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Atla Tadde 2023: दक्षिण भारत का करवा चौथ है अतला टड्डी, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि व कथा
Atla Tadde 2023: आंध्र प्रदेश के सबसे लोकप्रिय त्योहारों में से यह है अतला टड्डी। जिस तरह से उत्तर भारत में तीज और अतला टड्डी की धूम रहती है, उसी तरह से दक्षिण भारत खासतौर से आंध्र प्रदेश में सुहागिन महिलाएं अतला टड्डी का व्रत करती हैं।
यह पर्व सभी विवाहित और अविवाहित महिलाएं मिलकर मनाती हैं। शादीशुदा औरतें इस दिन गौरी माता से अपने सुखी वैवाहिक जीवन के लिए आशीर्वाद मांगती हैं। यह त्योहार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष में मनाया जाता है और इस साल यह 31 अक्टूबर 2023 को मनाया जा रहा है।

अटला टाडे 2023: तिथि और शुभ मुहूर्त
थड़िया तिथि आरंभ - 30 अक्टूबर, 2023 - रात्रि 10:22 बजे
थडिया तिथि समाप्त - 31 अक्टूबर, 2023 - रात्रि 09:30 बजे
चंद्रमा उदय का समय - 31 अक्टूबर, 2023 - शाम 07:10 बजे
अटला ताड़े पर्व का महत्व
अतला तड्डे का उत्सव मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में मनाया जाता है। इस दिन का धार्मिक महत्व बहुत अधिक है। महिलाओं के बीच यह उत्सव काफी लोकप्रिय है। इस दिन सभी महिलाएं व्रत रखती हैं और अपने जीवनसाथी की सलामती के लिए देवी पार्वती से प्रार्थना करती हैं। वो मां गौरी से अपने सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। वहीं अविवाहित कन्याएं सुयोग्य और मनचाहा वर पाने के लिए इस व्रत को करती हैं।
अतला ताड़े से जुड़ी कथा

इस पर्व के साथ प्रचलित कथा के अनुसार, एक बार एक युवा राजकुमारी थी जिसने यह व्रत रखा था लेकिन भूख बर्दाश्त न होने के कारण वह व्रत के बीच में ही बेहोश हो गई और अपना व्रत पूरा नहीं कर सकीं। उसके भाई ने मदद करने की मंशा से उसे आग के प्रतिबिंब वाला दर्पण दिखाने का निर्णय लिया ताकि वह अपना उपवास तोड़ सके।
जब वह बड़ी हुई तो उसका भाई उसके लिए वर ढूँढ़ना चाहता था लेकिन उसे कोई योग्य वर नहीं मिल पा रहा था। आख़िरकार उसने एक बूढ़े आदमी से उसकी शादी तय करने का फैसला किया। इससे क्रोधित होकर राजकुमारी जंगल में भाग गई। वह एक बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर बुरी तरह रो रही थी तभी भगवान शिव और देवी पार्वती ने उसे दर्शन दिए और उसे वापस जाकर अटला ताड़े का अपना अधूरा व्रत पूरा करने को कहा। वह राज्य वापस गई और पूरी भक्ति और समर्पण के साथ और सभी अनुष्ठानों का पालन करते हुए राजकुमारी ने व्रत रखा। कुछ समय बाद उसका विवाह एक खूबसूरत नौजवान युवक से हुआ।
अतला टड्डी व्रत की विधि
इसमें व्रती महिलाएं सुबह जल्दी उठती हैं। इस पर्व में दिन निकलने से पहले चावल और नारियल के पकवान बनाए जाते हैं। इस दिन सभी अटला टड्डी के गीत गाते है, झूला झूलते हैं और उत्सव की शुरुआत करते हैं। महिलाएं और युवतियां श्रृंगार करती हैं। मंदिर में दर्शन के लिए जाती हैं। पूरे दिन निर्जला व्रत रखने के बाद शाम में चांद निकलने के बाद उसकी पूजा की जाती है। फिर भोग में चावल से बनी मिठाई और डोसे चढ़ाए जाते हैं। आमतौर पर 11 डोसे चढ़ाने की परंपरा है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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