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कहीं आप मिलावटी रंग की हल्दी तो नहीं खा रहे हैं, FSSAI ने शेयर किया चैक करने का तरीका
आजकल, यह पता लगाना बहुत मुश्किल है कि किसी खाद्य उत्पाद में अतिरिक्त रंग, बनावट या आर्टिफिशियल स्वाद है या नहीं। जिन खाद्य पदार्थों में कुछ भी आर्टिफिशियल होता है, उन्हें सेहत के लिहाज से हानिकारक माना जाता है।
जैसे, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने यह पता लगाने के लिए एक साधारण सा टेस्ट शेयर किया है जिससे मालूम किया जा सकता है कि क्या हल्दी - जो कई भारतीय रसोई में मुख्य मसाले के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है, जिसके बिना एक औसत भारतीय भोजन तैयार करना अधूरा है- उसमें कोई अतिरिक्त या आर्टिफिशियल रंग की मिलावट तो नहीं है।

ट्विटर पर शेयर किए गए एक वीडियो में, इस टेस्ट के बारे में बताया
- दो गिलास पानी लें और उसमें थोड़ी सी हल्दी मिला लें।
- आप देखेंगे कि बिना मिलावट वाला नमूना हल्का पीला हो जाएगा, जिसमें हल्दी सबसे नीचे बैठ जाएगी।
- वहीं दूसरी ओर मिलावटी हल्दी वाले घोल का रंग मजबूत, चमकीले पीले रंग में बदल जाएगा।
न्यूज मेडिकल के अनुसार, हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-कार्सिनोजेनिक गुण होते हैं, एक अध्ययन से पता चलता है कि बांग्लादेश में उगाई जाने वाली हल्दी में सामान्य स्तर से 500 गुना अधिक जहरीली भारी धातु मिली होती है। इस स्टडी में बतया गया है कि हल्दी उगाने वाले नौ जिलों में से सात जिलों में एक जहरीले चमकीले पीले रंग के लेड युक्त यौगिक के साथ मिलावटी हल्दी का उत्पादन होता है, जिसे 'क्रोमेट' के रूप में जाना जाता है।
ये अध्ययन 17 सितंबर, 2019 को पर्यावरण अनुसंधान पत्रिका में प्रकाशित हुआ था, और इसके अनुसार, सीसा सबसे अधिक जहरीला होता है, जो तंत्रिका कोशिकाओं को प्रभावित करता है। इसके अतिरिक्त, सीसा की खपत के लिए कोई सुरक्षित सीमा नहीं है।
हाल ही में, FSSAI ने मिलवाटी हरे रंग की सब्जियों के बारे में पता करने के लिए कुछ टिप्स शेयर किए थे।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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