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क्या आप जानते हैं बच्चा गर्भ में रहते हुए भी कर सकता है पॉटी, ये है वजह
बच्चे को कंसीव करने से लेकर उसे दुनिया में लाने तक का सफर रोलर कोस्टर की सवारी की तरह होता है। क्यूंकि उसमें कई सारे उतार-चढ़ाव आते है। खासकर वर्तमान में लाइफस्टाइल में जो बदलाव आया है, उस वजह से बच्चे को जन्म देने से पहले मांओं को कई तरह की समस्याओं से गुजरना पड़ता है। इसी में से एक है बच्चे का गर्भ के अंदर पॉटी कर देना। जो कई बार मां और बच्चे के लिए घातक साबित हो सकता है।

एक रिसर्च के अनुसार, 12 से 20 प्रतिशत बच्चे गर्भाशय में मलत्याग करते हैं। जब बच्चे के जन्म की तारीख निकल जाती है, तो यह संख्या लगभग 40 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। जबकि समय से पहले जन्मे बच्चों के साथ इस तरह की परेशानी बहुत कम होती है। यहां हम आपको बच्चे के गर्भ में पॉटी करने का कारण और इसके ट्रीटमेंट के बारे में बताने जा रहे है।
क्या है इसका कारण
दरअसल, जब बच्चे गर्भ में होते हैं तो वे प्लेसेंटा यानि नाल के जरिए न्यूट्रीशंस को एब्जॉर्ब करते हैं। अपशिष्ट आमतौर पर यूरिन के रूप में उनके शरीर से बाहर निकल जाता है, लेकिन बच्चे कभी-कभी जन्म लेने से पहले पॉटी कर देते हैं। ये गंभीर चिंता का विषय तब बन सकता है जब वे इस अपशिष्ट पदार्थ को सांस के साथ अंदर लेते हैं, जिससे निमोनिया, फेफड़ों की समस्याएं या सांस लेने की समस्या हो सकती है।
बच्चे गर्भ में पॉटी क्यों करते हैं?
बच्चा जन्म के बाद जो पॉटी करता है वो काला या गहरा हरा, गाढ़ा, चिपचिपा पदार्थ होता है जो लगभग टार जैसा होता है। ये आंतों की कोशिकाओं, लैनुगो (कुछ शिशुओं के साथ पैदा होने वाले घने बाल), बलगम, एमनियोटिक, पित्त और पानी से बना होता है। अधिकांश समय, बच्चे अपने जीवन के पहले दिन इस मेकोनियम को बाहर निकाल देते हैं। लेकिन ये कभी-कभी तब बाहर आ सकता है जब वे गर्भ के अंदर होते हैं, जहां यह एमनियोटिक फ्लूइड के साथ मिल जाता है। इसके अलावा कुछ कारक है जो इस जोखिम को बढ़ाते है। जैसे कि-
- अपर्याप्त ब्लड या ऑक्सीजन लेवल
- प्लेसेंटा या गर्भनाल से जुड़ी समस्याएं
- जन्म देने की नियत तिथि से आगे जाना
- हाई बीपी, डायबिटीज या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं
- गर्भावस्था के दौरान स्मोक करना
- खराब इंटरायूट्रिन ग्रोथ
किस तरह की स्थिति बन सकती है
मेकोनियम वास्तव में काफी साफ होता है; एक्सपर्ट कहते हैं, इसमें अधिकतर पानी होता है और इससे गर्भाशय में इंफेक्शन नहीं होता है। यानि कह सकते है कि गर्भ में पॉटी करने के कोई नैगेटिव इंपेक्ट नहीं होते। लेकिल इसमें 4 से 10 प्रतिशत में कहीं भी मेकोनियम एस्पिरेशन सिंड्रोम (एमएएस) डवलप हो सकता है। ये स्थिति तब होती है कि जब डिलीवरी से पहले, दौरान या बाद में ज़ोरदार हांफने से मल फेफड़ों में चला जाता है। इससे सांस लेने में दिक्कत और फेफड़ों में सूजन जैसी समस्याएं हो सकती है। और गंभीर स्थिति में निमोनिया और अन्य रेस्पिरेट्री कंडीशन का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में डॉक्टरों को मेकोनियम एस्पिरेशन सिंड्रोम के लक्षणों को पहचानने के लिए ट्रेनिंग दी जाती है, ताकि वे डिलीवरी के बाद चेस्ट एक्स-रे कर आगे का डाइग्नोस कर सकें।
मेकोनियम एस्पिरेशन सिंड्रोम का इलाज
गर्भ में मल के लिए हमेशा उपचार की आवश्यकता नहीं होती है, खासकर अगर बच्चे की एक्टिविटीज में कोई बदलाव नहीं महसूस हो रहा हो। हालांकि, अगर किसी नवजात शिशु में मेकोनियम एस्पिरेशन सिंड्रोम है, तो डॉक्टर दूषित तरल पदार्थ को निकालने के लिए तुरंत उसके मुंह और नाक को सक्सन करेंगे। जो बच्चे सांस लेने में असमर्थ, फ्लॉपी या हार्ट संबंधी समस्याओं के साथ पैदा होते हैं, उन्हें तब तक सक्शन किया जाता है जब तक कि वे स्वस्थ न हो जाए।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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