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कॉन्डोम का इस्तेमाल करने के बावजूद भी हो सकते हैं STD या STI के शिकार
एसटीडी यानी कि सैक्शुअली ट्रांस्मिटिड डिजीज और एसटीआई मतलब सैक्शुअली ट्रांस्मिटिड इंफेक्शंस, कॉन्डोम इन से बचने का 100 प्रतिशत असरदार तरीका नहीं है। यानी कि अगर शारीरिक संबंध बनाते समय कॉन्डोम का इस्तेमाल किया भी है तब भी संभावना है कि आप एसटीडी या एसटीआई के शिकार हो सकते हैं।

हम किस कॉन्डोम की बात कर रहे हैं
बाजार में दो तरह के कॉन्डोम उपलब्ध हैं - एक्सटर्नल और इन्टर्नल। एक्सटर्नल कॉन्डोम पुरुष इस्तेमाल करते हैं जबकि इन्टर्नल कॉन्डोम महिलाओं के लिए होता है। हम इस पूरे आर्टिकल में एक्सटर्नल कॉन्डोम की बात कर रहे हैं। यह कॉन्डोम आमतौर पर लेटेक्स, पोलीयुरेथीन या पोनीइसोप्रीन के बने होते हैं।

ऐसे हो सकते हैं इंफेक्टिड
एसटीआई या तो स्किन के संपर्क में आने से या फिर बॉडिली फ्लूइड के जरिए फैलते हैं। सही तरीके से कॉन्डोम पहनने के बावजूद पुरुष के जेटिल का कुछ हिस्सा कवर नहीं होता और इस हिस्से के संपर्क में आने से एसटीआई हो सकता है। ऐसा अक्सर होता है कि लोग या तो सही समय पर कॉन्डोम नहीं पहनते या फिर उसे तरीके से नहीं पहनते या उतारते समय कोताही करते हैं। ऐसे में कॉन्डोम की सुरक्षा 85 फीसदी तक रह जाती है।

ऐसे बढ़ाएं कॉन्डोम की एफिशिएंसी
- अपने नाप के हिसाब से कॉन्डोम चुने। अगर कॉन्डोम लूज होगा तो यह फिसल सकता है और अगर ज्यादा टाइट होगा तो यह फट सकता है।
- कॉन्डोम को ठंडी व सूखी जगह पर रखें। कभी भी कॉन्डोम को वॉलेट में न रखें, यहां सबसे ज्यादा फ्रिक्शन व हीट होती है। इससे कॉन्डोम पंक्चर हो सकता है।
- कॉन्डोम पर भी एक्सपायरी डेट लिखी होती है, इसे इस्तेमाल करने पहले यह जरूर जांच लें।
- पैकेट को दांत से न फाड़ें, ऐसा करने से कॉन्डोम पंक्चर हो सकता है।
- सही समय पर कॉन्डोम पहनना जरूरी है। किसी भी तरह के टच से पहले कॉन्डोम पहने।

ऐसे घटाएं एसटीआई का खतरा
इसके लिए सबसे पहले अपना मौजूदा एसटीआई स्टेटस जानना बेहद जरूरी है। आपको पता होना चाहिए कि आप वर्तमान में सुरक्षित हैं या नहीं। इसके लिए आप एनल व ओरल एसटीआई टेस्ट करवा सकते हैं। साल में एक बार यह टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। इसके अलावा अपने पार्टनर से उनके एसटीआई स्टेटस के बारे में बात करें।

क्या करें अगर टेस्ट पॉजिटिव आए?
अगर आपको एसटीआई हो गया है तो घबराएं नहीं, इसके लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर आपको एंटीबायोटिक्स देंगे जिससे थोड़े ही समय में आपका एसटीआई क्योर हो जाएगा। हो सकता है डॉक्टर आपको कुछ समय के लिए शारीरिक संबंध बनाने से मना करें, लेकिन यकीन मानिए यह आपके व आपके पार्टनर के भले के लिए ही है।

त्वचा से त्वचा के संपर्क से फैलने वाले यौन संचारित रोग
- एचपीवी
- हर्पीज सिंप्लेक्स वायरस (HSV)
- ट्राइकोमोनिएसिस
- HIV
- सिफलिस
- मोलस्कम कॉन्टैगिओसम (Molluscum Contagiosum)
- एचपीवी
- एचएसवी
- ट्राइकोमोनिएसिस
- HIV
- क्लैमाइडिया
- गोनेरिया
- हेपेटाइटिस बी

शारीरिक तरल पदार्थों के माध्यम से फैलने वाले यौन संचारित रोग

निष्कर्ष
कॉन्डोम एसटीआई ट्रांसमिशन में काफी हद तक कारगार हैं लेकिन यह 100 प्रतिशत आपको सुरक्षा प्रदान नहीं करते। इसके लिए आपको एतिहात रखना जरूरी है। ऐसा नहीं है कि जिसे एसटीआई हो आप उसके साथ संबंध नहीं बना सकते, लेकिन आपके लिए उसका स्टेटस जानना जरूरी है, ताकि आप खुद को महफूज रख सकें।
क्लैमाइडिया और गोनोरिया जैसे अधिकांश एसटीआई से बचाने में कॉन्डोम 98% प्रभावी है। हालांकि, कॉन्डोम आपको हर्पीज, जेनेटाइल वार्ट और सिफलिस जैसे सभी एसटीआई से नहीं बचाता है जो त्वचा से त्वचा के संपर्क की वजह से फैलता है।
किसी भी प्रकार का कॉन्डोम गर्भावस्था या यौन संचारित रोगों (एसटीडी) को 100% रोकने में प्रभावी नहीं है, ये सिर्फ एक मिथ है कि कॉन्डोम अनचाही प्रेगनेंसी और एसटीडी से आपको बचाता है। गर्भ निरोधक के लिए ज्यादात्तर कपल्स गर्भनिरोधक गोलियां या आईयूडी के साथ कॉन्डोम का उपयोग करते हैं।
हालांकि किस करना सेक्स और ओरल सेक्स की तुलना में कम जोखिम माना जाता है, किस करने से सीएमवी, हर्प्स, और सिफलिस जैसे रोग संचारित होते है। सीएमवी लार में मौजूद हो सकता है, इसके अलावा हर्प्स, और सिफलिस जैसे रोग त्वचा से त्वचा के संपर्क के माध्यम से संचारित होते है। खासकर ऐसे समय में जब त्वचा पर कोई घाव मौजूद होते हैं।



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