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निर्जला एकादशी व्रत में पानी पी सकते हैं या नहीं? जान लें क्या कहते हैं शास्त्र और नियम
Can We Drink Water In Nirjala Ekadashi: सनातन परंपरा में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, लेकिन ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi 2026) अपने नाम की तरह ही सबसे कठिन मानी जाती है। इस व्रत का सबसे मुख्य नियम है भोजन के साथ-साथ जल का भी पूरी तरह त्याग करना। लेकिन जून के इस भीषण गर्मी वाले महीने में बिना पानी के रहना हर किसी के लिए आसान नहीं होता। ऐसे में अक्सर व्रतियों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या निर्जला एकादशी व्रत में पानी बिल्कुल नहीं पी सकते? क्या शास्त्रों में किसी विशेष परिस्थिति में जल ग्रहण करने की छूट दी गई है? आइए जानते हैं आपके सवालों के जवाब।

क्या निर्जला एकादशी में बूंद भर पानी पीना भी वर्जित है?
शास्त्रों के अनुसार, निर्जला एकादशी का व्रत पूरी तरह 'जल रहित' यानी बिना पानी के ही रखा जाता है। एकादशी तिथि के सूर्योदय से लेकर अगले दिन (द्वादशी तिथि) के सूर्योदय के बाद पारण करने तक, अन्न और जल दोनों का त्याग करना अनिवार्य होता है। मान्यता है कि इस दिन पानी न पीकर अपनी इंद्रियों पर विजय प्राप्त की जाती है। इसी कठिन तपस्या के कारण इसे साल की सभी एकादशियों में सबसे श्रेष्ठ और मोक्षदायिनी माना गया है।
क्या पूजा के समय 'आचमन' करने में पानी पी सकते हैं? जानिए शास्त्रों का नियम
व्रत के दौरान पूजा करते समय आचमन (शुद्धिकरण के लिए तीन बार जल लेना) का विशेष महत्व है। इसको लेकर शास्त्रों में एक बेहद सटीक नियम बताया गया है:
कितना पानी लें: पूजा के समय पवित्रता के लिए तीन बार आचमन किया जाता है। आचमन के लिए लिया जाने वाला जल केवल उतना ही होना चाहिए, जितना एक 'माशे' (यानी एक मूंग के दाने या सोने के छोटे सिक्के) के बराबर हो।
क्या इससे व्रत टूटता है: शास्त्रों के अनुसार, पूजा के दौरान हृदय को शुद्ध करने के लिए किया गया इतना कम आचमन जल ग्रहण की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए इससे व्रत भंग नहीं माना जाता। ध्यान रहे कि आचमन से अधिक पानी गले से नीचे नहीं उतरना चाहिए।
किन परिस्थितियों और किन लोगों को मिलती है पानी पीने की छूट?
हिंदू धर्म में 'धर्म' के साथ-साथ 'मानव स्वास्थ्य' और 'प्राण रक्षा' को सबसे ऊपर रखा गया है। शास्त्रों के अनुसार, निम्नलिखित लोगों को निर्जला एकादशी पर पानी पीने या सामान्य व्रत रखने की पूरी छूट है:
बीमार और वृद्ध व्यक्ति: यदि कोई व्यक्ति गंभीर बीमारी से पीड़ित है, दवाइयां ले रहा है, या अत्यधिक वृद्ध है, तो उसे जबरन निर्जला व्रत नहीं रखना चाहिए। वे जल या नींबू पानी पीकर व्रत रख सकते हैं।
गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं: गर्भ में पल रहे शिशु और मां की सेहत के लिए पानी बेहद जरूरी है। ऐसी स्थिति में महिलाओं को केवल फलाहार और जल ग्रहण करके (सजला एकादशी) व्रत रखना चाहिए।
अत्यधिक अस्वस्थ महसूस होने पर: यदि व्रत के दौरान किसी सामान्य व्यक्ति का स्वास्थ्य अचानक बिगड़ने लगे, चक्कर आने लगें या प्राणों पर संकट महसूस हो, तो तुरंत जल ग्रहण कर लेना चाहिए। शास्त्रों में साफ कहा गया है कि 'प्राण रक्षा' सबसे बड़ा धर्म है।
4. भूलवश या अनजाने में पानी पी लेने पर क्या करें? व्रत भंग होने से बचाने का उपाय
यदि अनजाने में या आदत के कारण आपने सुबह-सुबह पानी पी लिया है, तो घबराएं नहीं और न ही यह सोचकर व्रत तोड़ें कि यह खंडित हो गया है। भगवान विष्णु भाव के भूखे हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत सूर्य देव को अर्घ्य दें, भगवान श्रीहरि के सामने हाथ जोड़कर अपनी भूल की क्षमा मांगें और "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करते हुए आगे के व्रत का पालन करें। आपकी सच्ची निष्ठा से व्रत का फल अवश्य मिलेगा।



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