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क्या पीरियड्स में रखा जा सकता है हरियाली तीज का व्रत? यहां है आपके सवाल का जवाब
Hariyali Teej Fast During Periods: हरियाली तीज का पर्व 27 जुलाई 2025 दिन रविवार को पड़ रहा है। सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। यह पर्व श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है और शिव-पार्वती के पावन मिलन का प्रतीक होता है। महिलाएं इस दिन निर्जल व्रत रखकर पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं, सजती-संवरती हैं और झूला झूलती हैं।
लेकिन जब यह पर्व महिलाओं के पीरियड्स यानी मासिक धर्म के दौरान आ जाए, तो अक्सर एक सवाल उठता है कि क्या पीरियड्स में हरियाली तीज का व्रत रखना उचित है या नहीं? यह सवाल न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा होता है, बल्कि सामाजिक मान्यताओं और स्वास्थ्य से भी जुड़ा होता है। आइए जानते हैं इस विषय पर धार्मिक दृष्टिकोण, आधुनिक विज्ञान और महिलाओं के अनुभव क्या कहते हैं।
क्या पीरियड्स में हरियाली तीज का व्रत रख सकते हैं?
महिलाओं का ये सवाल जरूर होता है कि क्या पीरियड्स के दौरान हरियाली तीज का व्रत रख सकते हैं या नहीं? इसका जवाब है हां रख सकते हैं। मगर कुछ शर्तों के साथ जैसे कि आप व्रत तो रख सकते हैं लेकिन पूजा नहीं कर सकते। दरअसल हिंदू धर्म में पीरियड्स के दौरान पूजा करना वर्जित माना गया है। कई जगह तो इस दौरान महिलाओं को रसोई में भी नहीं जाने दिया जाता है। मगर आपका सवाल पीरियड्स के दौरान हरियाली तीज का व्रत रखने पर सवाल था तो वो तो आपको मिल ही गया है कि आप पति की लंबी आयु के लिए व्रत तो करें लेकिन पूजा से दूर रहें।

क्या कहती है धार्मिक मान्यता?
परंपरागत रूप से पीरियड्स के दौरान महिलाओं को पूजा-पाठ, मंदिर प्रवेश, और व्रत-उपवास जैसे कार्यों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। इसका कारण धार्मिक शुद्धता से जुड़ा माना जाता है। कई परिवारों में आज भी पीरियड्स के समय व्रत रखना वर्जित माना जाता है। हालांकि यह नियम हर घर या पंथ में समान नहीं है। कई लोग इसे निजी आस्था और शरीर की स्थिति पर छोड़ते हैं।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण क्या कहता है?
मासिक धर्म एक प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया है। इस दौरान महिला का शरीर पहले से ही हार्मोनल बदलावों से गुजर रहा होता है, जिससे थकान, कमजोरी और चिड़चिड़ापन हो सकता है। ऐसे में निर्जल व्रत रखना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। एक्सपर्ट तो यही राय देते हैं कि इस समय शरीर को पर्याप्त पानी, पोषण और आराम मिलना चाहिए। व्रत के कारण शरीर पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है।
सामाजिक और आधुनिक सोच
आज की आधुनिक सोच यह मानती है कि पीरियड्स में किसी भी धार्मिक कार्य से वंचित करना अनुचित है। कई महिलाएं बिना किसी परेशानी के व्रत रखती हैं और पूजा भी करती हैं। यह निर्णय अब व्यक्तिगत सुविधा, आस्था और स्वास्थ्य पर आधारित हो गया है।



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