Latest Updates
-
Quick Filling Dinner Anda Paratha Recipe: घर पर बनाएं ढाबे जैसा स्वादिष्ट अंडा पराठा -
मानसून से पहले दिल्ली में डेंगू के 162 और मलेरिया के 42 मामले, कहीं आप भी न हो जाएं शिकार; जानें बचाव के उपाय -
Dhaba Style Marinade Chicken Tikka Recipe: घर पर पाएं रेस्टोरेंट जैसा स्मोकी स्वाद -
प्रेग्नेंट हैं 39 साल की सामंथा रुथ प्रभु! करीबी शख्स ने किया कन्फर्म, जानें कब होगी डिलीवरी -
मलाइका अरोड़ा की फिटनेस का खुल गया राज, 52 की उम्र में यंग दिखने के लिए करती हैं ये 5 योगासन -
South Indian Style Tomato Rice Recipe: घर पर बनाएं रेस्टोरेंट जैसा चटपटा स्वाद -
Summer Solstice: 21 जून को क्यों होता है साल का सबसे बड़ा दिन? जानें क्या है इसके पीछे की असली वजह -
International Yoga Day 2026 Wishes: योग करे जो रोज...योग दिवस पर प्रियजनों को भेजें ये खास शुभकामनाएं -
Father's Day 2026 Shayari: उंगली पकड़कर चलना सिखाया...फादर्स डे पर पापा को भेजें ये दिल छू लेने वाली शायरियां -
Zero Oil Sprouts Cheela Recipe: वजन घटाने के लिए बनाएं हेल्दी और टेस्टी नाश्ता
फिश एक्वेरियम रखने के बारे में कुछ झूंठी बातें
फिश एक्वेरियम रखना एक बड़ा ही सामान्य सा शौक है। मछली और एक्वेरियम रखने को लेकर लोग अक्सर आशंकित रहते हैं। वास्तव में इस शौक से संबंधित जो मिथक हैं वे इस शानदार शौक में आपकी रुचि को बर्बाद कर सकते हैं। कुछ मिथ्या तथ्यों से आज पर्दा उठ जाएगा--
अगर आपके घर पर भी फिश एक्वेरियम रखा हुआ है तो हो सकता है कि आप लोगों कि बातों में आ कर टैंक का पानी रोज बदलते हों। यह तथ्य खतरनाक रूप से गलत है, ऐसा करने से आपकी मछलियाँ वास्तव में मर सकती हैं। थम्ब रूल यह है कि पानी को कभी भी पूरी तरह नहीं बदलना चाहिए। नियम के हिसाब से पानी को हर सप्ताह सिर्फ 10-20 प्रतिशत तक ही बदलना चाहिए।
यदि आपके पास फिल्ट्रेशन सिस्टम है तब तो आप 30-50 प्रतिशत पानी बदलने के पहले एक महीने का अंतराल भी बनाए रख सकते हैं। पानी के बैक्टीरिया मछलियों को पानी में ज़िंदा रखने में मदद करते हैं, पानी को पूरी तरह बदलना उनके लिए घातक सिद्ध हो सकता है।

एक फिश टैंक को रखना बहुत खर्चीला हो सकता है- गलत
बल्कि एक बड़े टैंक को मेंटेन करना बहुत ही आसान है। ताजे पानी की मछली को सही कीमत पर मेंटेन करना बहुत आसान है। ताजे पानी की मछलियाँ साहसी होती हैं और आसानी से नए परिवेश के वातावरण को अपना लेती हैं। संभावित खर्चा जो मूलभूत ताजा पानी के टैंक बनाए रखने में आता है वह है- फिश फ़ूड, फिल्ट्रेशन (पानी को छानने का उपकरण), और पर्याप्त प्रकाश। इन सबकी कीमत काफी कम होती है और इन बुनियादी सुविधाओं के साथ फिश एक्वेरियम को बनाए रखना काफी आसान होता है।

टैंक का पानी प्रतिदिन बदलना पड़ता है – गलत
ऐसा करने से आपकी मछलियाँ वास्तव में मर सकती हैं। थम्ब रूल यह है कि पानी को कभी भी पूरी तरह नहीं बदलना चाहिए। नियम के हिसाब से पानी को हर सप्ताह सिर्फ 10-20 प्रतिशत तक ही बदलना चाहिए। यदि आपके पास फिल्ट्रेशन सिस्टम है तब तो आप 30-50 प्रतिशत पानी बदलने के पहले एक महीने का अंतराल भी बनाए रख सकते हैं। पानी के बैक्टीरिया मछलियों को पानी में ज़िंदा रखने में मदद करते हैं, पानी को पूरी तरह बदलना उनके लिए घातक सिद्ध हो सकता है।

कैटफ़िश यानी सकर मछली टैंक को साफ रखती है - गलत
कैटफिश शिकारी नहीं होतीं। ये दूसरी मछलियों और उनकी त्यागी हुई गंदगी को नहीं खाती हैं। वास्तव में ऐसा करना किसी भी मछली के लिए अस्वास्थ्यकर हो सकता है। यदि टैंक में एल्गी जमती है तो उसे खरोंच कर अलग कर दें। कोई मछली अपने टैंक को साफ-सुथरा और स्वच्छ नहीं रख सकती। अतः एक कैटफ़िश द्वारा अपने टैंक को साफ रखना लगभग नामुमकिन है।

शुरू में छोटा टैंक होना चाहिए- गलत
यदि आप इस शौक की शुरुआत कर रहे हैं तो कभी भी छोटा टैंक मत रखिये। छोटे टैंक को मेंटेन करना बहुत मुश्किल है। बड़े टैंक मेंटेन करना बहुत आसान है और मछलियों की म्रत्यु दर भी काफी कम होती है। मछली को एक छोटे जार में रखना विशेषतः गोल्ड फिश को, एक बुरा आइडिया है। मछली को घूमने के लिए काफी कम स्थान मिलता है और वह आसानी से मर सकती है।

एक टैंक में ज्यादा मछलियाँ रखना खतरनाक है- गलत
मछलियों को सांस लेने के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन की जरूरत होती है। उनके द्वारा पानी में त्यागे गए अपशिष्ट उनके लिए ही जहर न बन जाएँ इसलिए, उसे डायल्यूट (पतला) और संसाधित करने की भी आवश्यकता होती है। एक निश्चित मात्रा का जल इन दोनों आवश्यकताओं को एक निश्चित सीमा तक ही संभाल सकता है, और केवल निश्चित अंतराल में पानी को बदलना ही आपके फिश टैंक के लिए पर्याप्त है।

प्राकृतिक पर्यावरण को नष्ट करना – गलत
शॉप में बेचे जाने वाली मछलियाँ अंदर ही पैदा की जाती हैं। ये मछलियाँ प्राकृतिक वातावरण में ज़िंदा नहीं रह सकती, इन मछलियों को वापस झील या तालाब में डालना वास्तव में पारिस्थितिक तंत्र को नष्ट करना है। ये ऐसे प्राकृतिक वातावरण में नहीं जी सकतीं जहां उन्हें अपने भोजन के लिए कूड़ा-कर्कट खाना पड़ेगा और खुद को शिकार होने से बचाना पड़ेगा।



Click it and Unblock the Notifications