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सेल्फी का क्रेज और शॉर्ट-फॉर्म वीडियो बढ़ा रहा फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम
क्या आपको ये अनुभव हुआ है कि आपका फोन जेब में रखा हो या आप ने हाथ में पकड़ रखा हो, लेकिन आपने फोन का वाइब्रेशन महसूस किया हो और अपना मोबाइल फोन चेक करते हैं। या अपने फोन को पर्स में रखते हैं, तो फोन को वाइब्रेट करते हुए सुना या बजते हुए सुनतें है, कभी अपने फोन को सिर्फ इसलिए निकाला कि अलार्म बजता सुनाई दे रहा है, लेकिन वास्तव में ऐसा कुछ भी नहीं था। ये पाया गया है कि कॉलेज स्टूडेंट्स दिन में औसतन दस घंटे अपने सेल फोन पर बिताती हैं, इंटरनेट पर सर्फिंग करती हैं और 100 से ज्यादा मैसेज करते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब आपका फोन बीप या बजजा हैं तो दिमाग को डोपामाइन और सेरोटोनिन - खुशी से जुड़े कैमिकल को एक हिट मिलता है। ये वही केमिकल हैं जो ड्रग यूजर्स को उनका 'हाई' देते हैं। जो लोग बहुत अधिक सेल्फी पोस्ट करते हैं, उनमें कुछ नार्कोटिक प्रॉपर्टीज जैसे कि फ्राजाइल सेल्फ स्ट्रीफ हाई-लेवल होते हैं। इससे फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम बढ़ रहा है।

फैंटम पॉकेट वाइब्रेशन सिंड्रोम
वहीं भारत में सेल्फी का क्रेज और शॉर्ट-फॉर्म वीडियो बनाने का क्रेज बढ़ता जा रहा है, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े रहने की इच्छा कई मेंटल हेल्थ प्रॉबलम्स को क्रिएट कर रही है। जिसमें 'फैंटम पॉकेट वाइब्रेशन सिंड्रोम' स्थिति भी शामिल है।
फैंटम पॉकेट वाइब्रेशन सिंड्रोम तब होता है जब कोई व्यक्ति फोन को अपनी जेब में कंपन महसूस करता है जबकि ऐसा नहीं है। इस सिंड्रोम का मुकाबला करने का सबसे अच्छा तरीका है कि मोबाइल फोन के यूज कम किया जाए और कभी-कभी वाइब्रेशन को बंद कर दिया जाए।

दुनिया का पहला मोबाइल फोन-
पहला मोबाइल फोन मोटोरोला ने 1973 में बनाया था। तब से, मोबाइल फोन यूजर्स तेजी से बढ़े हैं। दुनिया की करीब 66 फीसदी आबादी मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रही है। यूएस के इंडियाना के फोर्ट वेन में इंडियाना यूनिवर्सिटी-पर्ड्यू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. मिशेल ड्रौइन के अनुसार, उनकी रिसर्च में 89 प्रतिशत ग्रेजुएट्स ने औसतन हर दो सप्ताह में इन 'फैंटम पॉकेट वाइब्रेशन सिंड्रोम' का अनुभव किया था, हालांकि 11 में से केवल एक ने उन्हें क्लासीफाई किया था। जो लोग टेक्स्ट मैसेज पर अधिक भावनात्मक रूप से प्रतिक्रिया करते थे और टेक्स्ट मैसेजिंग पर अधिक निर्भर थे, वे उनसे अधिक परेशान रहे।

मोबाइल फोन ने बच्चों की मेंटल हेल्थ को गंभीरता से प्रभावित किया-
गोरव गुप्ता, वरिष्ठ सलाहकार मनोचिकित्सक, तुलसी हेल्थकेयर , नई दिल्ली ने आईएएनएस को बताया कि मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के बहुत ज्यादा यूज बच्चों की मेंटल हेल्थ पर गंभीरता से प्रभाव डालता है। साथ ही साथ डिप्रेशन, चिंता, अकेलापन, सेल्फ-हार्म, और यहां तक कि आत्महत्या जैसे विचार वाली समस्याएं भी होती हैं।

