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Ambedkar Jayanti: 64 विषयों के जानकार रहे अंबेडकर के पास थी सबसे बड़ी निजी लाइब्रेरी 'राजगीर'
भारत के संविधान निर्माताओं में प्रमुख और जातीय समानता के सबसे बड़े पैरोकार रहे डॉ. अंबेडकर की जयंती हर वर्ष 14 अप्रैल को मनाई जाती है। भीम राव अंबेडकर जी का जन्म 14 अप्रैल, 1891 को हुआ था। उन्होंने अपना पूरा जीवन शिक्षा अर्जित करने, भारत को स्वतंत्र कराने, दलितों के अधिकारों के लिए लड़ने, और राष्ट्र निर्माण के सबसे पहले कदम यानि संविधान निर्माण में अर्पित किया।
उनके कार्य और व्यक्तित्व इस कदर विश्वप्रसिद्ध हुए कि आज कई देशों और कई लोकप्रिय विश्विद्यालयों में उनकी मूर्तियां, तस्वीरें, और किताबों को रखा गया है। लन्दन म्यूजियम में उनकी मूर्ति को कार्ल मार्क्स की मूर्ति के साथ रखा गया है। अंबेडकर भारतीय राजनीति के सबसे शिक्षित राजनेताओं में से एक रहें हैं। जानते हैं डॉ. अम्बेडकर के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक और विशेष बातें -

दक्षिण एशिया में अर्थशास्त्र में डबल पी.एच.डी करने वाले पहले व्यक्ति थे
अंबेडकर ने अपने जीवन में अलग अलग विषयों में कई डिग्रीयां लीं। उन्होंने ब्रिटेन के मशहूर कॉलेज लन्दन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स और कोलंबिया यूनिवर्सिटी से स्नातकोत्तर, और पी.एच.डी आदि की डिग्री हासिल की। केवल तीन वर्षों में कोलंबिया यूनिवर्सिटी में रहकर उन्होंने अर्थशास्त्र में 9 कोर्सेज़, इतिहास में 11, समाजशास्त्र में 6, दर्शनशास्त्र में 5, मानविकी में 4, राजनीति में 3, और फ्रेंच व जर्मन भाषाओं में एक कोर्सेज़ पढ़ें। उन्होंने लन्दन से बैरिस्टर की शिक्षा भी ली। उन्होंने अपने जीवन में 64 विषयों को पढ़ा और 9 भाषाओं की जानकारी थी। उनको ओस्मानिया विश्वविद्यालय से सर्वोच्च डिग्री डी.लिट की उपाधि भी मिली।
भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना में रहीं मुख्य भूमिका
डॉ. अम्बेडकर द्वारा डॉक्टरेट की उपाधि के लिए लिखी गई पुस्तक 'द प्रॉब्लम ऑफ़ द मनी: इट्स ओरिजिन एंड इट्स सलूशन' में दिए गये निर्देशों की सहायता से हिल्टन यंग समिति ने भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना की। अंबेडकर ने अपनी पुस्तक में लिखा कि "रुपये के मूल्य को तब तक स्थिर नहीं किया जा सकता है जब तक कि हम इसकी सामान्य क्रय शक्ति को स्थिर नहीं करते"।
सबसे बड़ी निजी लाइब्रेरी
बाबासाहेब के निजी पुस्तकालय "राजगीर" में 50,000 से अधिक पुस्तकें थीं। यह दुनिया की सबसे बड़े निजी पुस्तकालयों में से एक रहा।
भारत में काम के घंटे घटाने में दिया था महत्वपूर्ण योगदान
डॉ. अंबेडकर 1942 से 1946 तक वाइसराय के लेबर काउंसिल के सदस्य रहें। अपने पदभार के समय उन्होंने भारत में कई श्रम सुधारों को लाने में अपनी अहम भूमिका निभाई। उन्होंने भारतीय श्रम कांफ्रेंस में भारत में काम के घंटों को 12 घंटे से घटाकर 8 घंटे किया। इसके साथ ही काम की परिस्थितियों में सुधार, कामगारों की सुरक्षा, स्वास्थ्य बीमा, उचित मेहनताना आदि के लिए सार्थक सुधार किये।
अंबेडकर द्वारा लिखी संक्षिप्त आत्मकथा कोलंबिया विश्वविद्यालय में पाठ्यक्रम का हिस्सा बनी
डॉ अंबेडकर ने 20 पन्नों की एक छोटी सी संक्षिप्त आत्मकथीय कहानी लिखी, जो उनके अमेरिका और यूरोप दौरे पर हुए भेदभाव पर आधारित थी। उनकी यह पुस्तक 'वेटिंग फॉर अ वीज़ा' को कोलंबिया विश्वविद्यालय में पाठ्यपुस्तक के तौर पर पढ़ाया जाने लगा।
अर्थशास्त्र में रहा बड़ा नाम
महान अर्थशास्त्री और नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने डॉ. अम्बेडकर को अर्थशास्त्र में अपना गुरु समान बताया। लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में बाबासाहेब ने 8 साल की पढ़ाई सिर्फ 2 साल 3 महीने में पूरी की। इसके लिए उन्होंने कई दिन 21 घंटे पढ़ाई भी की। वे दुनिया के पहले और एकमात्र व्यक्ति हैं जिन्हें लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से "डॉक्टर ऑफ़ ऑल साइंस" नामक मूल्यवान डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त हुई। उनके बाद कई बुद्धिमान छात्रों ने इस डिग्री को प्राप्त करने का प्रयास किया, लेकिन वे अब तक सफल नहीं हो पाए।
मानव जाति के चौथे सबसे महत्वपूर्ण व्यक्तित्व माने गये
"द मेकर्स ऑफ द यूनिवर्स" नामक वैश्विक सर्वेक्षण के आधार पर ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा पिछले 10 हजार वर्षों के शीर्ष 100 मानवतावादी लोगों की एक सूची बनाई गई, जिसमें चौथा नाम डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का था।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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