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Is Sewing Allowed During Navratri : नवरात्रों का पावन समय पूरे साल में दो बार आता है, चैत्र और शारदीय नवरात्रि। खासकर शारदीय नवरात्रि, जो कार्तिक मास से ठीक पहले अश्विन मास की शुक्ल प्रतिपदा से आरंभ होती है, बेहद शुभ और महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दौरान मां दुर्गा के 9 अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। भक्त पूरे 9 दिन व्रत रखते हैं, भजन-कीर्तन करते हैं और माता रानी को प्रसन्न करने के लिए नियमों का पालन करते हैं।
लेकिन नवरात्रि को लेकर लोगों के मन में एक सवाल अक्सर उठता है, क्या इस पावन समय में सिलाई-कढ़ाई करनी चाहिए? या फिर इसे अशुभ माना जाता है? आइए विस्तार से जानते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार
नवरात्रि में पूजा और व्रत के दौरान केवल शरीर की पवित्रता ही नहीं, बल्कि मन और कर्म की शुद्धता भी जरूरी होती है। माना जाता है कि इन नौ दिनों में देवी दुर्गा का पृथ्वी पर आगमन होता है और भक्तों के घर-आंगन में दिव्य ऊर्जा का संचार होता है। ऐसे समय में कुछ विशेष कार्य वर्जित बताए गए हैं, जिनमें से एक है सुई-धागे से जुड़ा काम।
कहा जाता है कि सुई का काम नवरात्रि में अशुभ प्रभाव डालता है। सिलाई-कढ़ाई, बुनाई या किसी भी तरह की सुई का प्रयोग करने से मां दुर्गा अप्रसन्न हो सकती हैं। इसका कारण यह है कि सुई को "छेदन करने वाला" यंत्र माना जाता है, और पूजा के समय किसी भी प्रकार का छेदन शुभ नहीं माना जाता।
क्यों मना है सिलाई-कढ़ाई?
आध्यात्मिक दृष्टि से - सुई का काम करने से पूजा की एकाग्रता भंग होती है। भक्त का मन पूजा-पाठ से हटकर घरेलू कार्यों में लगने लगता है।
धार्मिक दृष्टि से - नवरात्रि में हर कार्य का संबंध पुण्य और पाप से जोड़कर देखा जाता है। सुई से वस्त्र या कपड़े छेदना देवी के आगमन के समय नकारात्मक माना गया है।
लोकमान्यता - पुरानी परंपराओं में कहा जाता है कि जो महिलाएं व्रत रखते हुए सिलाई करती हैं, उनकी मनोकामनाएं अधूरी रह जाती हैं।
ऊर्जा प्रवाह - नवरात्रि में घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। ऐसी मान्यता है कि सुई-धागा इस ऊर्जा को बाधित कर सकता है।
किन लोगों को ध्यान रखना चाहिए?
यदि कोई संपूर्ण विधि-विधान से व्रत कर रहा है, तो उसे इन नियमों का पालन जरूर करना चाहिए।
महिलाएं, जो नवरात्रि में कलश स्थापना से लेकर दुर्गा सप्तशती पाठ तक करती हैं, उन्हें खासकर सिलाई-कढ़ाई से परहेज रखना चाहिए।
जो लोग केवल आंशिक रूप से व्रत रखते हैं या सिर्फ श्रद्धा के तौर पर उपवास करते हैं, वे भी कोशिश करें कि नवरात्रि के नौ दिनों में ऐसे कार्यों से दूरी बनाएं।
क्या होता है यदि भूल से सिलाई हो जाए?
कभी-कभी मजबूरी में कोई कपड़ा फट जाए या छोटी-मोटी सिलाई करनी पड़ जाए। ऐसे में श्रद्धालु को घबराने की जरूरत नहीं है। पूजा करने के बाद मां दुर्गा से क्षमा मांग लें और दुर्गा चालीसा या देवी स्तुति का पाठ कर लें। मान्यता है कि सच्चे मन से मां से माफी मांगने पर वह अपने भक्तों की भूल माफ कर देती हैं।
आधुनिक दृष्टिकोण
आज के समय में हर परंपरा का एक तार्किक पहलू भी देखा जाता है। नवरात्रि का समय आत्मसंयम और साधना का होता है। सिलाई-कढ़ाई जैसे कार्यों को रोकने का मुख्य उद्देश्य यह था कि महिलाएं घरेलू कामों से थोड़ा विराम लें और ध्यान-मनन में अधिक समय लगाएं। साथ ही व्रत के दौरान शरीर को आराम देना भी आवश्यक है।
निष्कर्ष
नवरात्रि में सिलाई-कढ़ाई करना धार्मिक दृष्टि से अशुभ माना गया है। यदि आप पूरे नियमों के साथ मां दुर्गा की पूजा कर रहे हैं, तो इन नौ दिनों में सुई-धागे से दूर रहना ही उचित है। यह नियम सिर्फ परंपरा का हिस्सा ही नहीं, बल्कि साधना और आत्मिक शांति से भी जुड़ा है।
इसलिए अगली बार जब नवरात्रि आए और आपके मन में सवाल उठे कि "क्या मुझे सिलाई करनी चाहिए या नहीं?", तो याद रखिए, इन 9 दिनों में भक्ति, साधना और मां की सेवा ही सबसे बड़ा कार्य है। बाकी काम बाद में भी किए जा सकते हैं, लेकिन मां दुर्गा को प्रसन्न करने का यह दुर्लभ अवसर बार-बार नहीं आता।



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