सेल्फी फीवर इस पीढ़ी के लिए जानलेवा, टेक्टाइल हलुसिएशन-
सेल्फी फोन और सेल्फी स्टिक अब केवल एक सुविधा नहीं हैं, बल्कि इसे सेल्फ-अवजॉब्शन का नया साइन माना जाता है, एक्सपर्ट का कहना है कि सेल्फी फीवर इस पीढ़ी और आने वाले लोगों को और अलग कर सकता है। व्यवहार विशेषज्ञों ने सेल्फी को तीन व्यापक श्रेणियों में बांटा है- वे जो दोस्तों के साथ ली गई हैं, वे जो कुछ गतिविधियों या घटनाओं के दौरान ली गई हैं, और वे जो शारीरिक बनावट पर ध्यान केंद्रित करती हैं। जर्नल 'साइकोलॉजी ऑफ पॉपुलर मीडिया कल्चर' में पब्लिश एक रिसर्च में पाया गया कि जो लोग बहुत अधिक सेल्फी पोस्ट करते हैं, उनमें कुछ नार्कोटिक प्रॉपर्टीज जैसे कि फ्राजाइल सेल्फ स्ट्रीफ हाई-लेवल होते हैं। जब वीडियो की बात आती है, तो ऐसा ही होता है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि आपके पास जितना अधिक डिजिटल इंटरफ़ेस होगा, उतना ही आप शारीरिक गतिविधि, सामाजिक जुड़ाव, शिक्षाविदों, खेल और रचनात्मकता से दूर जाने की संभावना रखते हैं।
वहीं डॉ. डॉ रोथबर्ग के अनुसार, 'फैंटम पॉकेट वाइब्रेशन सिंड्रोम' एक सिंड्रोम नहीं है। यह एक टेक्टाइल हलुसिएशन है, जिसमें दिमाग एक एक्साइटमेंट को महसूस करता है जो वास्तव में मौजूद नहीं होता है। पीवीएस वैश्विक स्तर पर एक सामान्य घटना है और मोबाइल फोन के अधिक उपयोग के कारण एक उभरती हुई बीमारी भी है। यह मनोवैज्ञानिक रोगों से जुड़ा हुआ है।

मोबाइल यूजर औसतन 150 बार अपना फोन चेक करता है
नोकिया के एक अध्ययन के अनुसार, जिसमें पाया गया कि औसत मोबाइल फोन उपयोगकर्ता दिन के दौरान हर 6.5 मिनट में या अपने जागने के घंटों के दौरान 150 बार अपने फोन की जांच करता है।
पीवीएस के लक्षण
मनोवैज्ञानिक तनाव
चिंता
हलुसिएशन
डिप्रेशन
ध्यान की कमी
ओवर विजिलेंस
इमोशनल डिस्टर्बेंस
पीवीएस के कारण
सेल फोन का बार-बार इस्तेमाल
सेल फोन का वाइब्रेशन मोड
सेल फोन निर्भरता
पोस्ट ट्रॉमेटिक डिसऑर्डर
गैजेट्स के लिए भावनात्मक लगाव
तनाव
सेल फोन को लंबे समय तक एक ही जेब में रखना

पीवीएस को मैनेज के लिए सुझाए गए उपाय -
- सेल फोन का समयबद्ध उपयोग
- सेल फोन पर संभावित निर्भरता कम करें
- बार-बार अलर्ट मोड जैसे कंपन को रिंगिंग में बदलें
- जीवन शैली में संशोधन
- वहम और भावात्मक पहलुओं के बारे में परामर्श और मार्गदर्शन
- विभिन्न उपकरणों का उपयोग करना
- सेल फोन को अलग-अलग जेबों या पोजीशन में ले जाना
- सेल फोन के वाइब्रेशन मोड से बचें।



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