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HFMD: चारु असोपा की बेटी को हुई ये खतरनाक बीमारी, इसकी वजह से बच्चों को खाने तक में होती है तकलीफ
टीवी एक्ट्रेस चारु असोपा बीते कुछ दिनों से अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर सुर्खियों में हैं। इस बीच चारु ने अपने यूट्यूब चैनल पर अपनी बेटी की बीमारी से एक न्यूज शेयर की है। जिसमें उन्होंने बताया है कि उनकी बेटी जियाना को हैंड फुट ऐंड माउथ डिसीज (HFMD)हो गई है। चारु ने बताया कि उनकी बेटी कुछ खा तक नहीं पा रही है। HFMD बच्चों की वायरल बीमारी है। इसमें हाथ-पैरों में रैशेज और मुंह में छाले पड़ जाते हैं। आइए जानते हैं कि हैंड फुट ऐंड माउथ डिसीज क्या होती है और छोटे बच्चों में इस बीमारी का पता चलने पर क्या करें?
चारु ने वीडियो शेयर करके बयां किया अपना दर्द
चारु ने अपने यूट्यूब चैनल पर अपनी बेटी की बीमारी से जुड़ी जानकारी शेयर करते हुए बताया कि जियाना को हैंड, फुट ऐंड माउथ डिसीज हुई है। मैं हर पल उसके साथ हूं। मैं नहीं चाहती कि वह इस वक्त अकेला फील करे। उसके चेहरे, पैर, हाथों और गले के अंदर फफोले हो गए हैं। वह कुछ खा भी नहीं पा रही। चारु ने बताया कि जियाना बुरी तरह रो रही थी जिसके बाद उसे दवाएं दीं।

पाचन तंत्र पर करता है अटैक
मानसून के इस सीजन में कभी गर्मी बढ़ जाती है, तो कभी नमी बढ़ जाती है, ऐसे में इस बीमारी को फैलाने वाले एंटिरोवायरस व कॉक्ससैकि वायरस एक्टिव हो गए हैं। इस बार इसका प्रकोप अधिक देखने को मिल रहा है। आमतौर पर यह वायरस ग्रुप में अटैक करता है, इसलिए एक साथ कई बच्चों को शिकार बना सकता है। सबसे पहले यह वायरस मुंह के अंदर के टॉन्सिल के आसपास के टिश्यूज और पाचन तंत्रिका में फैलता है। खून के जरिए यह पूरे शरीर में फैल जाता है। मुख्य कारण मवेशियों के संपर्क में आना माना जाता है। बुखार तो दो-तीन दिन में चला जाता है, लेकिन मुंह, पैर व हाथ के छाले 8-10 दिन रहते हैं।

ये लक्षण दिखते हैं
- 2 से 3 दिन तेज बुखार
- अस्वस्थ महसूस होना
- हाथ, पैर, मुंह व हिप्स पर छोटे दर्दनाक छाले
- छालों के पास खुजली
- भूख ना लगना व चिड़चिड़ापन
- साबुन से हाथ धोएं
- मवेशियों के संपर्क से बचें।
- कॉमन एरिया को कीटाणु रहित करें
- इंफेक्टेड बच्चों से दूर रहें
- पैरासिटामोल व छालों के लिए कैलेमाइन लोशन

बचाव व इलाज
इसके अलावा तेजी से फैलते इस वायरस से बचाव की जरूरत है, क्योंकि किसी एक बच्चे को यह बीमारी है तो दूसरे बच्चों में इसके फैलने की आशंका अधिक रहती है। इसलिए ऊपर बताएं बचाव के तरीकों को अपनाएं।



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