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दिलीप कुमार को हुआ बाइलेटरल प्ल्यूरल इफ्यूजन, जानें इस बीमारी से जुड़ी हर बात
बॉलीवुड अभिनेता दिलीप कुमार (Dilip Kumar) की रविवार को तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। अभिनेता को सांस लेने में समस्या हो रही थी और उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है। डॉक्टरों की जांच में सामने आया है कि दिलीप कुमार को बाइलेटरल प्ल्यूरल इफ्यूजन (bilateral pleural effusion) हो गया है। आइए जानते है यह बीमारी और कैसे हैं इसके लक्षण-

फेफड़ों में जमा होने लगता है द्रव
मेडिकल की भाषा में प्लूरल इफ्यूजन एक ऐसी स्थिति है, जिसमें फेफड़ों के बाहर असामान्य मात्रा में द्रव यानी कि एक तरल इकट्ठा हो जाता है। ऐसे कई रोग हैं जिनमें यह समस्या हो सकती है। ऐसी स्थिति में फेफड़ों के आस-पास जमा हुऐ द्रव को निकालना पड़ता है। इसी स्थिति के अनुसार ही इस बीमारी का इलाज शुरू किया जाता है।

क्या है प्लूरा ?
प्लूरा एक पत्ली झिल्ली होती है, जो फेफड़ों और छाती की अंदरूनी परत के बीच होती है। जब किसी बीमारी के कारण तरल का इकट्ठा होना शुरू हो जाता है तो उसके बहाव से इस पतली झिल्ली यानी कि प्लूरा की परतों के बीच की खाली जगह में द्रव बनने लग जाता है।

इसे फुफ्फुसीय बहाव कहते हैं
सामान्य तौर पर प्लूरा की परतों के बीच की खाली जगह में एक चम्मच की मात्रा में द्रव होता है जो आपके सांस लेने के दौरान फेफड़ों को हिलने में मदद करता है।

ये हैं बीमारी के सामान्य लक्षण
फेफड़ों के बाहरी हिस्से में तरल जमा होने लगता है तो शुरुआत में किसी प्रकार के लक्षण पैदा नहीं होते हैं. लक्षण होते भी हैं तो यह धीरे-धीरे सामने आते हैं क्योंकि यह बहुत हल्के होते हैं।
तरल भरने के बाद प्लूरल इफ्यूजन होने पर जो लक्षण पैदा होते हैं, वे द्रव की मात्रा और यह कितनी तीव्रता से जमा हो रहा है आदि पर निर्भर करते हैं।
- सीने में दर्द महसूस होना
- सांस फूलना
- फेफड़ों की झिल्ली में अंदरूनी दर्द उठना
- खांसी आना और खांसी आने में भी दर्द होना
- इस स्थिति में बुखार भी आ जाता है।

प्ल्यूरल इफ्यूजन के कुछ सामान्य कारण
लंग इंफेक्शन , निमोनिया, ट्यूबरक्युलॉसिस या कैंसर की वजह से प्ल्यूरल इफ्यूजन हो सकता है। कंजेस्टिव हार्ट फेल्योर, लंग्स आर्टरीज में ब्लॉकेज होना या किडनी संबंधी बीमारी होने की स्थिति में भी इस बीमारी से परेशान हो सकते हैं। ऑटोइम्यून कंडीशन, कीमोथेरेपी के बाद भी bilateral pleural effusion होने की आशंका बढ़ जाती है।



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