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क्या Mahashivratri व्रत पीरियड्स में रख सकते हैं या नहीं ? ज्योतिषाचार्य वाई राखी से जानें शास्त्रों के नियम
Mahashivratri 2026 Vrat in Periods: आज यानी 15 फरवरी को महाशिवरात्रि व्रत है इस दिन महादेव की भक्ति का भाव हर भक्त के दिल में होता है। महिलाएं हों या पुरुष या फिर बच्चे शिव भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और जलाभिषेक करते हैं। खासतौर पर महिलाएं विशेष रूप से माता पार्वती और भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए इस दिन कठिन उपवास रखती हैं।
मगर हर महिला के मन में एक ही सवाल होता है कि अगर व्रत से पहले या फिर व्रत के दौरान पीरियड्स आ जाए तो क्या करें। इस बात को लेकर महिलाओं के मन में संशय रहता है कि पीरियड्स के दौरान व्रत रखना चाहिए या नहीं, और बीच में मासिक धर्म आ जाए तो क्या करें?
ज्योतिषाचार्य डॉ वाई राखी के अनुसार, भक्ति भाव मन का विषय है और शारीरिक बदलाव इसमें बाधक नहीं होते। बस, पूजा करने के तरीके और नियमों में कुछ बदलाव की आवश्यकता होती है। आइए विस्तार से जानते हैं कि मासिक धर्म के दौरान महाशिवरात्रि व्रत और पूजा के नियम क्या हैं।

1. क्या पीरियड्स में व्रत रखा जा सकता है? (Religious View)
डॉ वाई राखी के अनुसार, मासिक धर्म के दौरान भी महिलाएं महाशिवरात्रि का व्रत रख सकती हैं। व्रत का संकल्प मन से लिया जाता है और उपवास भूखा रहना या फलाहार रहकर किया जाता है। नियम कहता है कि यदि आपने पहले से व्रत रखने का संकल्प लिया है, तो पीरियड्स आने पर भी आप अपना उपवास जारी रख सकती हैं। इसमें कोई दोष नहीं लगता।
2. मानसिक पूजा का महत्व (The Power of Manas Puja)
शास्त्रों में 'मानसिक पूजा' को सबसे श्रेष्ठ बताया गया है। पीरियड्स के दौरान मंदिर जाना या मूर्ति स्पर्श करना वर्जित माना जाता है, लेकिन आप मन ही मन महादेव का ध्यान कर सकती हैं। इसके लिए आप एक जगह बैठकर 'ॐ नमः शिवाय' का मन ही मन जाप करें। आप शिव चालीसा या शिव स्तुति पढ़ सकती हैं। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि पूजा सामग्री को छुए नहीं। आप स्वयं शिवलिंग पर जल या दूध अर्पित न करें, बल्कि परिवार के किसी अन्य सदस्य से अपने नाम का जल चढ़वा सकती हैं।
3. क्या शिवलिंग छूना वर्जित है? (Important Rule)
प्राचीन परंपराओं और मर्यादा के अनुसार, मासिक धर्म के दौरान पवित्र स्थलों और देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को स्पर्श नहीं करना चाहिए। इस दौरान मंदिर के गर्भग्रह में न जाएं और न ही शिवलिंग का अभिषेक स्पर्श करके करें। आप दूर से हाथ जोड़कर महादेव को अपना प्रणाम निवेदित कर सकती हैं।
4. सेहत का नजरिया: पीरियड्स और उपवास (Health Aspect)
पीरियड्स के दौरान महिलाओं के शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिससे पेट दर्द, ऐंठन और कमजोरी महसूस हो सकती है। ऐसे में 'निर्जला' व्रत रखना आपकी सेहत बिगाड़ सकता है। अगर आपकी हेल्थ ठीक न हो तो आप व्रत न रखें लेकिन रखना ही है तो इस दौरान खुद को हाइड्रेटेड रखें। फलाहार में केला, अनार या नारियल पानी लें ताकि एनर्जी बनी रहे। यदि दर्द अधिक हो, तो दवा लेने में संकोच न करें, क्योंकि जानबूझकर शरीर को कष्ट देना भक्ति नहीं है।
5. अगर बीच में आ जाएं पीरियड्स तो क्या करें?
यदि आपने व्रत शुरू कर दिया है और दोपहर या शाम को पीरियड्स शुरू हो जाएं, तो घबराएं नहीं। आपका व्रत खंडित नहीं माना जाएगा। आप बस पूजा के कर्मकांड (पूजा की थाली छूना, दीप जलाना) बंद कर दें और मानसिक रूप से भगवान का ध्यान जारी रखें।



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