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Popcorn Brain: सोशल मीडिया से लोगों को हो रही है पॉपकॉर्न ब्रेन की दिक्कत, जानिए क्या है यह बीमारी
Popcorn Brain :सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना आज के समय में बेहद आम होता जा रहा है। आज के समय में लोगों का अधिकतर समय सोशल मीडिया पर यूं ही बीत जाता है। अब जब सोशल मीडिया एक लत बनती जा रही है तो उसके कारण कई नई तरह की बीमारियां जन्म लेने लगी हैं। इन्हीं में से एक पॉपकॉर्न ब्रेन।
यह एक नई तरह की समस्या है, जिसमें लोगों को लगातार फोन स्क्रॉल करने और मल्टीटास्किंग करने की आदत हो जाती है। कुछ वक्त के बाद उनका दिमाग कुछ इस तरह काम करने लगता है कि वे किसी एक चीज या टास्क पर पूरी तरह से फोकस नहीं कर पाते हैं।

दरअसल, उनका माइंड पॉपकॉर्न की तरह घूमता रहता है। इससे आपकी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ दोनों पर ही बुरा प्रभाव पड़ता है। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको पॉपकॉर्न ब्रेन के बारे में विस्तारपूर्वक बता रहे हैं-
पॉपकॉर्न ब्रेन क्या है?
पॉपकॉर्न ब्रेन के लक्षणों व उसे हैंडल करने के तरीकों के बारे में जानने से पहले आपको यह समझना होगा कि वास्तव में पॉपकॉर्न ब्रेन क्या है। जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है, इसमें दिमाग लगातार इधर-उधर भागता है। यह समस्या डिजिटल मीडिया का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने के कारण जन्म लेने लगी है। जिस तरह पॉपकॉर्न लगातार उछलते हैं, ठीक उसी तरह दिमाग भी एक चीज पर फोकस नहीं रहता है, बल्कि बार-बार दूसरी तीसरी चीज पर जंप करना शुरू कर देता है। जब लगातार दिमाग इधर-उधर भागता रहता है तो जरूरी कामों को पूरा कर पाना भी मुश्किल हो जाता है।
पॉपकॉर्न ब्रेन की पहचान कैसे करें
पॉपकॉर्न ब्रेन की पहचान करना काफी आसान है। अगर आप सोशल मीडिया का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। आपको लगातार अपना फोन स्क्रॉल करना अच्छा लगता है। साथ ही साथ, जब आप कोई काम करते हैं और उस पर फोकस कर पाना आपके लिए मुश्किल हो जाता है तो आपको पॉपकॉर्न ब्रेन की समस्या हो सकती है। साल 2011 में यूडब्ल्यू आई स्कूल के शोधकर्ताओं ने पॉपकॉर्न ब्रेन टर्म नाम दिया। इसमें दिमाग मल्टीटास्किंग और स्क्रॉलिंग करने का आदी हो जाता है। जिसके कारण आपके विचार भी पॉपकॉर्न की तरह इधर-उधर भागने लगते हैं।
मेंटल हेल्थ पर पड़ता है नेगेटिव असर
पॉपकॉर्न ब्रेन सिर्फ आपके काम की क्वालिटी पर ही असर नहीं डालता है। बल्कि इसका नेगेटिव इफेक्ट व्यक्ति की मेंटल हेल्थ पर भी पड़ता है। जब दिमाग लगातार कई चीजों में बंटा हुआ होता है और वह किसी एक भी चीज पर फोकस नहीं कर पाता है तो इससे कहीं ना कहीं मन दुखी होता है और अवसाद की स्थिति पैदा होती है। कई बार व्यक्ति को इसके कारण एंग्जाइटी की समस्या भी हो सकती है। अगर इसकी समय रहते पहचान ना की जाए और इलाज ना किया जाए तो इससे सीखने और याद करने की क्षमता पर भी नेगेटिव असर पड़ता है।
ऐसे करें बचाव
आज के समय में डिजिटल मीडिया से पूरी तरह से दूरी बना पाना संभव नहीं है, लेकिन अगर कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखा जाए तो इससे होने वाली हेल्थ समस्याओं जैसे पॉपकॉर्न ब्रेन आदि से बचा जा सकता है।
• आप मल्टीटास्किंग से बचें और एक बार में केवल एक ही काम पर फोकस करने की आदत डालें।
• खुद को हर दिन कुछ वक्त के लिए डिजिटली डिटॉक्स करने की आदत डालें। इससे आप डिजिटल मीडिया का बहुत अधिक इस्तेमाल करने की आदत से बच पाएंगे।
• खुद के लिए थोड़ा समय निकालें और फोन या टैब का इस्तेमाल करने की जगह अखबार पढ़ने की आदत डालें।
• कुछ वक्त अपनी हॉबीज को दें और थोड़ा सोशल होने व लोगों से मिलने-जुलने की कोशिश करें।
• अगर आपको ऐसा लगता है कि आप किसी चीज पर ध्यान नहीं लगा पाते हैं तो ऐसे में आप कुछ वक्त के लिए मेडिटेशन भी जरूर करें। मेडिटेशन आपके दिमाग को शांत करता है और अधिक फोकस होने में मदद करता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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