Latest Updates
-
सुबह खाली पेट जौ का पानी पीने से दूर होंगी ये 5 समस्याएं, जानें इसे बनाने का तरीका -
Baglamukhi Jayanti 2026: बगलामुखी जयंती कब है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
फैटी लिवर में कौन सा योग करें? जानें लिवर को साफ और मजबूत रखने के लिए योगासन -
May 2026 Vrat Tyohar: वट सावित्री, शनि जयंती सहित मई माह में पड़ रहे हैं कई व्रत-त्योहार, देखें पूरी लिस्ट -
Swapna Shastra: सपने में मरे हुए व्यक्ति को देखने का क्या मतलब होता है? जानें ये शुभ होता है या अशुभ -
Bael Juice Benefits: गर्मियों में रोजाना पिएं एक गिलास बेल का जूस, सेहत को मिलेंगे ये 5 फायदे -
Who Is Divyanka Sirohi: कौन हैं एक्ट्रेस दिव्यांका सिरोही? जिनका 30 साल की उम्र में हार्ट अटैक से हुआ निधन -
Kedarnath Yatra 2026: केदारनाथ यात्रा आज से शुरू, रजिस्ट्रेशन से हेलीकॉप्टर बुकिंग तक जानें सभी जरूरी नियम -
बालों की ग्रोथ के लिए इस तरह करें केले के छिलके का इस्तेमाल, कुछ ही दिनों में घुटनों तक लंबे हो सकते हैं बाल -
दीपिका कक्कड़ की MRI रिपोर्ट में मिले 2 नए सिस्ट, अब होगी इम्यूनोथेरेपी, जानें क्या है ये ट्रीटमेंट
अलग-अलग शिफ्ट में काम करने से सेहत पर पड़ता है बुरा असर, महिलाओं को रहता है ज्यादा जोखिम
आजकल ऐसे कई प्रोफेशन है जहां काम के दबाव की वजह से अलग-अलग शिफ्ट में काम कराया जाता है। जिसका असर कर्मचारियों के सेहत पर देखने को मिलता हैं। दरअसल अलग-अलग शिफ्ट में काम करने से इसका असर बॉडी क्लॉक पर पड़ता हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि हमारे शरीर के हार्मोन सूरज की रोशनी में यानी दिन के समय ज्यादा पॉजीटिव रिएक्ट करते हैं जबकि देर रात तक काम करने से शरीर में कई तरह की बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है।
अलग-अलग शिफ्ट में काम करना पुरुषों की तुलना में महिलाओं के लिए ज्यादा नुकसानदायक हैं। इस बारे में हाल ही में एक नई रिसर्च भी सामने आई है जिसके अनुसार रात की शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं में उम्र और समय से पहले मेनॉपॉज आ सकता है।

नींद की कमी
नाइट शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं के मस्तिष्क पर पुरुषों की तुलना में अधिक नेगेटिव इफेक्ट पड़ता है। एक नई रिसर्च के अनुसार, पुरुषों की तुलना में महिलाओं के ब्रेन की परफॉरमेंस पर सर्काडियन प्रभाव (24 घंटों का जैविक चक्र) इतना ज्यादा होता है कि नाइट शिफ्ट पूरी होने के बाद महिलाओं में कमजोरी महसूस होने लगती हैं। नींद की कमी की वजह से ध्यान लगाने में परेशानी होती है। और मानसिक तनाव बढ़ जाता है।

रात में स्ट्रेस हॉर्मोन रहते हैं एक्टिव
ह्यूमन रिप्रॉडक्शन जर्नल में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, रात में दिन की तुलना में तनाव वाले हॉर्मोन ज्यादा एक्टिव रहते हैं, तनाव की वजह से सेक्स हॉर्मोन एस्ट्रोजेन के बनने में बाधा आती है, जो मेनोपॉज के लिए जिम्मेदार हो सकता है। रिसर्च में यह भी पाया गया कि रात में काम करने वाली महिलाओं में ऑव्यूलेशन कम होता है। दिन की शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं में मेनॉपॉज देरी से आता है।

हड्डियों और याददाश्त को भी नुकसान
रात की शिफ्ट में काम करने वालों में एक समय के बाद हड्डियों से जुड़ी समस्या देखने को मिलती है। इसके अलावा याददाश्त से जुड़ी कई प्रॉब्लम्स भी हो सकती हैं। लेकिन इन सबके अलावा नाइट शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं में जल्दी मेनॉपॉज का खतरा भी बढ़ जाता है।

पुरुषों की तुलना में महिलाओं को ज्यादा नुकसान
जो महिलाएं शिफ्ट वर्क में रात की शिफ्ट में ज्यादा काम करती हैं उनको ऑस्टियोपोरोसिस और याददाश्त की समस्या होने लगती है। शिफ्ट की टाइमिंग में अनियमिताओं के कारण महिलाओं की बॉडी क्लॉकिंग पर बहुत फर्क पड़ता है नतीजन वक्त से पहले मेनोपॉज और स्ट्रेस जैसी समस्याएं होने लगती हैं।

बढ़ जाता है मेनॉपॉज का खतरा
ह्यूमन रिप्रॉडक्शन जर्नल में प्रकाशित एक रिसर्च के अनुसार, रात की शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं में अधिक समस्याएं देखी गई हैं। एक अन्य शोध में पाया गया कि जो महिलाएं 20 महीने तक रात की शिफ्ट में काम कर रही थीं, उनमें अर्ली मेनोपॉज का खतरा 9 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। यह शोध 80 हजार से अधिक नर्सों पर किया गया है। अध्ययन में उन महिल नर्सों को शामिल किया गया था जो 22 वर्षों से शिफ्ट वर्क में काम कर रही थीं।



Click it and Unblock the Notifications