हेपेटाइट‍िस संक्रमित से यौन संबंध बनाना हो सकता है खतरनाक, जाने बचाव का तरीका

हेपेटाइटिस, एचआईवी जितना ही खतरनाक रोग है। हेपेटाइटिस के रोगी के साथ यौन संबंध बनाना उतना ही खतरनाक है जितना एड्स या एचआईवी के रोगी के साथ। दोनों ही बीमारियां संक्रमित रक्‍त के संपर्क में आने से फैलती हैं। किसी भी हेपेटाइट‍िस से संक्रमित रोगी के साथ असुरक्ष‍ित यौन संबंध बनाने से ये रोग फैलने की सम्‍भावना काफी अधिक होती है।

इस रोग की फैलने वाली की ज्‍यादा सम्‍भावना उन लोगों में होती है जो मल्‍टीपल र‍िलेशन में होते हैं या जो लोग पहले से ही क‍िसी STD से ग्रसित है।

नहीं नजर आते लक्षण

नहीं नजर आते लक्षण

हेपेटाइटिस बी के वायरस का विंडो पीरियड बहुत लंबा होता है। अर्थात शरीर में वायरस प्रवेश करने के बाद भी तकरीबन 15 दिन तक लक्षण सामने नहीं आने देता है। जब तक मरीज को इस लक्षणों के बारे में मालूम चलता है तब तक देर हो चुकी होती है। हेपेटाइटिस बी के मरीज के साथ सेक्स न करें क्योंकि ऐसा करने से रोग फैलने की संभावना काफी अधिक होती है।

न करें अनसेफ सेक्‍स

न करें अनसेफ सेक्‍स

हेपेटाइटिस बी HIV के समान ही खतरनाक होता है, इस बीमारी का वायरस रक्‍त के माध्‍यम से आपको संक्रमित कर सकता है। हेपेटाइटिस के रोगी के साथ असुरक्षित सेक्स करना खतरनाक साबित हो सकता है। इसल‍िए जहां तक हो कंडोम का प्रयोग करें ताकि संक्रमण न फैले।

न करें एक-दूसरे की चीजों का इस्‍तेमाल

न करें एक-दूसरे की चीजों का इस्‍तेमाल

कई कपल र‍िलेशनश‍िप में आते है तो पर्सनल हाईजीन को दरक‍िनार कर देते है जिसकी वजह से यौन संचार‍ित रोग होने की सम्‍भावना अधिक होती है। हेपेटाइट‍िस बी से संक्रमित व्‍यक्ति का प्रयुक्त ब्लेड व टूथ ब्रश का भी इस्‍तेमाल करना खतरनाक है क्योंकि यदि रोग के शरीर का रक्त इन पर लगा और सामान्य व्यक्ति ने उसी ब्रश का प्रयोग किया तो संक्रमण की संभावना 80 प्रतिशत तक होती है। उनका कहना है कि रोग का वायरस शरीर से बाहर सात दिनों तक जीवित रहता है और इस दौरान यदि कोई भी स्वस्थ्य व्यक्ति इसके सम्पर्क में आता है तो वह इससे संक्रमित हो जाता है।

गर्भ में पल रहे बच्‍चें को भी खतरा

गर्भ में पल रहे बच्‍चें को भी खतरा

हेपेटाइटिस बी से संक्रमित गर्भवती महिला के शिशु में रोग होने की पूरी संभावना रहती है। इसल‍िए इससे बचने के ल‍िए महिलाओं को हर सम्‍भव प्रयास करना चाहिए। हेपेटाइट‍िस से बचने का सबसे प्रभावी कदम ये है क‍ि यदि किसी व्यक्ति में 20 से 25 वर्ष के बीच रोग के लक्षण दिखाई दें तो पूरे परिवार का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाना चाहिए क्योंकि हो सकता है कि बीमारी का वायरस व्यक्ति में उसकी मां या फिर परिवार के ही किसी व्यक्ति से आया हो।

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