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पेरिमेनोपॉज क्या होता है? जानें इसके लक्षण और मैनेज करने तरीका
What Is Perimenopause: मेनोपॉज महिलाओं में होने वाली एक नेचुरल प्रक्रिया है, जिसमें पीरियड्स लगातार 12 महीने तक नहीं आते हैं। इसके बाद, महिला के पीरियड्स आने पूरी तरह से बंद हो जाते हैं। लेकिन इससे पहले एक महिला का शरीर एक बदलाव के दौर से गुजरता है जिसे पेरिमेनोपॉज (Perimenopause) कहा जाता है।
यह एक ट्रांज़िशनल फेज़ यानी परिवर्तन का समय होता है, जो आमतौर पर 40 साल की उम्र के आसपास शुरू होता है। इस दौरान शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं, जो मूड, नींद, ऊर्जा, और पीरियड्स पर असर डाल सकते हैं। तो आइए, डॉ विद्या वी भट्ट, मेडिकल डायरेक्टर, राधाकृष्ण मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, बेंगलुरु से समझते हैं कि पेरिमेनोपॉज क्या होता है और इसके क्या लक्षण हैं (What is Perimenopause and its Symptoms in Hindi)?

पेरिमेनोपॉज क्या है?
पेरिमेनोपॉज वह समय होता है, जब महिला के अंडाशय धीरे-धीरे एस्ट्रोजन हार्मोन बनाना कम कर देते हैं। यह हार्मोन महिलाओं के मासिक चक्र और प्रजनन स्वास्थ्य को नियंत्रित करता है। यह आमतौर पर 40 की उम्र के आसपास शुरू होता है, लेकिन कुछ महिलाओं में यह पहले या बाद में भी हो सकता है। यह प्रक्रिया कुछ सालों तक चल सकती है और आखिर में मेनोपॉज पर जाकर खत्म होती है।
पेरिमेनोपॉज के शुरुआती संकेत
मासिक धर्म में अनियमितता: पीरियड्स का समय और फ्लो बदल सकता है, कभी ज्यादा, कभी बहुत कम।
हॉट फ्लैशेस और नाइट स्वेट्स: अचानक शरीर में गर्मी महसूस होना और पसीना आना।
नींद में परेशानी: रात में बार-बार नींद टूटना या नींद न आना।
वजाइना में सूखापन: हार्मोन में कमी के कारण असहजता या दर्द महसूस होना।
सेक्स ड्राइव में कमी: एस्ट्रोजन लेवल घटने से इच्छाशक्ति कम हो सकती है।
हड्डियों और दिल पर असर: एस्ट्रोजन घटने से हड्डियां कमजोर और हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ता है।
पेरिमेनोपॉज के दौरान खुद की देखभाल कैसे करें?
संतुलित आहार लें
हरी सब्जियां, फल, दूध, दही, प्रोटीन और कैल्शियम से भरपूर भोजन खाएं। जंक फूड, ज्यादा शक्कर और तले हुए खाने से परहेज करें।
व्यायाम और योग करें
रोजाना 30 मिनट हल्की वॉक, योग या स्ट्रेचिंग करें। इससे ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है और मूड भी अच्छा रहता है।
अच्छी नींद लें
एक ही समय पर सोएं और उठें। सोने से पहले स्क्रीन (मोबाइल, टीवी) से दूरी रखें।
तनाव कम करें
तनाव कम करने के लिए ध्यान, प्राणायाम या गहरी सांस लेने की तकनीक अपनाएं।
धूम्रपान और शराब से बचें
ये आदतें हार्मोनल असंतुलन को बढ़ा सकती हैं और हड्डियों को कमजोर करती हैं।
नियमित जांच कराएं
ब्लड प्रेशर, शुगर, कोलेस्ट्रॉल और बोन डेंसिटी की जांच करवाना ज़रूरी है।
हार्मोन थेरेपी कब जरूरी होती है?
पेरिमेनोपॉज के दौरान कुछ महिलाओं में लक्षण इतने गंभीर होते हैं कि उनका रोजमर्रा का जीवन प्रभावित होने लगता है, जैसे लगातार हॉट फ्लैशेस, नींद न आना, या वेजाइनल ड्राईनेस। ऐसे मामलों में, डॉक्टर हार्मोन थेरेपी की सलाह दे सकते हैं। इसमें शरीर में घट रहे एस्ट्रोजन (कभी-कभी प्रोजेस्टेरोन के साथ) को बाहरी रूप से दिया जाता है, ताकि हार्मोन का संतुलन बना रहे।
कब दी जाती है हार्मोन थेरेपी?
अगर हॉट फ्लैशेस बहुत तीव्र हों
वजाइनल सूखापन और दर्द ज्यादा हो
नींद और मूड पर गंभीर असर पड़ रहा हो
हड्डियों के कमजोर होने का खतरा बढ़ रहा हो
हार्मोन थेरेपी के प्रकार
सिस्टेमिक थेरेपी: टैबलेट, पैच या जेल के रूप में - पूरे शरीर के लक्षणों में असरदार।
लो-डोज वजाइनल एस्ट्रोजन: खासतौर पर वजाइनल सूखापन के लिए।
लेकिन यह हर महिला के लिए उपयुक्त नहीं होती। डॉक्टर आपकी मेडिकल हिस्ट्री, उम्र और लक्षणों के आधार पर थेरेपी तय करते हैं। कुछ मामलों में नॉन-हार्मोनल विकल्प जैसे एंटीडिप्रेसेंट या प्राकृतिक उपाय भी कारगर होते हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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