दक्षिण भारत में आया मंकी फीवर, क्या है ये मर्ज़

स्वाइन फ्लू, बर्ड फ्लू, निपाह जैसी बिमारियों के बारे में आप पहले सुन चुके हैं लेकिन इन दिनों एक ऐसा मर्ज़ है जिसने दक्षिण भारत खासतौर से कर्नाटक में अपना असर दिखा रहा है जिसके बारे में लोगों को काफी कम जानकारी है और वो है मंकी फीवर।

all things you need to know about monkey fever

दरअसल, हाल ही में मिल रही खबरों के मुताबिक, कर्नाटक के शिवमोगा ज़िले में मंकी फीवर से 15 लोगों के प्रभावित होने की बात सामने आयी है। इतना ही नहीं मंकी फीवर जिसे यास्नुर फॉरेस्ट डिजीज भी कहा जाता है उससे तीन लोगों की मौत हो चुकी है। चिंतनीय बात ये है कि जिन लोगों को मंकी फीवर के वैक्सीन दिए जा चुके थे उनमें भी इस मर्ज़ के लक्षण पाए गए।

भारत में 2016 के बाद से अब तक 327 लोग इससे प्रभावित हो चुके हैं। पिछले साल यानि 2018 में मंकी फीवर की चपेट में आने वाले लोगों की संख्या 19 थी।

कितना पुराना है मंकी फीवर का इतिहास

कितना पुराना है मंकी फीवर का इतिहास

1957 में लोगों को पहली बार मंकी फीवर के बारे में जानकारी हासिल हुई थी। ये तब से लेकर अब तक सेंट्रल यूरोप, ईस्टर्न यूरोप और नॉर्थ एशिया में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुका है। भारत की बात करें तो ये फीवर कर्नाटक के अलावा गोवा और केरल में देखा जा चुका है। सर्वप्रथम बंदरों को अपनी चपेट में लेने वाले मर्ज़ को लेकर डॉक्टरों ने ये संदेह पहले ही जता दिया था कि इंसान भी इसकी गिरफ्त में आएंगे।

कब रहता है सबसे ज़्यादा खतरा

कब रहता है सबसे ज़्यादा खतरा

मंकी फीवर के फैलने का खतरा सबसे ज़्यादा नवंबर से मार्च के बीच में रहता है। इस बीमारी से सबसे पहले बंदर प्रभावित हुए थे। कर्नाटक के यास्नुर जंगल में अचानक ही बंदरों की संख्या में गिरावट दर्ज की गयी। तहक़ीक़ात करने पर पाया गया कि एक वायरस के कारण बंदरों को नुकसान हो रहा है। इस वायरस के सम्पर्क में आने के बाद से उनकी हालत खराब होने लग जाती थी और अंत में उनकी मौत हो जाती।

फ्लाविवायरस समुदाय में आने वाले इस वायरस का नाम टिक था। इसके प्रभाव के कारण होने वाली बीमारी को टिक बॉर्न एन्सेफलाइटिस (टीबीई) कहा जाता है।

मंकी फीवर कैसे फैलता है?

मंकी फीवर कैसे फैलता है?

ये लोगों में एक दूसरे से नहीं फैलता है। मंकी फीवर, प्रभावित जानवरों खासतौर से बंदरों का पंजा लगने या फिर उनके संपर्क में आने से होता है।

मंकी फीवर के क्या है लक्षण

मंकी फीवर के क्या है लक्षण

दूसरे बुखार की तरह मंकी फीवर में भी शरीर का तापमान बढ़ जाता है। शरीर में दर्द रहता है और काफी कमज़ोरी महसूस होती है। स्थिति और खराब होने पर नाक, मुंह और मसूढ़ों से रक्तस्राव भी हो जाता है।

मंकी फीवर का क्या है इलाज

मंकी फीवर का क्या है इलाज

इस बीमारी से प्रभावित इलाकों के लोगों को सतर्कता बरतने के लिए कहा जाता है। वेक्सिनेशन करवाना और टिक वायरस से इन्फेक्टेड जानवरों से बचना ही सबसे बेहतर विकल्प है। इस मर्ज़ को ठीक होने में हफ्ते और कई बार महीने भी लग जाते हैं।

Story first published: Monday, January 7, 2019, 16:57 [IST]
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