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सवाल: जानें कब खत्म कर सकते है कोरोना से ठीक हुए मरीज होम आइसोलेशन, कितने दिनों बाद लोगों से मिल सकते है
देशभर में आई कोरोना की दूसरी लहर में लाखों में संक्रमण के मामले सामने आ रहे है। इस संक्रमण से उबरने के लिए ज्यादात्तर लोग घर में ही रहकर बचाव कर रहे हैं। जिन लोगों को न तो ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है और न ही हॉस्पिटल में भर्ती करने की। पर फिर भी जो लोग घरों में अलग रहकर यानी होम आइसोलेशन में इलाज करवा रहे हैं, उनके सामने कई सवाल रहते हैं। सबसे बड़ा सवाल तो यह रहता है कि आखिर उनका होम आइसोलेशन कब खत्म होगा?
आइए जानते है होम आइसोलेशन से जुड़े जरुरी सवाल।

क्या है होम आइसोलेशन, किसे दी जाती है इसकी सलाह
अगर किसी मरीज में कोरोनावायरस संक्रमण का कोई लक्षण नजर आता है या वह किसी कोरोनावायरस संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आता है तो उसे जांच की सलाह दी जाती है। जब तक जांच के नतीजे नहीं आते, तब तक उस व्यक्ति को घर में सबसे अलग यानी आइसोलेशन में रहने की सलाह दी जाती है। नतीजे आने पर अगर वह कोरोनावायरस पॉजिटिव निकलता है तो लक्षणों के आधार पर डॉक्टर उसका इलाज करते हैं।

कब खत्म होना चाहिए होम आइसोलेशन
आम तौर पर मरीजों को 14 से 17 दिन होम आइसोलेशन में रहने की सलाह दी जाती है। पर यह सब लक्षणों की प्रकृति और उनकी गंभीरता से तय होता है। फिर भी मानकर चलिए कि लक्षणों के दिखने पर कम से कम 14 दिन तक आइसोलेट रहना ही है।
जिन लोगों में संक्रमण के कोई लक्षण न हों, उनका होम आइसोलेशन वायरस के लिए जांच में पॉजिटिव आने के 10 दिन बाद खत्म हो सकता है। बेहतर होगा आपका इलाज कर रहे डॉक्टर या फिजिशियन से पूछकर आप तय करें कि आइसोलेशन खत्म कब करना है।
अगर मरीज को तीन दिन से बुखार नहीं आया है तो अगले 7 दिन में आप आइसोलेशन खत्म कर सकते हैं। धीरे-धीरे लक्षण खत्म होने लगते हैं और जब पूरी तरह खत्म हो जाते हैं तब भी कुछ दिन आइसोलेशन में रहने की सलाह दी जाती है।

आइसोलेशन खत्म करने के लिए जरुरत पड़ती है निगेटिव RT-PCR रिपोर्ट की?
- वैसे पहले परिस्थितियों में 24 घंटे के अंतर से दो RT-PCR रिपोर्ट निगेटिव आने पर होम आइसोलेशन खत्म करने को कहा जाता है। पर जिस तेजी से केस बढ़ रहे हैं और जांच करने वाली लैबोरेटरीज पर दबाव बढ़ रहा है, मरीज 14 दिन बाद बिना टेस्ट के भी आइसोलेशन खत्म कर सकता है।
- होम आइसोलेशन का पीरियड 14 दिन होना चाहिए क्योंकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि वायरस की साइकल इतने दिन में पूरी हो जाती है और वह मर जाता है। एम्स-दिल्ली के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया के मुताबिक यह वैज्ञानिक तरीके से साबित हो चुका है कि हल्के या मामूली लक्षणों की स्थिति में वायरस छह से सात दिन में खुद-ब-खुद मर जाता है।
- अगर RT-PCR टेस्ट कराया तो मृत वायरस की वजह से रिपोर्ट पॉजिटिव आ सकती है। भले ही शरीर में वायरस की डेडबॉडी हो, पर टेस्ट तो पॉजिटिव बताता है। पर उससे किसी और को इन्फेक्ट करने या वायरस ट्रांसमिशन का खतरा बिल्कुल भी नहीं रहता है।
- जिन लोगों की इम्युनिटी कमजोर है, उन्हें डॉक्टर आम तौर पर निर्धारित आइसोलेशन अवधि से ज्यादा आइसोलेशन में रहने को कह सकते हैं। उन्हें दोबारा टेस्टिंग के लिए भी कहा जा सकता है।

कोरोना पॉजिटिव मरीज लोगों के बीच कब जा सकता है?
अगर कोई लक्षण नहीं बचा है तो व्यक्ति शुरुआती लक्षणों के 14-17 दिन में काम पर लौट सकता है। पर यह देखना जरूरी है कि वह अपने काम कर पा रहा है या नहीं। अक्सर लोग पूरी तरह रिकवर नहीं हो पाते और रोजमर्रा के काम में लौट आते हैं। इससे उनकी रिकवरी प्रभावित होती है। पूरी तरह से ठीक होने में अतिरिक्त समय लगता है। आइसोलेशन पीरियड खत्म होने के बाद वह अन्य लोगों में जा सकता है। पर उसे कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करना होता है।

घर में कोई कोरोना इन्फेक्टेड व्यक्ति है तो क्या करें?
होम आइसोलेशन में इलाज करा रहे मरीज की देखभाल करने वाले को कई बातों का ध्यान रखना जरूरी है। वे जब भी इन्फेक्टेड व्यक्ति से जुड़ा कोई काम करें तो अतिरिक्त सावधानी बरतें। मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग, सैनिटाइजर का इस्तेमाल और अन्य प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करें। अगर किसी भी तरह का लक्षण नजर आता है तो तत्काल आइसोलेट कर लें। बाकी लोगों से मिले-जुले नहीं। जांच कराएं और अगर पॉजिटिव आते हैं तो डॉक्टर की सलाह से पूरे प्रोटोकॉल का पालन करें।

होम आइसोलेशन में रखें इन बातों का ध्यान
आइसोलेशन में रहने वाले मरीज और उसकी देखभाल करने वाले को यह सुनिश्चित करना होगा कि आसपास साफ-सफाई रहे। डिसइंफेक्शन और सैनिटेशन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मरीज को ऐसा आहार लेना है, जिसमें प्रोटीन अधिक हो। यह वायरस से लड़ने और जल्द से जल्द रिकवर होने में मदद करता है।



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