेनोपॉज़ल महिलाओं में यह जोखिम अधिक है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अंडाशय में एस्ट्रोजन उत्पादन धीरे-धीरे कम हो जाता है जिससे वसा कोशिकाएं एस्ट्रोजेन का मुख्य स्रोत बन जाती हैं।
अधिक वजन वाली महिलाओं के लिए, अधिक वसा कोशिकाओं के कारण अधिक हार्मोन का उत्पादन होता है। यह हार्मोन महिलाओं के स्तन में घातक ट्यूमर का कारण बन सकते हैं। पुरुषों के शरीर में अत्यधिक वसा कोशिकाओं के साथ कोलोरेक्टल कैंसर होने की संभावना बनी रहती है।
आंतों की वसा से छुटकारा पाना काफी मुश्किल है। इसके लिये आपको अपने शरीर के प्रति समपर्ण और सही शासन की आवश्यकता होता है।
• अच्छे भोजन, एक संतुलित आहार, कम वसा वाला खाना खाना-पकाना। जैसे- उबला हुआ या बेक्ड किया हुआ ही खाद्य पदार्थ चुनना।
• आंतों की वसा को खत्म करने के लिए नियमित रूप से व्यायाम करना, 30 मिनट का वर्कआउट आपकी कैलोरी को बर्न कर सकता है। यदि आप ऐसा नहीं कर सकते हैं, तो एक साधारण तेज चलने से बैली फैट से छुटकारा मिल सकता है।
• तनाव हार्मोन कोर्टिसोल एक परेशानी है। यह आपके असमय अनहेल्दी खाना खाने से होती है। यही कारण है कि ध्यान और योग के जरिए आप तनावमुक्त जीवन जी सकते हैं।
यदि आपको लगता है कि आपको डॉक्टर की जरूरत है तो अवश्य उनसे सलाह लें। यदि आपकी कमर 38 से ऊपर है, तो बेहतर स्वास्थ्य के लिए कुछ जीवनशैली में बदलावों पर चर्चा करने के लिए अपने डॉक्टर के साथ अपॉइंटमेंट करना सबसे अच्छा है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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