परफेक्‍ट बनने की होड़ में इस खतरनाक बीमारी की शिकार हो रही है महिलाएं, जाने क्‍या है इलाज

बदलती लाइफस्‍टाइल में आजकल की महिलाओं में ऑलराउंडर और मल्‍टी-टास्किंग होने का भूत सवार होता जा रहा है। हर घर हो या दफ्तर हर जगह महिलाएं अपनी परफेक्‍ट इमेज बनाना चाहती है। परफेक्‍शन के चलते इन दिनों कई महिलाएं सुपरवुमैन सिड्रोंम की गिरफ्त में जा रही हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि ये सुपरवुमैन सिंड्रोम क्‍या होता है? ये एक तरह का मानसिक अवसाद है जो ऐसी महिलाओं में देखा जाता है, जो हर जगह परफेक्‍ट दिखना चाहती हैं और ऐसा न कर पाने के कारण वो आत्‍मग्‍लानि से भर जाती है। परफेक्‍ट दिखने का ये जुनून महिलाओं को धीरे-धीरे इस अवसाद की ओर धकेलना लगता है। जिसे सुपर वुमैन सिंड्रोम (Superwoman Syndrome) कहा जाता है। आइए जानते है इस सिंड्रोम के बारे में।

क्‍या है सुपरवुमैन सिंड्रोम?

क्‍या है सुपरवुमैन सिंड्रोम?

विशेषज्ञों के अनुसार आजकल की मह‍िलाएं हर चुनौती में एकदम फिट होकर बैठना चाहती हैं। चाहे वो घर-परिवार की जिम्‍मेदारी हो या फिर कॅरियर में कोई ऊंचा मुकाम पाना हो। जिंदगी में हर भूमिका को अच्‍छे से न‍िभाने की लत वजह से कई महिलाएं सुपर वुमैन सिंड्रोम का शिकार होती जा रही हैं। अगर वो किसी जगह परफेक्‍शन में चूक जाती है तो वह खुद को ही दोष देने लगती है। इतना ही नहीं परफेक्‍ट बनने की होड़ में कभी- कभी महिलाएं डिप्रेशन का शिकार हो जाती है।

सुपर वुमैन सिंड्रोम के लक्षण

सुपर वुमैन सिंड्रोम के लक्षण

सुपर वुमैन सिंड्रोम किसी भी महिला को हो सकता है, हाउसवाइफ, नई मांओं, कामकाजी महिला और सोशल एक्टिविस्‍ट को भी। कॉलेज गॉइंग लड़कियां हो या फिर अधेड़ उम्र की महिलाएं। कई शोध के अनुसार 13 साल की महिलाएं भी इस सिंड्रोम से गुजर रही हैं, आइए जानते हैं सुपर वुमैन सिंड्रोम के लक्षण।

- एक परफेक्‍ट महिला की इमेज बनाकर रखना

- तारीफ सुनने के ल‍िए, लोगों को खुश रखना।

- सर्वगुण सम्‍पन्‍न होने की भावना

- किसी को भी न नहीं बोलती।

- ध्‍यान बंटोरना

- कम आत्‍मसम्‍मान होना

- परफेक्‍ट बनने की भरसक कोशिश करना

 सेरोटोनिन हो सकता है कारण

सेरोटोनिन हो सकता है कारण

एक्‍सपर्ट की मानें तो इस सिंड्रोम के होने की असली वजह सेरोटोनिन की कमी भी एक मुख्य कारण बन सकती है। दरअसल, सेरोटोनिन एक बेहद महत्वपूर्ण ब्रेन केमिकल है, जो व्यक्ति की उदासी को दूर करके व मूड को अच्छा बनाकर उसे तनावग्रस्त होने से बचाता है। मस्तिष्क में सेरोटोनिन के स्तर को बढ़ाने के लिए दवाईयों का सहारा लिया जा सकता है। इसके अलावा एस्‍ट्रोजन बढ़ाने वाले फूड का सेवन करने से भी सेरोटोनिन हार्मोन में वृद्धि होती है।

प्राथमिकताओं को करें सुनिश्चित

प्राथमिकताओं को करें सुनिश्चित

कॉम्‍पीटिशन के इस दौर में हर कोई परफेक्‍ट बनना चाहता हैं। ऐसे में सुपर वुमन सिंड्रोम से बचने से निपटने के लिए प्राथमिकताओं को सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है। एक बात ये समझना बहुत जरुरी है कि एक वक्त में हर काम कर पाना या हर फील्ड में परफेक्ट हो पाना किसी के लिए भी संभव नहीं है। इसलिए जिस वक्त पर जो चीज ज्यादा जरूरी है, उसे ही प्राथमिकता दें। उदाहरण के तौर पर, अगर आप अभी-अभी मां बनी हैं, तो यह समय पूरी तरह अपने बच्चे व मातृत्व को समर्पित करें, ऑफिस वर्क को अवॉइड करें।

Desktop Bottom Promotion