Dead Butt Syndrome: ज्‍यादा देर तक बैठने से हो सकती है ये दिक्‍कत, जानें लक्षण और इलाज

क्या लंबे समय तक बैठे रहने से शरीर की कुछ मांसपेशियां इस हद तक निष्क्रिय हो जाती हैं कि वे अपने वास्तविक कार्य करना ही भूल जाती हैं? जी हां, ज्‍यादात्तर एक ही जगह पर बैठे रहने से आपको ग्लूटियल एम्नेसिया की स्थिति हो सकती है, जिसे "डेड बट सिंड्रोम" (DBS) के नाम से जाना जाता है।

इस स्थिति में अक्‍सर निंतबों की मांसपेशियां अपना कार्य करना भूल जाती है। जैसे पेल्विक मसल्‍स को सर्पोट करके बॉडी का प्रॉपर अलाइनमेंट बनाए रखना होता है।

अधिक चलने और कम बैठने से डेड बट सिंड्रोम की स्थिति को रोकने या उसके इलाज करने में मदद मिलती है, लेकिन यहां आज हम आपको बताएंगे कि इस अजीब-सी स्थिति को गंभीरता से न लेने पर अन्य समस्याएं हो सकती हैं।

डेड बट सिंड्रोम के लक्षण

डेड बट सिंड्रोम के लक्षण

लंबे समय तक बैठने के बाद, आपके नितंबों में ग्लूटियल मांसपेशियां (ग्लूटल) सुन्न हो सकती हैं या थोड़ा दर्द का भी अनुभव हो सकता है।

इस स्थिति में चलने या बैठने के दौरान पैल्विक दर्द, लंबे समय तक खड़े रहने में कठिनाई और लगातार पीठ के निचले हिस्से में दर्द जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत जांच की जानी चाहिए। लेकिन पैदल चलना और स्‍ट्रेचिंग एक्‍सरसाइज से इस स्थिति को जल्‍दी टाला जा सकता है।

कारण

कारण

एक अनियमित जीवनशैली भी इस सिंड्रोम का होने का कारण बन सकती है। जिसमें बहुत अधिक बैठने और लेटने की वजह से शरीर की मांसपेशियों को अधिक गति नहीं मिलने की वजह से ग्‍लूट‍ियल मांसपेशियों को बढ़ने का मौका मिलता है इससे आपके ह‍िप फ्लेक्‍सर्स टाइट होने लगती है। हिप फ्लेक्सर्स मसल्‍स पीठ के निचले हिस्से से होकर आपके पेल्विक के बीच से होकर जांघ के सामने से गुजरती हैं। जब आप चलते हैं, दौड़ते हैं और सीढ़ियां चढ़ते हैं तो ये मसल्‍य ही आपके पैरों को हिलाने के लिए जिम्मेदार होते हैं। ह‍िप फ्लेक्‍सर्स के टाइट होने और ग्‍लूट‍ियल मसल्‍स को बढ़ने से रोकने के ल‍िए आपको एक जगह लंबी देर तक बैठे नहीं रहना है।

ये भी एक वजह

ये भी एक वजह

विटामिन डी, विटामिन बी 12 की कमी और शराब के अधिक सेवन के कारण भी यह स्थिति हो सकती है।"

डेड बट सिंड्रोम के बारे में कैसे मालूम करें

डेड बट सिंड्रोम के बारे में कैसे मालूम करें

यदि आप डेड बट सिंड्रोम के लक्षणों का अनुभव करते हैं - खासकर वजन बढ़ाने वाले व्यायामों के दौरान, जैसे चलना या सीढ़ियाँ चढ़ना - अपने डॉक्टर को देखें। एक फिजियोथैरेपिस्‍ट या आर्थोपेडिस्ट भी आपके इन लक्षणों का मूल्यांकन करके जरूरत ट्रीटमेंट शुरु कर सकते हैं। इसके अलावा आपकी मेडिकल हिस्‍ट्री और लक्षणों के आधार पर इलाज बताया जाता है। ज्‍यादा गंभीर स्थिति होने पर एक्‍स-रे या एमआरआई करवाई जा सकती है।

ट्रीटमेंट

ट्रीटमेंट

कुछ शारीरिक गतिविधियों या व्‍यायाम के जरिए आप इस स्थिति से बच सकते हैं-

एक घंटे का अलार्म

एक घंटे का अलार्म

ज्यादा देर तक न बैठें। हर घंटे के लिए एक अलार्म सेट करें और अपने शरीर को हिलाने-ढ़लाने के लिए बार-बार उठें, अपने कमरे के अंदर टहलें, या दो से तीन मिनट के लिए कुछ स्ट्रेचिंग करें।

स्क्वाट

स्क्वाट

व्यक्तिगत ताकत और शरीर का लचीलेपन बनाएं रखने के ल‍िए संबंधित डॉक्टर की सलाह के बाद, शरीर के निचले हिस्से को सक्रिय रखने के लिए स्क्वाट कर सकते है।

स्ट्रेचिंग और मजबूती

स्ट्रेचिंग और मजबूती

कई व्यायाम पैटर्न में दो भाग होते हैं - हिप फ्लेक्सर्स को खींचना, और ग्लूटल, पेट और कोर की मांसपेशियों को मजबूत करना।

पेल्विक लिफ्ट्स

अपनी पीठ के बल लेटते हुए दोनों घुटनों को 90 डिग्री तक मोड़ें और फिर पेल्विक को ऊपर उठाएं और 30 सेकंड तक पकड़ कर रखें। यदि संभव हो तो एक पैर और पेल्विक को एक साथ उठाएं जबकि दूसरे घुटने को 90 डिग्री पर झुकाकर रखें। यह व्यायाम ग्‍लूटेल स्‍ट्रेंथ को बढ़ाती है।

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