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कौन थे पद्मश्री डी.वाई. पाटिल? बिहार के पूर्व राज्यपाल और प्रसिद्ध शिक्षाविद का 90 वर्ष की उम्र में निधन
D.Y. Patil Passed Away: पद्म श्री से सम्मानित वरिष्ठ शिक्षाविद, समाजसेवी और पूर्व राज्यपाल डॉ. ज्ञानदेव यशवंतराव (डी. वाई.) पाटिल का 90 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने महाराष्ट्र के कोल्हापुर स्थित कसबा बावड़ा में अपने आवास पर अंतिम सांस ली। साधारण किसान परिवार से निकलकर उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में ऐसा कार्य किया, जिसने लाखों विद्यार्थियों और परिवारों के जीवन को नई दिशा दी। उनके निधन से शिक्षा जगत, सामाजिक क्षेत्र और सार्वजनिक जीवन को बड़ी क्षति पहुंची है।

कल होगा अंतिम संस्कार
डॉ. डी. वाई. पाटिल के पार्थिव शरीर को बुधवार सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक आम लोगों के अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद शाम 4 बजे कोल्हापुर के कसबा बावड़ा स्थित 'यशवंत निवास' से उनकी अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। उनका अंतिम संस्कार लाइन बाजार स्थित डॉ. डी. वाई. पाटिल मेडिकल कॉलेज परिसर में पूरे सम्मान और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ किया जाएगा।
कौन थे डॉ. डी. वाई. पाटिल?
डॉ. ज्ञानदेव यशवंतराव पाटिल का जन्म 22 अक्टूबर 1935 को महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के एक किसान परिवार में हुआ था। शुरुआती दिनों से ही उनका झुकाव शिक्षा और समाज सेवा की ओर था। उन्होंने कोल्हापुर के राजाराम कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की और बाद में शिवाजी विश्वविद्यालय से कानून (एलएलबी) की डिग्री हासिल की। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने जनसेवा के साथ-साथ ऐसे संस्थान खड़े करने का संकल्प लिया, जहां युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर अवसर मिल सकें।
शिक्षा के क्षेत्र में बनाई अलग पहचान
डॉ. डी. वाई. पाटिल ने अपने जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य शिक्षा का विस्तार बनाया। उनके नेतृत्व में मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, मैनेजमेंट संस्थान, कृषि महाविद्यालय, स्कूल, विश्वविद्यालय और अस्पताल स्थापित किए गए। उनके संस्थानों ने देश-विदेश के हजारों विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और पेशेवर प्रशिक्षण का अवसर दिया। उनका मानना था कि शिक्षा ही समाज में स्थायी बदलाव लाने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
राजनीति और सार्वजनिक जीवन में भी निभाई अहम जिम्मेदारियां
शिक्षा के क्षेत्र में पहचान बनाने से पहले उन्होंने सक्रिय राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य रहे और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। बाद में उन्हें त्रिपुरा, बिहार और पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया। इन संवैधानिक पदों पर रहते हुए उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया। सक्रिय राजनीति से दूरी बनाने के बाद भी वे सामाजिक और शैक्षणिक गतिविधियों से लगातार जुड़े रहे।
पद्म श्री सम्मान से हुए सम्मानित
शिक्षा और समाज के प्रति उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 1991 में उन्हें पद्म श्री सम्मान से सम्मानित किया। यह सम्मान उनके दशकों लंबे शैक्षणिक और सामाजिक कार्यों की राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान था।
हमेशा याद रहेगा उनका योगदान
डॉ. डी. वाई. पाटिल द्वारा स्थापित शैक्षणिक संस्थान आज भी लाखों युवाओं को बेहतर शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य की राह दिखा रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और जनसेवा के क्षेत्र में उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।



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