Myths Vs Facts: मेंटल हेल्‍थ से जुड़े वो 6 गलत बातें ज‍िन्‍हें आप भी सही मानते हैं, यहां जानें सच

World Mental Health Day 2023: मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य को लेकर हमारे समाज में आज से ही नहीं सदियों से कई तरह के अंधविश्‍वास और झूठी बातें फैली हुई हैं। कोई इसे भूत-पिशाच से जोड़ता है, तो कोई इसे सीधे-सीधे पागलपन कह देता है।
असल बात तो यह है कि आज भी लोग मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याओं पर खुलकर बात करने से कतराते हैं। ऐसे में बहुत जरूरी है कि हम मेंटल हेल्थ से जुड़ी इन मिथकों को फैलने से रोंके और लोगों को इसके बारे में सही जानकारी दें।

World Mental health day 2023:

Myth: पुरुषों को मेंटल सपोर्ट की जरूरत नहीं होती है?

Fact: हमारे पितृसत्तामक समाज में कई लोगों में आम धारणा है कि पुरुषों को मेंटल सपोर्ट की जरूरत नहीं होती वो पैदायशी मेंटली स्‍ट्रॉन्‍ग होते हैं। पर ऐसा नहीं है। पुरुषों को भी मेंटल सपोर्ट की जरूरत पड़ती है। ऐसा करने से खुद को अकेला नहीं महसूस करते और बेहतर तरीके से जी पाते हैं।

Myth: टीनेजर्स को मेंटल हेल्थ इश्यूज नहीं होते हैं, हार्मोनल बदलाव की वजह से मूड स्विंग होते है?

Fact: यूनिसेफ के आंकड़ों के मुताबिक, दुनियाभर में 14 प्रतिशत टीनेजर्स मानसिक-स्वास्थ्य समस्याओं से गुजरते हैं। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि दुनियाभर में 10-15 साल के बच्चों की मृत्यु के सबसे बड़े पांच कारणों में से एक आत्महत्या है। जबकि 15-19 साल के किशोरों में मेंटल हेल्‍थ चौथा सबसे आम कारण है। यही नहीं, 14 वर्ष की आयु के बाद ज्‍यादात्तर बच्‍चे डिप्रेशन या एंग्‍याजटी का शिकार होते है, ज‍िससे साफ मालूम चलता है क‍ि किशोरों को भी मेंटल हेल्थ इश्यूज जैसे डिप्रेशन, एंग्जाइटी हो सकती हैं।

Myth:डिप्रेशन उम्रदराज लोगों की बीमारी है?

Fact: डिप्रेशन किसी भी इंसान को हो सकता है डिप्रेशन एक ऐसा विकार है जो किसी भी उम्र के इंसान को हो सकता है. ऐसा को प्रमाण भी नहीं मिलता है कि यह किसी खास उम्र के लोगों को ही हो सकता है!

Myth:मानसिक बीमारी कमजोरी की न‍िशानी है?

Fact:मानसिक शक्ति और मानसिक स्वास्थ्य समान नहीं है। जैसे कुछ लोग मधुमेह से पीड़ित होने के बावजूद भी शारीरिक रुप से मजबूत हो सकते हैं वैसे ही अवसाद से ग्रस्‍त व्‍यक्ति भी मानसिक रूप से मजबूत हो सकता है।

World Mental health day 2023:

Myth: मानसिक बीमारी लाइलाज है?

Fact: ये ब‍िल्‍कुल गलत हैं। सही इलाज और उचित मार्गदर्शन से मानसिक बीमारियों का इलाज भी क‍िया जा सकता है।। यह कई शारीरिक बीमारियों जैसे मधुमेह और हृदय रोग की तरह कई थैरेपीज और मेडिसिन की सहायता से इस समस्‍या को भी मै प्रबंधित किया जा सकता है ताकि व्यक्ति पूरी तरह से उच्‍च गुणवत्ता वाला जीवन जी सकें।

Myth: मानसिक रोग मतलब पागलपन?

Fact: हमारे देश में लोग मानसिक रोग पर बात करने से कतराते हैं। अक्‍सर लोग मानसिक रोग को पागलपन से जोड़ देते हैं। यहीं एक वजह है क‍ि लोग अवसाद, तनाव से गुजरने पर भी खुलकर अपनी समस्‍या बताने की जगह छिपाने का प्रयास करते हैं। मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य से जुड़ी समस्‍याओं को सिर्फ पागलपन से जोड़ कर नहीं देखा जाना चाहिए।

Myth: झाड़-फूक से मानसिक रोग का इलाज हो जाता है?

Fact: ये हमारे समाज का सबसे बड़ा अंधविश्‍वास है क‍ि अगर क‍िसी व्‍यक्ति को मिर्गी के दौरे आ जाए या क‍िसी तरह का मानसिक विकार है तो इसे झाड़ फूक से ठीक क‍िया जा सकता है। ये जागरुकता के अभाव के वजह से आज भी लोग इन चीजों में विश्‍वास करके अपना समय खराब करते हैं। क‍िसी भी व्यक्ति में मानसिक रोगों का कोई भी लक्षण दिखाई दे तो जल्द ही अपने निकटतम मानसिक चिकित्सक को दिखाना चाहिए। झाड़ फूक से किसी भी बीमारी का इलाज संभव नहीं है।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

Story first published: Saturday, October 7, 2023, 8:40 [IST]
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