Latest Updates
-
Navratri Va Durga Puja: नवरात्रि और दुर्गा पूजा में क्या अंतर है? एक ही देवी, फिर क्यों अलग हैं दोनों पर्व -
Navratri Recipes 2026: डायबिटीज के मरीज नवरात्रि व्रत में खाएं ये 5 शुगर फ्री रेसिपी, नहीं बढ़ेगा ब्लड शुगर -
मानसून में डायबिटीज के मरीज पैरों का ख्याल कैसे रखें? डॉक्टर से जानें आसान फुट केयर टिप्स -
Navratri 2026: गरबा में दिखना है स्टाइलिश? ट्राई करें ये 6 एवरग्रीन ब्लाउज डिजाइन -
पाकिस्तानियों से इतने साल ज्यादा जीते हैं भारतीय, WHO की रिपोर्ट में सामने आई औसत उम्र और मौत की वजह -
रूस में प्लेग का खौफ! महिला रिसर्चर की मौत के बाद 200 लोग किए गए क्वारंटीन, जानें कैसे फैलती है ये बीमारी -
World Cerebral Palsy Day 2026: बच्चों को विकलांग बना देती है यह बीमारी, जानें इसके कारण, लक्षण और इलाज -
Indira Ekadashi Vrat Katha: इंदिरा एकादशी के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, पितरों को मिलता है मोक्ष -
Indira Ekadashi 2026: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय...इंदिरा एकादशी पर प्रियजनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
Navratri Vrat Recipes: नवरात्रि के लिए पहले ही बना लें ये स्वादिष्ट फलाहारी नमकीन, नौ दिन तक नहीं होगी खराब
Adhik Maas Kalashtami 2026: अधिक मास की कालाष्टमी कब है? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि
Adhik Maas Kalashtami 2026: हिंदू धर्म में कालाष्टमी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत भगवान शिव के रौद्र रूप भगवान काल भैरव को समर्पित है। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह व्रत हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। लेकिन अधिक मास में पड़ने वाली कालाष्टमी का महत्व कई गुना अधिक बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत रखने और भगवान काल भैरव और भवगान शिव की विधि-विधान से पूजा करने से भक्तों को हर तरह के कष्ट, भय, नकारात्मक ऊर्जा, शत्रुओं, शनि-राहु दोष और कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है। साथ ही, घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। अधिक मास की कालाष्टमी 8 और 9 जून, दोनों दिन पड़ रही है। ऐसे में, इस बार लोगों के मन में कालाष्टमी की तिथि को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। तो आइए, जानते हैं अधिक मास की कालाष्टमी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि के बारे में -

अधिकमास कालाष्टमी 2026 कब है?
वैदिक पंचांग के अनुसार, अधिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 8 जून 2026, सोमवार को सुबह 3 बजकर 24 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 9 जून 2026, मंगलवार को सुबह 3 बजकर 23 मिनट पर होगा। चूंकि, कालाष्टमी की पूजा निशिता काल यानी अर्धरात्रि के समय की जाती, इसलिए कालाष्टमी का व्रत 8 जून को रखा जाएगा।
कालाष्टमी व्रत 2026 का शुभ मुहूर्त
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कालाष्टमी व्रत की पूजा प्रदोष काल में करने का महत्व बताया गया है। पंचांग के अनुसार, 8 जून को प्रदोष काल की शुरुआत 6 बजकर 30 मिनट पर होगी, जो शाम 7 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। ऐसे में, व्रती इस बीच पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
अधिकमास कालाष्टमी व्रत का महत्व
सनातन धर्म में अधिक कालाष्टमी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है, क्योंकि ये तीन साल में एक बार पड़ती है। मान्यता है कि अधिकमास में भगवन कालभैरव की पूजा-अर्चना का तीन गुना अधिक लाभ मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कालाष्टमी के दिन व्रत रखने और भगवान काल भैरव की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति के जीवन से भय, शत्रु बाधा, ग्रह दोष और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। इसके साथ ही, जीवन में साहस, आत्मविश्वास और सफलता का वास होता है। इस व्रत को करने से कुंडली में कालसर्प दोष, पितृ दोष या शनि, राहु-केतू ग्रहों से संबंधित दोष भी शांत होते हैं।
कालाष्टमी पूजा विधि
कालाष्टमी के दिन सुबह प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें।
इसके बाद पूजा स्थल पर भगवान काल भैरव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
भगवान कालभैरव को पुष्प, अक्षत, नारियल, सिंदूर, धूप, नैवेद्य, फल और काले तिल अर्पित करें।
सरसों के तेल का दीपक जलाकर भैरव चालीसा का पाठ और मंत्रों का जाप करें।
पूरे दिन व्रत रखने के बाद आपको प्रदोष काल में भगवान काल भैरव की पूजा करनी चाहिए।
मासिक कालाष्टमी व्रत की कथा पढ़ने के बाद आरती करें।



Click it and Unblock the Notifications
