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Ayodhya Ram Mandir Trivia: श्री राम मंदिर के बारे में कम ही लोगों को है इस विशेष बात की जानकारी
Ayodhya Ram Mandir Interesting Facts: अयोध्या नगरी श्री राम का जन्म स्थल रही है और यहीं बहु आकांक्षित श्री राम जन्मभूमि मंदिर बनने जा रहा है। महाराज दशरथ का शासन इसी अयोध्या में था, जहां श्री राम ने अपना बचपन व्यतीत किया। यह अयोध्या नगरी उत्तर प्रदेश में सरयू नदी के किनारे बसी हुई है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस नगरी का निर्माण स्वयं देवताओं ने किया था। आज भी इस स्थान का हिन्दू धर्म में बहुत अधिक महत्व है। जानते हैं श्री राम जन्मभूमि और यहां बन रहे मंदिर के बारे में कुछ ऐतिहासिक और रोचक बातें जो इस जगह को और भी महत्वपूर्ण बनाते हैं -

सप्तपुरियों में से एक है अयोध्या
अयोध्या नगरी पवित्र सप्त पुरियों में से एक मानी जाती है। इसके आलावा मथुरा, माया (हरिद्वार), काशी, कांची, अवंतिका (उज्जयिनी) और द्वारका पवित्र सप्तपुरियों में शामिल हैं। धार्मिक पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु ने ब्रह्मा, मनु, देव शिल्पी विश्वकर्मा और महर्षि वशिष्ठ को अपने रामावतार के लिए भूमि चयन करने के लिए भेजा था। महर्षि वशिष्ट द्वारा सरयू नदी के किनारे इस जगह का चयन किया गया और भगवान विश्वकर्मा ने इस नगरी का निर्माण किया। भगवान राम के जन्मस्थली होने के कारण अयोध्या को मोक्षदायिनी एवं हिन्दुओं की प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक माना जाता है।
अयोध्या की स्थापना

वाल्मीकि रामायण के 5 वें सर्ग में अयोध्या के इतिहास का वर्णन किया गया है। 6673 ईसा पूर्व में वैवस्वत मनु के 10 पुत्रों में से एक इक्ष्वाकु था, उनके ही कुल में आगे चलकर दशरथ भी हुए थें। अयोध्या पर राज करने वाले राजा दशरथ अयोध्या के 63वें शासक थे। प्राचीन कथाओं के अनुसार अयोध्या रघुवंशी राजाओं की बहुत पुरानी राजधानी थी। इसके बाद वनवास से लौटने के बाद भगवान श्री राम ने यहां का राज पाठ संभाला और उनके बाद उनके पुत्र कुश ने परंपरा को जारी रखा।
मध्यकाल में यह नगरी मौर्यों से लेकर गुप्तों और कन्नाजों के शासकों के अधीन रहीं। इसके बाद यहां महमूद गजनी के भांजे ने तुर्क शासन की भी स्थापना की। मुग़ल शासन के अंतर्गत यहाँ तथाकथित मस्जिद का निर्माण करवाया।
राम जन्मभूमि मंदिर की विशेषताएं

इस वर्ष 5 अगस्त को पीएम मोदी ने श्री राम जन्मभूमि मंदिर का शिलान्यास किया और तभी से इसके निर्माण कार्य की शुरुआत हो गई। देश के 2587 महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों से लाई गई मिट्टी का इस्तेमाल मंदिर निर्माण में किया जाएगा। इसके सतह ही 150 नदियों का जल इसमें शामिल होगा।
ख़ास "श्री राम" ईंटें: मंदिर के शिलान्यास के लिए तामिलनाडु से साधू सोने और चांदी की दो विशेष ईंटें लेकर आएं जिनपर श्री राम लिखा गया है। इसके साथ ही मंदिर का फर्श सफ़ेद संगमरमर का होगा। इस मंदिर का निर्माण सिर्फ पत्थरों, लकड़ियों और सीमेंट से किया जाएगा इसमें किसी भी प्रकार के लोहे का प्रयोग नहीं होगा।
1987 में ही शिल्पकार चंद्रकांत सोमपुरा ने राम मंदिर का मॉडल तैयार किया था। इसी मॉडल को संशोधित कर मंदिर का निर्माण कार्य वर्ष 2024 तक पूरा करने की उम्मीद है।
यह मंदिर तीन मंजिला होने वाला है। रामलला की मूर्ति निचले तल के गर्भगृह में स्थापित की जाएगी। मंदिर की कुल ऊंचाई 161 फीट होगी। मंदिर में प्रवेश के लिए 5 मुख्य दरवाज़े होंगे। प्रत्येक मंजिल पर 106 खम्भे होंगे। इन प्रत्येक खम्भों पर विभिन्न हिन्दू देवी देवताओं की मूर्तियाँ उकेरी जायेंगी। यह अष्टकोणीय शैली का मंदिर होगा जिसमें श्री राम के मुख्य मंदिर के साथ साथ माता सीता, लक्ष्मण, भरत और भगवान गणेश के भी मंदिर होंगे।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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