Latest Updates
-
शाम 7 बजे के बाद गलती से भी मत करना ये 5 काम, बढ़ता है हार्ट अटैक का रिस्क -
बिना मारे चूहों को घर से भगाने का देसी तरीका! आटे में मिलाकर रख दें ये एक चीज, फिर कभी नहीं आएंगे नजर -
Pahadi Crispy Snack Singal Recipe: घर पर बनाएं उत्तराखंड का पारंपरिक और कुरकुरा स्वाद -
कौन हैं पंकज त्रिपाठी के भाई बिजेंद्र नाथ तिवारी? आखिर क्यों हुआ जानलेवा हमला, गंभीर हालत में AIIMS में भर्ती -
Swapna Shastra: सपने में किन्नर को देखना होता है शुभ और अशुभ संकेत? जानिए इसका मतलब -
Cooling Summer Lunch Curd Rice Recipe: गर्मियों में पेट को ठंडक देने वाली सबसे आसान रेसिपी -
काले धब्बों वाले प्याज खाना चाहिए या नहीं? सेहत पर क्या होगा असर, यहां जानें इसका सही जवाब -
Ambubachi Mela 2026: कामाख्या मंदिर में शुरू हुआ अंबुबाची मेला, 3 दिनों तक बंद रहेंगे कपाट, जानें इसका महत्व -
Soft Dahi Paratha Recipe: घर पर बनाएं एकदम नरम और स्वादिष्ट दही का पराठा -
Aaj Ka Rashifal 22 June 2026: सोमवार को इन 5 राशियों पर बरसेगी महादेव की कृपा, धन लाभ के प्रबल योग
दिलीप कुमार को हुआ बाइलेटरल प्ल्यूरल इफ्यूजन, जानें इस बीमारी से जुड़ी हर बात
बॉलीवुड अभिनेता दिलीप कुमार (Dilip Kumar) की रविवार को तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। अभिनेता को सांस लेने में समस्या हो रही थी और उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है। डॉक्टरों की जांच में सामने आया है कि दिलीप कुमार को बाइलेटरल प्ल्यूरल इफ्यूजन (bilateral pleural effusion) हो गया है। आइए जानते है यह बीमारी और कैसे हैं इसके लक्षण-

फेफड़ों में जमा होने लगता है द्रव
मेडिकल की भाषा में प्लूरल इफ्यूजन एक ऐसी स्थिति है, जिसमें फेफड़ों के बाहर असामान्य मात्रा में द्रव यानी कि एक तरल इकट्ठा हो जाता है। ऐसे कई रोग हैं जिनमें यह समस्या हो सकती है। ऐसी स्थिति में फेफड़ों के आस-पास जमा हुऐ द्रव को निकालना पड़ता है। इसी स्थिति के अनुसार ही इस बीमारी का इलाज शुरू किया जाता है।

क्या है प्लूरा ?
प्लूरा एक पत्ली झिल्ली होती है, जो फेफड़ों और छाती की अंदरूनी परत के बीच होती है। जब किसी बीमारी के कारण तरल का इकट्ठा होना शुरू हो जाता है तो उसके बहाव से इस पतली झिल्ली यानी कि प्लूरा की परतों के बीच की खाली जगह में द्रव बनने लग जाता है।

इसे फुफ्फुसीय बहाव कहते हैं
सामान्य तौर पर प्लूरा की परतों के बीच की खाली जगह में एक चम्मच की मात्रा में द्रव होता है जो आपके सांस लेने के दौरान फेफड़ों को हिलने में मदद करता है।

ये हैं बीमारी के सामान्य लक्षण
फेफड़ों के बाहरी हिस्से में तरल जमा होने लगता है तो शुरुआत में किसी प्रकार के लक्षण पैदा नहीं होते हैं. लक्षण होते भी हैं तो यह धीरे-धीरे सामने आते हैं क्योंकि यह बहुत हल्के होते हैं।
तरल भरने के बाद प्लूरल इफ्यूजन होने पर जो लक्षण पैदा होते हैं, वे द्रव की मात्रा और यह कितनी तीव्रता से जमा हो रहा है आदि पर निर्भर करते हैं।
- सीने में दर्द महसूस होना
- सांस फूलना
- फेफड़ों की झिल्ली में अंदरूनी दर्द उठना
- खांसी आना और खांसी आने में भी दर्द होना
- इस स्थिति में बुखार भी आ जाता है।

प्ल्यूरल इफ्यूजन के कुछ सामान्य कारण
लंग इंफेक्शन , निमोनिया, ट्यूबरक्युलॉसिस या कैंसर की वजह से प्ल्यूरल इफ्यूजन हो सकता है। कंजेस्टिव हार्ट फेल्योर, लंग्स आर्टरीज में ब्लॉकेज होना या किडनी संबंधी बीमारी होने की स्थिति में भी इस बीमारी से परेशान हो सकते हैं। ऑटोइम्यून कंडीशन, कीमोथेरेपी के बाद भी bilateral pleural effusion होने की आशंका बढ़ जाती है।



Click it and Unblock the Notifications