कोविड 19: DRDO की दवा 2-DG कैसे करती है काम और क‍ितनी मात्रा में करें इसका सेवन, जान‍िए सबकुछ

देश में कोरोना संक्रमण की तेजी से बढ़ते मामलों की रफ्तार रोकने के ल‍िए रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन यानी DRDO ने कोरोना रोधी दवा बनाई है, जिसका नाम -डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज (2-डीजी) रखा गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री हर्षवर्धन ने इस दवा का पहला बैच (10,000 डोज) लॉन्‍च क‍िया।

देश के ड्रग्स कंट्रोलर की ओर से डीआरडीओ द्वारा बनाई गई कोरोना की इस दवा को आपातकालीन इस्तेमाल के लिए हाल ही में मंजूरी दी है।
हालांकि इस नई दवा को लेकर लोगों के मन में बहुत से सवाल हैं, जिसमें से खासतौर पर लोग सोच रहे होंगे कि यह दवा कैसे खाई जाएगी, कितनी मात्रा में ली जाएगी। तो चलिए हम आपके इन सवालों के जवाब देने की कोशिश करते हैं।

इस दवा से क्या फायदा?

इस दवा से क्या फायदा?

डीआरडीओ की ओर से यह दावा किया गया है कि यह दवा (2-डीजी) कोरोना मरीजों के अस्पताल में रहने के समय को कम करती है और ऑक्सीजन लेवल को भी सही रखती है। दावे के मुताबिक, जिन कोरोना मरीजों पर इसका ट्रायल किया गया, उनमें तेजी से रिकवरी देखी गई और साथ ही मरीजों की ऑक्सीजन पर निर्भरता भी कम हो गई।

कोरोना के खिलाफ जंग में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की नई दवा उम्‍मीद की किरण लेकर आई है। इस दवा का नाम 2-डीऑक्‍स‍ी-डी-ग्लूकोज है।

Coronavirus Treatment के लिए DRDO की 2 DG Medicine इस दिन होगी Launch | Boldsky
कोरोना की यह दवा काम कैसे करती है?

कोरोना की यह दवा काम कैसे करती है?

सबसे पहले बताते हैं कि यह दवा कैसे काम करती है। अब तक सामने आई स्टडी के अनुसार, यह दवा अस्पताल में भर्ती रोगियों की तेजी से रिकवरी में मदद करती है और बाहर से ऑक्सीजन देने पर निर्भरता को कम करती है। दरअसल, यह दवा ग्लूकोज का एक सब्स्टिट्यूट है। यह लगभग ग्लूकोज की तरह है, लेकिन असल में उससे बिल्कुल अलग है। यह पाउडर के रूप में है, जिसे पानी में घोलकर मरीजों को दिया जाता है। कोरोना वायरस अपनी एनर्जी के लिए मरीज के शरीर से ग्लूकोज लेता है, मगर ग्लूकोज के चक्‍कर में वह इस दवा का इस्तेमाल करने लगता है। जिससे वायरस को एनर्जी मिलना बंद हो जाती है और उनका वायरल सिंथेसिस बंद होने लगता है। इस तरह नए वायरस का बनना बंद हो जाता है और साथ ही बाकी वायरस भी मरने लगते हैं।

यह दवा कितनी मात्रा में ली जाएगी?

यह दवा कितनी मात्रा में ली जाएगी?

आम ग्लूकोज की तरह यह दवा सैशे (पाउच) में पाउडर के रूप में मिलेगी, जिसे पानी में मिलाकर मुंह से ही मरीज को दिया जाता है। हालांकि यह दवा की कितनी मात्रा और कितने समय में दी जानी है, इसका निर्णय डॉक्टरों पर रहेगा. इस बारे में डॉक्टर मरीज की उम्र, मेडिकल कंडीशन आदि की जांच करके ही करेंगे। आपको बता दें कि डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने बिना डॉक्टर की सलाह, कोरोना से बचने के नाम पर या ज्यादा मात्रा में यह दवा न लेने की चेतावनी भी दी है।

दवा की कीमत

दवा की कीमत

INMAS के वैज्ञानिक डॉ. सुधीर चंदना के मुताबिक, यह दवा एक सैशे के रूप में उपलब्‍ध होगी। कोविड-19 मरीजों को पूरी तरह ठीक होने के लिए 5 से 7 दिन तक यह दवा देनी पड़ सकती है। सूत्रों के मुताबिक, एक सैशे की कीमत 500 से 600 रुपये के बीच हो सकती है।

कोई साइडइफेक्‍ट नहीं

यह दवा 17 मई को लॉन्‍च होते ही आम जनता के लिए उपलब्‍ध हो गई है। इसका उत्‍पादन तेजी से बढ़ाया जा रहा है ताकि ज्‍यादा से ज्‍यादा मरीजों तक इसकी पहुंच हो सके।साइड इफेक्‍ट्स के बारे में पूछने पर डॉ. चंदना ने कहा कि ट्रायल के दौरान, सामान्‍य और गंभीर मरीजों को यह दवा दी गई। सभी मरीजों को इस दवा से फायदा ही हुआ, किसी पर कोई प्रतिकूल प्रभाव देखने को नहीं मिला।

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