Latest Updates
-
एक कली कच्चा लहसुन खाकर दिन की शुरुआत करती हैं सोहा अली खान, जानें खाली पेट गार्लिक खाने के 5 जबरदस्त फायदे -
पिृत दोष से मुक्ति के लिए आज आषाढ़ अमावस्या पर करें इन 5 चीजों का दान, पितरों का मिलेगा आशीर्वाद -
बार-बार मुंह में हो रहे छालों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज, हो सकता है ओरल कैंसर, जानें लक्षण -
लड़के-लड़कियों के लिए सबसे मॉडर्न और छोटे 100+ टॉप नाम, यहां देखें अर्थ सहित लिस्ट -
कांवड़ यात्रा कब से होगी शुरू? इस दौरान भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, अधूरी रह जाएगी पूजा -
Kriti Sanon ने करवाए अपने अंडे फ्रीज! जानें किस उम्र में ये कराना बेहतर और Egg Freezing फायदे-नुकसान? -
कब है आषाढ़ अमावस्या? इस दिन इन 4 राशियों पर मंडरा रहा संकट, कहीं आपकी राशि भी तो लिस्ट में नहीं? -
Corona Alert: सिंगर कुमार सानू के बेटे को हुआ कोविड, आंध्र प्रदेश में मिले सबसे ज्यादा मरीज, जानें लक्षण -
स्कूल टिफिन के लिए 15 मिनट में तैयार करें सॉफ्ट और स्पंजी सूजी के अप्पे, नोट कर लें आसान रेसिपी -
संडे स्पेशल डिनर के लिए परफेक्ट है पनीर कॉर्न पुलाव, स्वाद ऐसा कि सब मांगेंगे दोबारा
Adhik Maas Kalashtami 2026: अधिक मास की कालाष्टमी कब है? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि
Adhik Maas Kalashtami 2026: हिंदू धर्म में कालाष्टमी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत भगवान शिव के रौद्र रूप भगवान काल भैरव को समर्पित है। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह व्रत हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। लेकिन अधिक मास में पड़ने वाली कालाष्टमी का महत्व कई गुना अधिक बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत रखने और भगवान काल भैरव और भवगान शिव की विधि-विधान से पूजा करने से भक्तों को हर तरह के कष्ट, भय, नकारात्मक ऊर्जा, शत्रुओं, शनि-राहु दोष और कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है। साथ ही, घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। अधिक मास की कालाष्टमी 8 और 9 जून, दोनों दिन पड़ रही है। ऐसे में, इस बार लोगों के मन में कालाष्टमी की तिथि को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। तो आइए, जानते हैं अधिक मास की कालाष्टमी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि के बारे में -

अधिकमास कालाष्टमी 2026 कब है?
वैदिक पंचांग के अनुसार, अधिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 8 जून 2026, सोमवार को सुबह 3 बजकर 24 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 9 जून 2026, मंगलवार को सुबह 3 बजकर 23 मिनट पर होगा। चूंकि, कालाष्टमी की पूजा निशिता काल यानी अर्धरात्रि के समय की जाती, इसलिए कालाष्टमी का व्रत 8 जून को रखा जाएगा।
कालाष्टमी व्रत 2026 का शुभ मुहूर्त
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कालाष्टमी व्रत की पूजा प्रदोष काल में करने का महत्व बताया गया है। पंचांग के अनुसार, 8 जून को प्रदोष काल की शुरुआत 6 बजकर 30 मिनट पर होगी, जो शाम 7 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। ऐसे में, व्रती इस बीच पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
अधिकमास कालाष्टमी व्रत का महत्व
सनातन धर्म में अधिक कालाष्टमी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है, क्योंकि ये तीन साल में एक बार पड़ती है। मान्यता है कि अधिकमास में भगवन कालभैरव की पूजा-अर्चना का तीन गुना अधिक लाभ मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कालाष्टमी के दिन व्रत रखने और भगवान काल भैरव की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति के जीवन से भय, शत्रु बाधा, ग्रह दोष और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। इसके साथ ही, जीवन में साहस, आत्मविश्वास और सफलता का वास होता है। इस व्रत को करने से कुंडली में कालसर्प दोष, पितृ दोष या शनि, राहु-केतू ग्रहों से संबंधित दोष भी शांत होते हैं।
कालाष्टमी पूजा विधि
कालाष्टमी के दिन सुबह प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें।
इसके बाद पूजा स्थल पर भगवान काल भैरव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
भगवान कालभैरव को पुष्प, अक्षत, नारियल, सिंदूर, धूप, नैवेद्य, फल और काले तिल अर्पित करें।
सरसों के तेल का दीपक जलाकर भैरव चालीसा का पाठ और मंत्रों का जाप करें।
पूरे दिन व्रत रखने के बाद आपको प्रदोष काल में भगवान काल भैरव की पूजा करनी चाहिए।
मासिक कालाष्टमी व्रत की कथा पढ़ने के बाद आरती करें।



Click it and Unblock the Notifications