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Chhath Puja Vrat Mein Pani Pine Ka Tarika: छठ पूजा व्रत इस विधि से पिएं पानी, नहीं टूटेगा व्रत, मिलेगा पूरा फल
Chhath Puja Vrat Mein Pani Pine Ka Tarika: छठ पूजा सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि सूर्य देव और छठी मैया की आराधना का सबसे कठिन और पवित्र पर्व माना जाता है। यह चार दिन चलने वाला पर्व पूर्ण शुद्धता, संयम और भक्ति से किया जाता है। आज यानी 25 अक्टूबर को नहाय-खाय से इस पर्व की शुरुआत हो रही है जो 28 अक्टूबर को प्रात: सूर्य को अर्घ्य देकर पूरा होगा। पूरे 36 घंटे तक रखे जाने वाले इस व्रत को निर्जला रखा जाता है। हालांकि नहाय-खाय वाले दिन ऐसा कोई नियम नहीं होता है।
मगर खरना से लेकर प्रात: सूर्य अर्घ्य तक विवाहित व्रती महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं, लेकिन कई बार स्वास्थ्य कारणों या पहली बार व्रत रखने पर यह सवाल उठता है कि क्या छठ व्रत में पानी पी सकते हैं? अगर हां, तो किस विधि से पिया जाए ताकि व्रत न टूटे? आज हम आपको वही बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं कि छठ पूजा व्रत के दौरान प्यास से व्याकुल हो उठे हैं तो क्या करें?
छठ पर्व 2025 कब से शुरू है? (Chhath Puja Date 2025)
25 नवंबर- दिन शनिवार- चतुर्थी तिथि- नहाय खाय की शुरुआत
26 नवंबर - दिन रविवार- पंचमी तिथि - खरना
27 नवंबर - दिन सोमवार- षष्ठी तिथि - डूबते सूर्य को अर्घ्य
28 नवंबर - दिन मंगलवार सप्तमी तिथि- उगते सूर्य को जल अर्पित कर व्रत का पारण

नहाय-खाय के दिन क्या खाते हैं?
छठ पर्व की शुरुआत नहाय-खाय से होती है जिसमें व्रती लोगों के लिए सात्विक भोजन बनता है जिसमें लौकी चने की दाल, चावल, आलू की भूजिया, दही, रोटी आदि खाया जाता है। क्या आपने कभी सोचा है कि नहाय-खाय वाले दिन पनीर और अन्य स्वादिष्ट सब्जियों को छोड़कर लौकी की दाल ही क्यों खाई जाती है। बता दें कि लौकी में पानी की मात्रा अधिक होती है जो निर्जला व्रत के दौरान शरीर को हाइड्रेट रखती है और चने की दाल में पोषक तत्व होते हैं जो ताकत देते हैं। एक अन्य कारण ये भी है कि पहले जमाने में कार्तिक के महीने में लौकी आसानी से मिल जाती थी तो उसे खाया जाने लगा जो आज एक परंपरा बन गई है।
छठ पूजा व्रत में क्या है पानी पीने की विधि?
छठ पूजा का व्रत बहुत ही कठिन होता है क्योंकि ये पूरे 36 घंटे का होता जो निर्जला लिया जाता है। इस व्रत में न तो कुछ खा सकते हैं और न ही पानी पी सकते हैं। ऐसे में कई बार गर्भवती महिलाएं और बीमार महिलाएं व्याकुल हो उठती हैं या उनकी तबीयत बिगड़ जाती है। इसलिए एक ऐसी विधि है जिसमें व्रती लोग पानी पी सकते हैं। इसके लिए पानी पीने से पहले छठी मैया का मंत्र ॐ षष्ठी देव्यै नमो नमः, सुख-संपदा दायिनी, पुत्र-पौत्र प्रदायिनी। सर्व रोग निवारिणी, सर्व मनोकामना पूर्यंतु मम॥ और सूर्य देव के मंत्र ॐ सूर्याय नमः॥ का जाप करें।
इसके बाद एक पीतल, तांबे या मिट्टी के थालीनुमा पात्र में पानी भर लें। अब अपने घुटने और भुजाओं को जमीन पर सटाकर पशु यानी गाय की भांति बैठ जाएं और फिर गाय की तरह जीभ से पानी पिएं। यदि आप इस विधि से पानी पीते हैं तो आपका व्रत टूटेगा नहीं और आपको सारे फल मिलेगें और मनोकामना पूरी होगी।



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