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शरीर को बीमारी से बचाने वाले ग्लूटाथियोन के बारे में कितना जानते हैं आप?
जब शरीर के लिए महत्वपूर्ण पोषक तत्वों की बात होती है, तो अक्सर लोग कैल्शियम या प्रोटीन का ही नाम लेते हैं। लेकिन बेहतर स्वास्थ्य के लिए एंटीऑक्सिडेंट्स भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं। यह ना केवल शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं, बल्कि आंखों से लेकर हद्य तक शरीर के हर अंग के लिए आवश्यक होते हैं। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण एंटीऑक्सीडेंट है ग्लूटाथियोन। इसे सभी एंटी-ऑक्सीडेंट की मां के रूप में भी जाना जाता है। हाल ही में 14 बार एनवाईटी बेस्टसेलर, एक फैमिली फिजिशियन और फंक्शनल मेडिसिन के क्षेत्र में इंटरनेशनल लीडर के रूप में पहचाने जाने वाले डॉ मार्क हाइमन ने इसके महत्व व शरीर में इसकी मात्रा बढ़ाने के तरीकों पर बात की। उन्होंने अपनी इंस्टा पोस्ट के जरिए यह जानकारी साझा की। तो चलिए विस्तारपूर्वक जानते हैं मार्क हाइमन ने क्या कहा-

शरीर को करता है प्रोटेक्ट
अपने हालिया इंस्टाग्राम पोस्ट में, डॉ हाइमन ने ग्लूटाथियोन को “हमारी लाइन ऑफ डिफेंस का एक महत्वपूर्ण सैनिक“ कहा। वह बताते हैं कि हमारे शरीर द्वारा ग्लूटाथियोन बनाया जा सकता है। इसके अलावा, हमारे पास एक मैकेनिज्म भी हैं जो इसे रीसायकल और रियूज करता है। लेकिन जब शरीर में टॉक्सिसिटी लेवल बढ़ जाता है, तो इससे शरीर में ग्लूटाथियोन कम बनता है। ऐसे में कुछ तरीके अपनाने की जरूरत होती है, जिसकी मदद से एक बार फिर से ग्लूटाथियोन के लेवल को बढ़ाया जा सके। उन्होंने इसके लिए कुछ सुझाव दिए हैं-
सल्फर रिच फूड्स का करें सेवन
हाइमन बताते हैं कि व्यक्ति को कुछ खास तरह की सब्जियों जैसे ब्रसेल्स स्प्राउट्स, ब्रोकली, फूलगोभी, शलजम, पत्ता गोभी आदि को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। इसके अलावा, री पत्तेदार सब्जियां जैसे केल, कोलार्ड ग्रीन्स, वॉटरक्रेस, बोक चॉय भी खानी चाहिए। व्यक्ति को प्याज, लहसुन, शैलॉट व लीक जैसी “एलियम सब्जियों को भी अवश्य खाना चाहिए।
सब्जियों को क्रश करें या काट लें
डॉ हाइमन के अनुसार, यह ग्लूकोसाइनोलेट्स को सक्रिय करने में मदद करेगा। ग्लूकोसाइनोलेट्स बायोएक्टिव मॉलिक्यूल्स होते हैं, जो ग्लूटाथियोन एंजाइम गतिविधि की एक्टिविटी को बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि इसका अधिकतम लाभ उठाने के लिए वेजिटेबल्स को स्टीम करें या फिर उसे कच्चा भी खाया जा सकता है।
सेलेनियम रिच फूड्स का करें सेवन
ब्राजील नट्स, ग्रास फीड बीफ जैसे खाद्य पदार्थ जो सेलेनियम को बढ़ाते हैं जो ग्लूटाथियोन पेरोक्साइड को पावर देने के लिए आवश्यक है। एक एंजाइम जो कोशिका के अंदर से फ्री रेडिकल्स को रिमूव करता है। इसलिए सेलेनियम रिच फूड्स को अपनी डाइट का हिस्सा बनाएं।
खाद्य पदार्थ जिनमें विटामिन बी होता है
अंडे, चिकन, वाइल्ड सॉल्मन और पत्तेदार साग आदि में विटामिन बी की मात्रा अधिक होती है। ऐसे फूड आइटम्स को डाइट में शामिल करने से ग्लूटाथियोन को प्रोड्यूस करने व उसे रिसाइकल करने में मदद मिलती है।
विटामिन सी और ई
विटामिन सी और ई भी ग्लूटाथियोन की मात्रा को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। आप विटामिन सी और ई का सेवन क्रमशः पत्तेदार साग, खट्टे फल, कीवी और नट्स, सीड्स और एवोकाडो के जरिए कर सकते हैं।
सिस्टीन
सिस्टीन एक रेट लिमिटिंग अमीनो एसिड होते हैं, जो ग्लूटाथियोन बनाने के लिए आवश्यक हैं। आप टर्की, अंडे, घास से बने डेयरी उत्पादों और सूरजमुखी के बीज का सेवन करके अपनी डाइट में सिस्टीन को एड कर सकते हैं।
खाद्य पदार्थ जिनमें अल्फा-लिपोइक एसिड होता है
ग्लूटाथियोन की तरह, अल्फा-लिपोइक एसिड (एएलए) शरीर द्वारा बनाया गया एक एंटीऑक्सिडेंट है। यह विटामिन सी और ई की रिसाइकलिंग के अलावा, ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म में मदद करता है, नर्वस सिस्टम को सपोर्ट करता है और ओवर ऑल लिवर फंक्शन में मदद करता है। यह अल्फा-लिपोइक एसिड (एएलए) ऑर्गन मीट, ब्रोकली, टमाटर और ब्रसेल्स स्प्राउट्स में पाया जा सकता है।
करें एक्सरसाइज
अपने आहार पर ध्यान देने के अलावा, ग्लूटाथियोन को व्यायाम के माध्यम से भी प्राप्त किया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए सही तरह से व्यायाम करना आवश्यक है। डॉ हाइमन ने सलाह दी, “धीमी गति से शुरू करें और रोजाना 30 मिनट तक अपना व्यायाम करें। सप्ताह में तीन बार 20 मिनट की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के साथ-साथ ब्रिस्क वॉक व टहलना कार्डियो के लिए बहुत अच्छा है। उन्होंने इसे ज़्यादा न करने की भी चेतावनी दी क्योंकि इसका “उल्टा प्रभाव“ हो सकता है।
अच्छी गुणवत्ता वाली नींद
अंत में, उन्होंने अच्छी गुणवत्ता वाली नींद पर जोर दिया क्योंकि “नींद की कमी ग्लूटाथियोन के स्तर को कम करती है।“
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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