कोरोना का प्रकोप: कब पड़ती है मरीज को ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत- जानें इससे जुड़े हर सवाल का जवाब

भारत में कोरोना का कहर बढ़ता ही जा रहा है। अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी से अधिकतर लोगों की मौत हो चुकी है। देश में ऑक्सीजन सिलेंडर की समस्या बढ़ती ही जा रही है। चलिए जानते हैं ऑक्सीजन सिलेंडर की जरुरत कब पड़ती है और ऑक्सीजन सिलेंडर से जुड़े कुछ सवालों के बारे में।

ऑक्सीजन सिलेंडर की जरुरत कब पड़ती है

ऑक्सीजन सिलेंडर की जरुरत कब पड़ती है

कोरोना मरीज क्रिटिकल स्टेज में होता है उसे सांस लेने में दिक्कत होती है उस समय ऑक्सीजन सिलेंडर लगाया जाता है। एक पोर्टेबल ऑक्सीजन सिलेंडर की कीमत कम से कम 5000 रुपए होती है ऑक्सीजन सिलेंडर की कीमत अलग अलग होती है। यह पंप काउंट और वॉल्यूम पर निर्भर करती है। पोर्टेबल ऑक्सीजन सिलेंडर का इस्तेमाल करना आसान होता है।

एक सिलेंडर कितने दिन तक चल सकता है

एक सिलेंडर कितने दिन तक चल सकता है

पोर्टेबल ऑक्सीजन सिलेंडर 2 किलो से लेकर 13 किलो तक के होते हैं। ये 2 घंटे से लकर 14 घंटे तक चलते हैं। 2 किलों वाला सिलेंडर दो घंटे तक चलता है। 3 किलो वाला सिलेंडर 3 घंटे तक चलता है। 5 किलो वाला सिलेंडर 5 घंटो तक चलता है।

कैसे मिल सकता है ऑक्सीजन सिलेंडर

कैसे मिल सकता है ऑक्सीजन सिलेंडर

पोर्टेबल ऑक्सीजन सिलेंडर की डिलीवरी 10 से 15 दिनों में हो सकती है। वहीं इन दिनों पोर्टेबल ऑक्सीजन सिलेंडर की मांग अचानक से बढ़ गई है। पोर्टेबल ऑक्सीजन सिलेंडर किट में एक सिलेंडर, वॉल्व, रेगुलेटर और मेडिकल ऑक्सीजन से भरा मास्क होता है। ऑक्सीजन सिलेंडर की जरुरत उन लोगों को जो होम क्वांरटीन में है जिन्हें मेडिकल सपोर्ट की जरुरत है।

Covid 19: आखिर कब पड़ती है Oxygen Cylinder की जरूरत, जानें Expert Advice | Boldsky
कैसे बनती है ऑक्सीजन

कैसे बनती है ऑक्सीजन

ऑक्सीजन गैस क्रायोजेनिक डिस्टिलेशन प्रॉसेस से बनती है। हवा में मौजूद गैसो को अलग किया जाता है। क्रायोजेनिक डिस्टिलेशन प्रॉसेस से हवा को फिल्टर किया जाता है, ताकि धूल मिट्टी को हटाया जा सके। इसके बाद हवा को कंप्रेस किया जाता है। कंप्रेस हवा को मॉलीक्यूलर छलनी एडजॉर्बर से ट्रीट किया जाता है। इस प्रॉसेस में हवा में मौजूद पानी के कण, कार्बन डाई ऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन को अलग किया जाता है।

Story first published: Thursday, April 22, 2021, 20:58 [IST]
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