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मानसून: अस्थमा मरीजों को ये छोटी-छोटी गलती पड़ सकती है भारी, जानें बचाव के आसान तरीके
मानसून में अस्थमा और सांस संबंधी से पीड़ित लोगों को थोड़ा सतर्क रहना चाहिए। कुछ अस्थमा रोगियों को यह लगता है कि महज धूल मिट्टी के संपर्क में आने मात्र से ही अस्थमा का खतरा बढ़ता है। जबकि आपकी ये एक छोटी सी भूल आपको मानसून के मौम में खतरे में डाल सकती है। इसीलिए आज हम आपको कुछ ऐसी टिप्स बता रहे हैं जिन्हें फॉलो कर अस्थमा रोगी मानसून में खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।

मानसून और अस्थमा- इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है तपती गर्मी और पसीने के बाद जब मानसून की बारिश होती है तो वातावरण में चार चांद लग जाते हैं। लेकिन मीठी छूरी जैसा दिखने वाला मानसून का मौसम कई मायनों में खतरनाक भी होता है। तमाम तरह के संक्रमण के साथ ही यह मौसम अस्थमा रोगियों के लिए प्रतिकूल होता है। अस्थमा और श्वास संबंधी अन्य एलर्जी से पीड़ित लोगों को इस मौसम का आनंद लेने वक्त थोड़ा सतर्क रहना चाहिए। कुछ अस्थमा रोगियों को यह लगता है कि महज धूल मिट्टी के संपर्क में आने मात्र से ही अस्थमा का खतरा बढ़ता है। जबकि आपकी ये एक छोटी सी भूल आपको मानसून के मौसम में खतरे में डाल सकती है। इसीलिए आज हम आपको कुछ ऐसी टिप्स बता रहे है जिन्हें फॉलो कर अस्थमा रोगी मानसून में खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।

पालतू जानवरों से रहें दूर-
ऐसे घरों में जाने से बचें जो पालतू जानवर पालते हैं। यदि आपके खुद के पास कुत्ता या बिल्ली जैसे पालतू जानवर हैं तो उनसे दूर रहें। क्योंकि पशु डैंडर (पालतू बाल) वैक्यूम करने के बाद भी नहीं मिटते हैं। यह अस्थमा रोगियों में सांस संबंधी परेशानी या एलर्जी का कारण बन सकते हैं।

कमरे में रखें पौधें-
यदि आप एक प्लांट लवर हैं और आपके बेडरूम में कई तरह के पौधें है तो मानसून के मौसम में इन्हें अपने कमरे से बाहर कर दें। शोध बताते हैं कि मानसून हवा में पराग कणों की उपस्थिति बढ़ जाती है। इसके अलावा, चूंकि पराग के दाने अस्थमा के हमलों को और अधिक सक्रिय कर सकते हैं। इसलिए बेहतर होगा कि इस मौसम में अपने रूम से पौधों को बाहर करने के साथ ही गार्डन, पार्क या किसी जंगल में जाने से बचें।

घर के दरवाजे और खिड़कियां बंद रखें
मानसून के मौसम में कई तरह के संक्रमण और वायरस घूमते हैं जो हवा के माध्यम से आपके शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। इसलिए, ऐसे समय में अपने घर के दरवाजों और खिड़कियों को बंद रखें। खासकर उन जगहों पर जहां पानी भारी मात्रा में होता है जैसे कि किचन, वॉश एरिया या बाथरूम। ऐसा करने से वातावरण में नमी के संचार को कम करने में मदद मिलेगी साथ ही क्रॉस-वेंट लेशन भी अच्छी तरह से हो पाएगा। ऐसे समय में जितना हो सके बाहर जाते वक्त मास्क का प्रयोग करें।

दीवारों की नमी को रोकें
बरसात के दिनों में, भारी बारिश के चलते दीवारों में सीलन या नमी होना आम बात हो जाती है। इसलिए, यह महत्वपूर्ण है कि आप अपनी दीवारों पर कुछ ऐसा इंतजाम करें जिससे सीलन को रोका जा सके। क्योंकि दीवारों की नमी अस्थमा के लक्षणों को बढ़ा सकती है। इसके अलावा, इससे कई अन्य तरह की श्वसन समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। यदि संभव हो तो दीवारों पर नम-प्रूफ करा लें। आप दीवारों पर एंटी-मॉइस्चर या एंटी-मोल्ड ब्लीच का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, यदि आप घर के भीतर के वातावरण को नियंत्रित करने के लिए एक अच्छे डीह्यूमिडिफ़ायर या एयर प्यूरीफायर को अफोर्ड कर पाएं तो यह भी एक बेहतर विकल्प होगा।



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