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Chanakya Niti: जिंदगी में कामयाबी के लिए गुरु की होती है जरूरत, जानें कैसे करें गुरु का चुनाव
आचार्य चाणक्य ने अपना जीवन अर्थशास्त्र, राजनीति, सामाजिक नीतियों को दिया। उन्होंने राजनीतिक सलाहकार के साथ साथ एक गुरु की भी भूमिका बहुत अच्छे से निभाई। अपने ग्रन्थ चाणक्य नीति में वे बताते हैं कि एक अच्छे गुरु के क्या गुण होने चाहिए।
हर व्यक्ति के जीवन में गुरु की बहुत अहम् भूमिका होती है। गुरु ही हमें जीवन के द्वन्द, सही गलत, नैतिक व अनैतिक चीज़ों से अवगत कराते हैं और हमेशा हमारा सही मार्गदर्शन करते हैं। एक अच्छा गुरु होने से व्यक्ति का जीवन संवर जाता है।

इतनी महत्वपूर्ण भूमिका होने के कारण ही किसी को अपना गुरु बनाने से पहले उसके कर्मों और वाणी के गुणों को भी समझ लेना चाहिए। जानते हैं आचार्य चाणक्य के द्वारा एक गुरु के लिए कौन से गुण बताये गये हैं -
अनुशासन
कोई व्यक्ति दूसरों के जीवन में अनुशासन तभी ला सकता है जब उसका खुद का जीवन अनुशासित हो। चाणक्य के अनुसार गुरु को अनुशासन प्रिय होना चाहिए। अनुशासन ही जीवन में सफलता की कुंजी होता है। और एक अनुशासित गुरु ही अपने शिष्यों के जीवन में अनुशासन के बीज बो सकता है।इसलिए गुरु ऐसा हो जिनका जीवन स्वयं ही अनुशासित हो।
अवगुणों से दूर
एक अच्छा गुरु स्वयं सद्गुणों से भरा होता है। उसमें लोभ, ईर्ष्या, अहंकार, और मोह जैसे अवगुण नहीं होते। जब गुरु खुद इन अवगुणों से दूर होते हैं तभी वे शिष्यों को भी इन दुर्भावनाओं से दूर रख पाते हैं। जीवन में इन बुरी भावनाओं से दूर रहकर ही व्यक्ति कुछ अच्छा कर पाता है। वर्तमान समय में जब सामाजिक बुराइयां हमको घेरे रहती हैं, अच्छे गुरु की ज़रूरत और भी बढ़ जाती है।
धर्म नीति
चाणक्य के अनुसार गुरु को धर्म का पालन करने वाला होना चाहिए। नैतिकता और धर्म पर चलने वाला व्यक्ति ही अच्छा गुरु बन सकता है। गुरु को धर्म के साथ साथ अपने शिष्यों के प्रति पूर्ण समर्पण भी दिखाना चाहिए, ताकि वे शिष्य सदाचार सीखें और आदर्श नागरिक बनें।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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