Latest Updates
-
आगरा की अवनी गुप्ता ने Miss Supranational 2026 में बढ़ाया भारत का मान, कॉर्पोरेट जॉब छोड़ बनाई टॉप 12 में जगह -
सावन में भूलकर भी न करें इन चीजों का सेवन, एक्सपर्ट से जानें सावन में क्या खाएं और क्या नहीं -
Sawan Somwar Vrat 2026: क्या पीरियड्स में सावन सोमवार का व्रत रखा जा सकता है? जानें क्या कहते हैं शास्त्र -
World Lung Cancer Day 2026: स्मोकिंग न करने वालों को भी हो सकता है लंग कैंसर, जानें इसके कारण, लक्षण और बचाव -
August 2026 Vrat Tyohar: सावन शिवरात्रि से लेकर रक्षाबंधन तक, देखें अगस्त में आने वाले व्रत-त्योहारों की लिस्ट -
कर्नाटक में 18-25 साल के 7 हजार से ज्यादा छात्र HIV पॉजिटिव, अब सभी कॉलेजों में टेस्टिंग होगी अनिवार्य -
Sawan 2026: सावन में शिवलिंग की पूजा के दौरान भूलकर भी न करें ये 7 गलतियां, नाराज हो सकते हैं भगवान शिव -
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर करिश्मा तन्ना के घर गूंजी किलकारी, इस शुभ दिन जन्मे बच्चों के लिए चुनें ये खास नाम -
30 जुलाई या 2 अगस्त, फ्रेंडशिप डे कब है? जानें International Friendship Day और Friendship Day में फर्क -
Happy Sawan 2026 Wishes: ...इन संदेशों के जरिए अपने प्रियजनों को दें सावन की शुभकामनाएं
क्यों करें एक ईको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा का इस्तेमाल
गणेश चतुर्थी की तैयारियों के दौरान एक ईको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा को चुनना बहुत जरूरी है। आम तौर पर बाज़ार में मिलने वाली गणेश प्रतिमाएँ प्लास्टर ऑफ पेरिस की बनी होती हैं।
हालांकि ये मूर्तियां दिखने बहुत आकर्षक होती हैं लेकिन ईको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा के चयन के पीछे एक कारण छुपा है। ये प्रतिमाएँ आपके स्वास्थ्य या पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाती हैं।
चूंकि गणेश प्रतिमा को पानी में विसर्जित किया जाता है इसलिए जैव वस्तुओं से बनी प्रतिमाओं का उपयोग करना सुरक्षित होगा। प्लास्टर ऑफ पेरिस की तुलना में मिट्टी या कागज से बनी मूर्तियों का चयन करना बेहतर होगा।
मिट्टी से बनी प्रतिमाएं पर्यावरण को हानि नहीं पहुंचाती एवं ये पानी में जल्द डूब जाती हैं। यदि आपको ईको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा को बनाना नहीं आता है तो आप इस तरह की मूर्ति को किसी दुकान से खरीद सकते हैं।

ईको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा को इस्तेमाल करने के कारण
1. इससे जल प्रदूषण को रोका जा सकता है
प्लास्टर ऑफ पेरिस में कई तरह के रसायन होते हैं जो पानी को जहरीला बना सकते हैं। अतः यह पानी जलीय जीवों की मृत्यु का कारण बन सकता है। इतना ही नहीं, यह दूषित पानी मनुष्य के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है।
2. खतरनाक रसायन
पेरिस ऑफ प्लास्टर में सल्फर, फास्फोरस, जिप्सम, मैग्नेशियम जैसे कई रसायन होते हैं एवं मूर्ति को सजाने में इस्तेमाल होने वाले रंगों में कार्बन, लेड़ व अन्य प्रकार के रसायन होते हैं। जब हम इन रसायनों से बनी प्रतिमाओं को पानी में विसर्जित करते हैं तब इन रसायनों से सबसे पहला खतरा पानी के भीतर पनपने वाले जीवों को होता है। जब हम ऐसे पानी में सांस लेने वाली मछली को खाते हैं तब हमारा जीवन भी खतरे में पड़ जाता है।
3. फेफड़ों को नुकसान पहुंच सकता है
मूर्ति को सजाने में इस्तेमाल किए जाने वाले रंग कुछ गैसों का वितरण करते हैं तथा जब हम सांस लेते हैं, इन गैसों से हमारे फेफडों को नुकसान पहुंच सकता है।
पर्यावरण एवं स्वयं को सुरक्षित रखने के लिए जैव वस्तुओं से बनी प्रतिमाओं का इस्तेमाल करना ही सही होगा। प्रकृति में संतुलन बनाए रखना बहुत जरूरी है परंतु जब मनुष्य इस संतुलन को बिगाड़ने की कोशिश करता है तब इसका खामयाज़ा खुद उसे भुगतना पड़ता है। तो चलिए, प्रकृति की रक्षा के बारे में जागरूकता फैलाते हुए इस त्योहार का आनंद लेते हैं।



Click it and Unblock the Notifications