Monsoon Health: डेंगू से भी ज्यादा खतरनाक है इससे जुड़े इन मिथ्स को सच मानना

मानसून का मौसम आ चुका है और इसके साथ ही कई तरह की बीमारियों की शुरुआत हो चुकी है। इनमें से कई बेहद ही जानलेवा भी होते हैं और डेंगू भी इनमें से एक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया भर में डेंगू की घटनाओं में काफी वृद्धि हुई है और दुनिया की आधी से अधिक आबादी अधिक जोखिम में है। हर साल वैश्विक स्तर पर संक्रमण के लगभग 100-400 मिलियन मामले सामने आते हैं।

भारत में, मानसून का मौसम आते ही डेंगू का प्रकोप शुरू हो जाता है और जुलाई से नवंबर तक डेंगू के मामले सबसे अधिक देखे जाते हैं। डेंगू एक वायरल बीमारी है, जो चार अनोखे सीरोटाइप के डेंगू वायरस के कारण होती है, जिसमें डेन-1, डेन-2, डेन-3 और डेन-4 शामिल हैं। यह मादा मच्छर (एडीज इजिप्टी) के काटने से फैलता है। इस बीमारी का अगर इलाज न किया जाए तो यह मौत का कारण बन सकती है। लोग डेंगू के नाम से ही घबराते हैं और वाहक मच्छर द्वारा काटे जाने के 3-14 दिनों के बीच डेंगू के लक्षणों की शुरुआत होती है। बुखार, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, सिरदर्द और रैशेज इसके सामान्य लक्षण हैं। चूंकि डेंगू को एक खतरनाक संक्रमण माना जाता है, इसलिए लोगों के मन में इसे लेकर कई तरह मिथ्स प्रचलित हैं। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको डेंगू से जुड़े मिथ्स और उनकी सच्चाई के बारे में बता रहे हैं-

मिथक 1- कोई भी मच्छर डेंगू का कारण बन सकता है

मिथक 1- कोई भी मच्छर डेंगू का कारण बन सकता है

सच्चाई- यह तो हम सभी जानते हैं कि डेंगू मच्छर के फैलने से होता है। इसलिए, लोग सोचते हैं कि यह किसी भी मच्छर से होता है। जबकि यह सच नहीं है। डेंगू वास्तव में मादा एडीज मच्छर के काटने से फैल सकता है। इसके अलावा, वे संक्रमण तभी प्रसारित कर सकते हैं जब वे स्वयं डेंगू से प्रभावित हों।

मिथक 2- कम प्लेटलेट्स का मतलब है कि आपको डेंगू है

मिथक 2- कम प्लेटलेट्स का मतलब है कि आपको डेंगू है

सच्चाई- डेंगू होने पर प्लेटलेट्स कम हो जाते हैं। इसे डेंगू का एक क्लासिक लक्षण माना जाता है। हालांकि, इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या कम होने पर व्यक्ति को डेंगू ही हो। मौसमी परिवर्तनों के साथ, बहुत सारे वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण हो सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप भी डेंगू के समान लक्षण हो सकते हैं और प्लेटलेट्स की हानि हो सकती है। हालांकि, अगर कोई व्यक्ति लेप्टोस्पायरोसिस, पीला बुखार, ऑटोइम्यून बीमारी, से पीड़ित है तो भी प्लेटलेट काउंट कम हो सकता है।

मिथक 3- पपीते का रस पीने से डेंगू ठीक होता है

मिथक 3- पपीते का रस पीने से डेंगू ठीक होता है

सच्चाई- यह सच है कि पपीते के पत्ते का अर्क डेंगू के प्रबंधन में फायदेमंद माना जाता है। हालांकि, यह बीमारी को पूरी तरह से ठीक नहीं कर सकता है। ऐसे में दवाइयों के साथ-साथ पपीते के रस का सेवन करने से जल्द इलाज में मदद मिलती है, लेकिन डेंगू के इलाज के लिए केवल इस पर भरोसा नहीं किया जा सकता है।

मिथक 4- डेंगू बुखार कोई नुकसान नहीं करता

मिथक 4- डेंगू बुखार कोई नुकसान नहीं करता

सच्चाई- अधिकांश अन्य बीमारियों की तरह, डेंगू हल्का और गंभीर दोनों प्रकार का होता है। यदि किसी व्यक्ति को प्रारंभिक अवस्था में सही उपचार मिल जाए, तो वह गंभीर रूप से प्रभावित नहीं होगा। लेकिन दूसरी तरफ, देर से निदान और उपचार के परिणामस्वरूप भ्रम, सांस लेने में समस्या, आंतरिक रक्तस्राव और यकृत की विफलता जैसी जटिलताएं हो सकती हैं। कुछ लोगों को तो डेंगू के कारण अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ सकता है।

मिथक 5- एक व्यक्ति से दूसरे में फैलता है डेंगू

मिथक 5- एक व्यक्ति से दूसरे में फैलता है डेंगू

तथ्य- कुछ लोग यह मानते हैं कि डेंगू संक्रामक रोग है, अर्थात उन्हें लगता है कि यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। जबकि यह सच नहीं है। डेंगू कभी भी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता है। यह तभी फैल सकता है जब संक्रमित एडीज मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है, जिसे तब डेंगू हो जाता है और काटने के 4 से 5 दिन बाद लक्षण सामने आएंगे।

Desktop Bottom Promotion